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औरैयाः स्कूलों में जलते चूल्हे, धुएं से बच्चे परेशान
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चूल्हे पर एमडीएम बनाती रसोइया। संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। प्रशासन के निर्देश पर सभी स्कूलों में मिट्टी के चूल्हे पर एमडीएम बनाने का काम खत्म किया जा चुका है। उसकी जगह पर रसोई गैस पर एमडीएम बनाए जाने के निर्देश हैं। बावजूद इसके तमाम स्कूलों में आज भी मिट्टी के चूल्हों पर खाना बनाया जा रहा हैै। चूल्हा जलने से उठने वाले धुएं से बच्चे भी परेशान हो रहे हैं।
सरकार ने मिडडे मील बनाने के लिए प्राथमिक विद्यालय और उच्च प्राथमिक विद्यालय के सभी स्कूलों को गैस कनेक्शन दिए थे। इसके बाद कुछ दिन तक तो खाना गैस चूल्हे पर ही बना पर तमाम स्कूलों में फिर मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनने लगा है। दरअसल, गैस सिलिंडर को भरवाने वाली धनराशि को ठिकाने लगाकर चूल्हे पर ही खाना बनवाया जाता है। पिछले दिनों अधिकारियों ने जब कुछ स्कूलों का निरीक्षण किया था तो कुछ स्कूलों में ऐसी स्थिति देखने को मिली थी। अछल्दा ब्लॉक अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय में चूल्हे पर खाना बनता देख उन्होंने नाराजगी जताई थी। इसके साथ ही गैस सिलिंडर में खाना बनाने के निर्देश दिए थे।
विभाग के अनुसार जनपद में 1265 स्कूल हैं। जिसमें 810 प्राथमिक, 206 उच्च प्राथमिक और 249 कंपोजिट विद्यालय हैं। इन सभी स्कूलों में एक लाख 20 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इनके लिए प्रतिदिन मध्याह्न भोजन बनता है। ऐसे अधिकतर स्कूलों में एक से दो माह में एक सिलिंडर भरवाया जाता है। लेकिन कुछ स्कलों में दो-दो माह तक सिलिंडर नहंीं भराया जा रहा है।
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बीएसए विपिन कुमार ने कहा कि जनपद के सभी प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापकों को निर्देशित किया गया है कि सभी छात्र-छात्राओं के लिए गैस सिलिंडर में ही खाना बनाया जाए। किसी स्कूल में यदि खाना मिट्टी के चूल्हे में पकाया जा रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।
नहीं दे सके जवाब
प्राथमिक विद्यालय जनैतपुर में शुक्रवार को ईंट के चूल्हे पर मध्याह्न भोजन बनाया जा रहा था। इतना जरूर था कि चूल्हे से उठने वाले धुएं से बच्चों को बचाने के लिए खुले में बनाया जा रहा था। खाना पका रही रसोइया से नाम पूछा गया तो उसने चुप्पी साध ली। एक शिक्षक से पूछा तो वह भी गोलमोल जवाब देकर बच्चों के कमरे में चले गए।
जरूरत पर बनाते हैं खाना
प्राथमिक विद्यालय जैतापुर में मिट्ठी का चूल्हा बना हुआ है। हालांकि शुक्रवार को यहां कोई भी खाना बनाता नहंीं मिला, खाना गैस-चूल्हे में पकाया जा रहा था। स्कूल प्रबंधन ने बात करने पर बताया कि चूल्हे पर सिर्फ रोटियां सेंकी जाती हैं। चूल्हे की रोटी की सौंधी खुशबू खाने का स्वाद बढ़ा देती है। इसके अलावा पूरा खाना गैस-चूल्हे पर ही पकता है।
गैस हो गई खत्म
