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लाखों गबन के आरोप में फिर घिरा समाज कल्याण विभाग
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औरैया। वृद्धावस्था पेंशन घोटाले के बाद एक बार फिर से समाज कल्याण कार्यालय चर्चा में है। इस बार अनुसूचित जाति अत्याचार उत्पीड़न के मद के 25 लाख रुपये की हेराफेरी करने के आरोप लिपिक पर लगे हैं। कोषाधिकारी ने पूरे प्रकरण से जुड़ीं फाइलें व अभिलेख तलब किए हैं। वहीं सीडीओ का कहना है कि प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
अनुसूचित जाति अत्याचार उत्पीड़न के रुपये के गबन के मामले में लोहिया नगर निवासी शिवम सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र भेजा था। इसमें उन्होंने समाज कल्याण कार्यालय के पटल सहायक पर 25 लाख रुपये अपने सगे संबंधियों के खाते में स्थानांतरित करने का आरोप लगाया था। तब विभाग में हड़कंप मचा है।
मामले में एडीएम रेखा एस. चौहान के निर्देश पर कोषाधिकारी प्रदीप कुमार ने सात मई को समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय को पत्र भेजकर सूचनाएं मांगी थी। जिसमें जनपद स्तरीय समिति द्वारा स्वीकृत लाभार्थियों की सूची, टोकनवार आहरित किए गए लाभार्थियों की सूची मांगी। इसके साथ ही आहरित किए गए टोकन का लेखा शीर्षक व मानक मद वित्तीय वर्ष 2021-22 में उक्त मद में कितना आवंटन प्राप्त हुआ।
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इसके सापेक्ष कितना व्यय किया गया, फेल ट्रांजेक्शन में भुगतान किए गए लाभार्थियों की सूची आदि की जानकारी मांगी है। करीब एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी समाज कल्याण विभाग से सूचनाएं कोषागार कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
कोषाधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि इस प्रकरण में सात मई को समाज कल्याण विभाग को पत्र लिखकर वांछित सूचनाएं मांगी गई थी, जो कार्यालय को प्राप्त नहीं हुई है। इस संबंध में विभाग को दोबारा पत्र भेजा गया है। वहीं मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह का कहना है कि प्रकरण में समाज कल्याण अधिकारी से सभी आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जांच में रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
पेंशन घोटाले की अभी चल रही जांच
समाज कल्याण विभाग में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी वर्ष 2018-19, 2020 में 558 लाभार्थियों के खाते बदल कर गलत ढंग से करीब 65 लाख रुपये की हेराफेरी की गई थी। इस मामले में दो लिपिक समेत तीन तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी घेरे में आए थे। इस पर शासन से दो लिपिकों पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। जबकि विभागीय अधिकारियों से गबन की धनराशि रिकवरी कराई जा चुकी है। जबकि अभी भी पूरे प्रकरण की जांच चल रही है। विभाग के निशाने पर कई और कर्मचारी है। सीडीओ ने बताया कि पहले की जांच में भी जल्द कार्रवाई होगी।
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अनुसूचित जाति अत्याचार उत्पीड़न के रुपये के गबन के मामले में लोहिया नगर निवासी शिवम सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र भेजा था। इसमें उन्होंने समाज कल्याण कार्यालय के पटल सहायक पर 25 लाख रुपये अपने सगे संबंधियों के खाते में स्थानांतरित करने का आरोप लगाया था। तब विभाग में हड़कंप मचा है।
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मामले में एडीएम रेखा एस. चौहान के निर्देश पर कोषाधिकारी प्रदीप कुमार ने सात मई को समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय को पत्र भेजकर सूचनाएं मांगी थी। जिसमें जनपद स्तरीय समिति द्वारा स्वीकृत लाभार्थियों की सूची, टोकनवार आहरित किए गए लाभार्थियों की सूची मांगी। इसके साथ ही आहरित किए गए टोकन का लेखा शीर्षक व मानक मद वित्तीय वर्ष 2021-22 में उक्त मद में कितना आवंटन प्राप्त हुआ।
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इसके सापेक्ष कितना व्यय किया गया, फेल ट्रांजेक्शन में भुगतान किए गए लाभार्थियों की सूची आदि की जानकारी मांगी है। करीब एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी समाज कल्याण विभाग से सूचनाएं कोषागार कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
कोषाधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि इस प्रकरण में सात मई को समाज कल्याण विभाग को पत्र लिखकर वांछित सूचनाएं मांगी गई थी, जो कार्यालय को प्राप्त नहीं हुई है। इस संबंध में विभाग को दोबारा पत्र भेजा गया है। वहीं मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह का कहना है कि प्रकरण में समाज कल्याण अधिकारी से सभी आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जांच में रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
पेंशन घोटाले की अभी चल रही जांच
समाज कल्याण विभाग में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी वर्ष 2018-19, 2020 में 558 लाभार्थियों के खाते बदल कर गलत ढंग से करीब 65 लाख रुपये की हेराफेरी की गई थी। इस मामले में दो लिपिक समेत तीन तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी घेरे में आए थे। इस पर शासन से दो लिपिकों पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। जबकि विभागीय अधिकारियों से गबन की धनराशि रिकवरी कराई जा चुकी है। जबकि अभी भी पूरे प्रकरण की जांच चल रही है। विभाग के निशाने पर कई और कर्मचारी है। सीडीओ ने बताया कि पहले की जांच में भी जल्द कार्रवाई होगी।