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पंचामृत धारा के बीच क्षमा वाणी पर्व मनाया
ब्यूरो अमर उजाला, औरैया
Updated Fri, 02 Oct 2015 12:07 AM IST
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बाबरपुर के मोहल्ला नवीन नगर स्थित जैन मंदिर में दो दिन से चल रहा क्षमा वाणी पर्व पंचामृत धारा के साथ संपन्न हो गया। भक्तों ने भगवान तीर्थकर पार्श्वनाथ की प्रतिमा का अभिषेक कराकर परंपरागत तरीके से यह पर्व मनाया।
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जैन धर्म के अनुयायियों के अनुसार भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष को यह पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को मनाने का उद्देश्य मानव जीवन की सारी गंदगी को अपनी क्षमा आदि धर्म रूपी तरंगों के द्वारा बाहर करता है । जीवन को शीतल एवं साफ सुथरा बनाता है। धर्म में आत्मा का ही निज भाव है, जो क्रोधादि से ढके रहते हैं ।
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यह दश धर्म उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य एवं ब्रहमचर्य हैं । यह दश धर्म नहीं बल्कि धर्म के दश लक्षण है? यह दसों धर्म अपने प्रति घातक दोषों के क्षय होने पर प्रगट हो जाते हैं।
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दो दिन से चल रहे आयोजन में केसरिया व पीत वस्त्र धारण कर मुकुट से सजे इंद्रों के रूप में जैन पुजारियों ने पार्श्वनाथ महावीर स्वामी की प्रतिमा के सामने धर्म प्रवचन किए ।
उपस्थित जैन समुदाय ने भक्ति प्रार्थना, धार्मिक संगीत भजनों के माध्यम से आयोजन को सफल बनाया । इंद्र बने पुजारियों ने जैन मंत्रोचारण के साथ पंचामृत जलधारा से अमृत बरसाया।
पूजा अर्चना के बाद महाआरती आदि का आयोजन किया गया। इसके उपरांत परंपरा को निभाते हुए बच्चों व युवाओं को संस्कारित करते हुये यथोचित क्षमा याचना, क्षमा वाणी की गई ।
जैन पुजारियों ने क्षमा वाणी के माध्यम से आग्रह किया गया कि अपनी संस्कृति को अपने जीवन में धारण कर सभी को संस्कारवान बनाए। गलतियों, गिले शिकवे को दूर कर सुधार कर भविष्य मे कोई गलत कार्य न करने की प्रतिज्ञा करें।
इस अवसर पर रतन कुमार जैन, राम कुमार जैन, भुवनेश जैन, प्रकाश चंद्र जैन, निखिल जैन, आनंद जैन, रतन जैन, मुनुआ जैन आदि जैन समुदाय के लोग मौजूद रहे।