पूर्व माध्यमिक विद्यालय जैतापुर में शुक्रवार को मिट्टी से बने चूल्हे पर रसोइया तहरी पका रही थी। जिससे धुएं की वजह से छत काली हो गयी थी। बातचीत करने पर स्कूल अध्यापकों ने बताया कि दो दिन पहले ही गैस खत्म हुई थी। सिलिंडर नहीं भर पाने की वजह से एमडीएम चूल्हे में पकाया जा रहा है।
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सरकार ने मिडडे मील बनाने के लिए प्राथमिक विद्यालय और उच्च प्राथमिक विद्यालय के सभी स्कूलों को गैस कनेक्शन दिए थे। इसके बाद कुछ दिन तक तो खाना गैस चूल्हे पर ही बना पर तमाम स्कूलों में फिर मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनने लगा है। दरअसल, गैस सिलिंडर को भरवाने वाली धनराशि को ठिकाने लगाकर चूल्हे पर ही खाना बनवाया जाता है। पिछले दिनों अधिकारियों ने जब कुछ स्कूलों का निरीक्षण किया था तो कुछ स्कूलों में ऐसी स्थिति देखने को मिली थी। अछल्दा ब्लॉक अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय में चूल्हे पर खाना बनता देख उन्होंने नाराजगी जताई थी। इसके साथ ही गैस सिलिंडर में खाना बनाने के निर्देश दिए थे।
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विभाग के अनुसार जनपद में 1265 स्कूल हैं। जिसमें 810 प्राथमिक, 206 उच्च प्राथमिक और 249 कंपोजिट विद्यालय हैं। इन सभी स्कूलों में एक लाख 20 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इनके लिए प्रतिदिन मध्याह्न भोजन बनता है। ऐसे अधिकतर स्कूलों में एक से दो माह में एक सिलिंडर भरवाया जाता है। लेकिन कुछ स्कलों में दो-दो माह तक सिलिंडर नहंीं भराया जा रहा है।
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बीएसए विपिन कुमार ने कहा कि जनपद के सभी प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापकों को निर्देशित किया गया है कि सभी छात्र-छात्राओं के लिए गैस सिलिंडर में ही खाना बनाया जाए। किसी स्कूल में यदि खाना मिट्टी के चूल्हे में पकाया जा रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।
नहीं दे सके जवाब
प्राथमिक विद्यालय जनैतपुर में शुक्रवार को ईंट के चूल्हे पर मध्याह्न भोजन बनाया जा रहा था। इतना जरूर था कि चूल्हे से उठने वाले धुएं से बच्चों को बचाने के लिए खुले में बनाया जा रहा था। खाना पका रही रसोइया से नाम पूछा गया तो उसने चुप्पी साध ली। एक शिक्षक से पूछा तो वह भी गोलमोल जवाब देकर बच्चों के कमरे में चले गए।
जरूरत पर बनाते हैं खाना
प्राथमिक विद्यालय जैतापुर में मिट्ठी का चूल्हा बना हुआ है। हालांकि शुक्रवार को यहां कोई भी खाना बनाता नहंीं मिला, खाना गैस-चूल्हे में पकाया जा रहा था। स्कूल प्रबंधन ने बात करने पर बताया कि चूल्हे पर सिर्फ रोटियां सेंकी जाती हैं। चूल्हे की रोटी की सौंधी खुशबू खाने का स्वाद बढ़ा देती है। इसके अलावा पूरा खाना गैस-चूल्हे पर ही पकता है।
गैस हो गई खत्म
पूर्व माध्यमिक विद्यालय जैतापुर में शुक्रवार को मिट्टी से बने चूल्हे पर रसोइया तहरी पका रही थी। जिससे धुएं की वजह से छत काली हो गयी थी। बातचीत करने पर स्कूल अध्यापकों ने बताया कि दो दिन पहले ही गैस खत्म हुई थी। सिलिंडर नहीं भर पाने की वजह से एमडीएम चूल्हे में पकाया जा रहा है।

स्कूल में रखा मिट्टी का चूल्हा। संवाद- फोटो : AURAIYA

चूल्हे पर तहरी पकातीं रसोइया। संवाद- फोटो : AURAIYA