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मंत्री जी देखें, जिले में दम तोड़ रहीं स्वास्थ्य सेवाएं
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भगौतीपुर में बनकर तैयार ट्रामा सेंटर। संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। जिले के प्रभारी मंत्री व राज्यमंत्री संसदीय कार्य, चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य, परिवार तथा मातृ एवं शिशु कल्याण विभाग मयंकेश्वर शरण सिंह शुक्रवार से दो दिवसीय दौरे पर जिले में रहेंगे। वैसे मंत्री जी, कहने के लिए जिले में 100 शैया, 50 शैया अस्पताल के साथ नेत्र चिकित्सालय, मातृ शिशु अस्पताल और ट्रामा सेंटर जैसे सुविधाएं मुहैया हो चुकी हैं। इसके अलावा मेडिकल कालेज का निर्माण भी चल रहा है। मगर करोड़ों की परियोजनाएं सिर्फ सफेद हाथी साबित हो रही हैं।
स्वास्थ्य से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं अभी आम जनता से कोसों दूर हैं। इसका कारण संसाधनों, डाक्टरों के साथ स्टाफ के अभाव में संचालन न हो पाना है। आज भी जांच, इलाज के लिए लोगों को कानपुर, सैफई के चक्कर लगाने पड़ रहे है। जबकि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत है। बावजूद इसके जिले में स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। जिम्मेदार सालों से झूठे आश्वासन देकर स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने का सपना दिखाते चले आ रहे हैं। अब मंत्री जी आप ही इन दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाओं को ऑक्सीजन देने का काम कर सकते हैं।
ट्रामा सेंटर
जिले में बढ़ते सड़क हादसे और लोगों बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के उद्देश्य से औरैया शहर से सटे भगौतीपुर में दो करोड़ 64 लाख रुपये की लागत से ट्रामा सेंटर बना। आज तक विभाग इसका संचालन शुरू नहीं करा सका। सीएमओ स्टाफ तैनाती के लिए कई बार शासन और उच्चाधिकारियों को पत्र लिखे जाने की बात कह चुकी हैं पर संचालन आज तक शुरू नहीं हो सका।
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नेत्र चिकित्सालय
बिधूना में सात करोड़ की लागत से डॉ.राममनोहर लोहिया नेत्र चिकित्सालय छह माह से बनकर तैयार है। आज तक इस अस्पताल में न तो किसी चिकित्सक की तैनाती हुई और न ही इसे संचालित कराया गया। दो माह पहले सीएमओ ने शासन से पत्र भेज कर मांग की थी। अस्पताल संचालन न होने से आज भी मरीजों को कन्नौज मेडिकल कालेज, सैफई व कानपुर जाना पड़ रहा है।
मातृ-शिशु अस्पताल
महिला और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया हो इसके लिए बिधूना में पांच करोड़ रुपये से मातृ शिशु अस्पताल बना। इस अस्पताल के संचालन होने से जिले के साथ आस पास जिले के नजदीकी गांव को लाभ मिलता, लेकिन यह भी उपेक्षा का शिकार है। आज तक यहां किसी की तैनाती नहीं की गई और न ही संचालन पर ध्यान दिया गया।
ब्लड बैंक-
वर्ष 2013 से पैथोलॉजिस्ट और लैब टेक्नीशियन की तैनाती न हो पाने के कारण बंद चल रही ब्लड बैंक का आज तक संचालन नहीं हो सका है। जबकि पैथोलॉजिस्ट की तैनाती के साथ सीएमओ ने विभागीय स्तर पर एलटी की तैनाती भी की है। अब मामला लाइसेंस नवीनीकरण और नए लाइसेंस की प्रक्रिया में फंसा है। जिम्मेदार अफसर एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ पल्ला झाड़ रहे है। नौ वर्ष से बंद पड़ी ब्लड बैंक के कई उपकरण खराब भी हो गए है, एसी गायब है। ब्लड बैंक चालू हो तो मरीज और तीमारदारों को अतिरिक्त बोझ और भगमभाग से निजात मिले।
उप स्वास्थ्य केंद्र और हेल्थ वेलनेस सेंटर भी बदहाल
करीब आठ माह पहले किराए के भवन में 14 उप स्वास्थ्य केंद्र खोले गए थे। इनमें आशा और एएनएम की तैनाती कर टीकाकरण, गर्भवतियों की जांच, किशोरियों को दवाइयां आदि उपलब्ध कराया जाना था। विभाग पिछले कई महीनों से किराया दे रहा है, लेकिन यह नियमित नहीं खुल रहे हैं। यही हाल जिले के करीब 80 हेल्थ वेलनेस सेंटर का है। उप स्वास्थ्य केंद्रों को उच्चीकृत तो किया गया, लेकिन सभी जगह सीएचओ की तैनाती नहीं की जा सकी है।
सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की कमी
