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पर्यावरण संतुलन के लिए किया हवन-यज्ञ
अमर उजाला ब्यूरो अजीतमल (औरैया)
Updated Tue, 18 Oct 2016 12:25 AM IST
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पर्यावरण संतुलन के लिए यज्ञ हवन किया
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आधुनिक समाज में पर्यावरण खतरे की आशंका को देखते हुये पर्यावरण संतुलन के लिए लोगों ने हवन-यज्ञ किया। इसके बाद आयोजित गोष्ठी में प्रमुख लोगों ने पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
शरद पूर्णिमा के अवसर पर रविवार को विश्नोई उद्यान बिरूहुनी में पर्यावरण यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें दूषित हो रहे पर्यावरण को बचाने के लिये मंत्रोच्चारण के साथ आचार्य पारस नाथ द्विवेदी ने आहुतियॉ दी। इसके बाद पर्यावरण पर आधारित गोष्ठी की गई। इसमें कैलाश त्रिपाठी ने वृक्षों को मानव जीवन का अंग बताया और सभी लोगों से पौधारोपण करने की अपील की। जनता इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य धमेंद्र दत्त दुबे ने पर्यावरण को शुद्ध करने के लिये इस तरह के आयोजन ज्यादा से ज्यादा संख्या में होने चाहिए। पर्यावरणविद भगवत स्वरूप विश्नोई ने कहा कि अगर पर्यावरण को शुद्व रखना है तो ज्यादा से ज्यादा संख्या में पौधों को रोपित करना होगा। इस मौके पर सत्यनारायण मिश्रा, गिरजाशंकर त्रिपाठी, रामबहादुर मिश्रा आदि ने पर्यावरण पर काव्य पाठ करके लोगों को जागरूक किया। वहीं संचालन कर रहे डॉ. अजय कुमार सिंह ने पर्यावरण से सम्बंधित छंद और कविताओं के माध्यम से गोष्ठी में चार चांद लगा दिये। गोष्ठी में रामकुमार अवस्थी, अंशू तिवारी, धीरज शुक्ला, रामसिंह, सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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शरद पूर्णिमा के अवसर पर रविवार को विश्नोई उद्यान बिरूहुनी में पर्यावरण यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें दूषित हो रहे पर्यावरण को बचाने के लिये मंत्रोच्चारण के साथ आचार्य पारस नाथ द्विवेदी ने आहुतियॉ दी। इसके बाद पर्यावरण पर आधारित गोष्ठी की गई। इसमें कैलाश त्रिपाठी ने वृक्षों को मानव जीवन का अंग बताया और सभी लोगों से पौधारोपण करने की अपील की। जनता इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य धमेंद्र दत्त दुबे ने पर्यावरण को शुद्ध करने के लिये इस तरह के आयोजन ज्यादा से ज्यादा संख्या में होने चाहिए। पर्यावरणविद भगवत स्वरूप विश्नोई ने कहा कि अगर पर्यावरण को शुद्व रखना है तो ज्यादा से ज्यादा संख्या में पौधों को रोपित करना होगा। इस मौके पर सत्यनारायण मिश्रा, गिरजाशंकर त्रिपाठी, रामबहादुर मिश्रा आदि ने पर्यावरण पर काव्य पाठ करके लोगों को जागरूक किया। वहीं संचालन कर रहे डॉ. अजय कुमार सिंह ने पर्यावरण से सम्बंधित छंद और कविताओं के माध्यम से गोष्ठी में चार चांद लगा दिये। गोष्ठी में रामकुमार अवस्थी, अंशू तिवारी, धीरज शुक्ला, रामसिंह, सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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