शहर के 50 शैया और 100 शैया अस्पताल में विशेष चिकित्सकों के साथ काफी स्टाफ की कमी है। जिसमें 100 शैया युक्त जिला अस्पताल में दो फिजीशियन, एक स्किन/एसटीडी, एक निश्चेतक, दो जनरल सर्जन, एक आर्थोपेडिक सर्जन, एक ईएनटी सर्जन, तीन ईएमओ, चिकित्साधिकारी (कॉर्डियोलॉजिस्ट) व चिकित्साधिकारी (पैथोलॉजिस्ट) के पद रिक्त है। महिला विभाग में चिकित्सा अधीक्षक, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, दो ईएमओ, दो निश्चेतक, चिकित्साधिकारी (कॉर्डियोलॉजिस्ट), चिकित्साधिकारी (पैथोलॉजिस्ट) व दो वरिष्ठ स्त्री रोग परामर्शदाता के पद खाली है। महिला एवं बाल चिकित्सालय में चिकित्सा अधीक्षक, तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ, तीन बाल रोग विशेषज्ञ, तीन निश्चेतक, छह ईएमओ, चिकित्साधिकारी (कॉर्डियोलॉजिस्ट) व चिकित्साधिकारी (पैथोलॉजिस्ट) पद रिक्त है।
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स्वास्थ्य से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं अभी आम जनता से कोसों दूर हैं। इसका कारण संसाधनों, डाक्टरों के साथ स्टाफ के अभाव में संचालन न हो पाना है। आज भी जांच, इलाज के लिए लोगों को कानपुर, सैफई के चक्कर लगाने पड़ रहे है। जबकि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत है। बावजूद इसके जिले में स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। जिम्मेदार सालों से झूठे आश्वासन देकर स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने का सपना दिखाते चले आ रहे हैं। अब मंत्री जी आप ही इन दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाओं को ऑक्सीजन देने का काम कर सकते हैं।
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ट्रामा सेंटर
जिले में बढ़ते सड़क हादसे और लोगों बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के उद्देश्य से औरैया शहर से सटे भगौतीपुर में दो करोड़ 64 लाख रुपये की लागत से ट्रामा सेंटर बना। आज तक विभाग इसका संचालन शुरू नहीं करा सका। सीएमओ स्टाफ तैनाती के लिए कई बार शासन और उच्चाधिकारियों को पत्र लिखे जाने की बात कह चुकी हैं पर संचालन आज तक शुरू नहीं हो सका।
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नेत्र चिकित्सालय
बिधूना में सात करोड़ की लागत से डॉ.राममनोहर लोहिया नेत्र चिकित्सालय छह माह से बनकर तैयार है। आज तक इस अस्पताल में न तो किसी चिकित्सक की तैनाती हुई और न ही इसे संचालित कराया गया। दो माह पहले सीएमओ ने शासन से पत्र भेज कर मांग की थी। अस्पताल संचालन न होने से आज भी मरीजों को कन्नौज मेडिकल कालेज, सैफई व कानपुर जाना पड़ रहा है।
मातृ-शिशु अस्पताल
महिला और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया हो इसके लिए बिधूना में पांच करोड़ रुपये से मातृ शिशु अस्पताल बना। इस अस्पताल के संचालन होने से जिले के साथ आस पास जिले के नजदीकी गांव को लाभ मिलता, लेकिन यह भी उपेक्षा का शिकार है। आज तक यहां किसी की तैनाती नहीं की गई और न ही संचालन पर ध्यान दिया गया।
ब्लड बैंक-
वर्ष 2013 से पैथोलॉजिस्ट और लैब टेक्नीशियन की तैनाती न हो पाने के कारण बंद चल रही ब्लड बैंक का आज तक संचालन नहीं हो सका है। जबकि पैथोलॉजिस्ट की तैनाती के साथ सीएमओ ने विभागीय स्तर पर एलटी की तैनाती भी की है। अब मामला लाइसेंस नवीनीकरण और नए लाइसेंस की प्रक्रिया में फंसा है। जिम्मेदार अफसर एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ पल्ला झाड़ रहे है। नौ वर्ष से बंद पड़ी ब्लड बैंक के कई उपकरण खराब भी हो गए है, एसी गायब है। ब्लड बैंक चालू हो तो मरीज और तीमारदारों को अतिरिक्त बोझ और भगमभाग से निजात मिले।
उप स्वास्थ्य केंद्र और हेल्थ वेलनेस सेंटर भी बदहाल
करीब आठ माह पहले किराए के भवन में 14 उप स्वास्थ्य केंद्र खोले गए थे। इनमें आशा और एएनएम की तैनाती कर टीकाकरण, गर्भवतियों की जांच, किशोरियों को दवाइयां आदि उपलब्ध कराया जाना था। विभाग पिछले कई महीनों से किराया दे रहा है, लेकिन यह नियमित नहीं खुल रहे हैं। यही हाल जिले के करीब 80 हेल्थ वेलनेस सेंटर का है। उप स्वास्थ्य केंद्रों को उच्चीकृत तो किया गया, लेकिन सभी जगह सीएचओ की तैनाती नहीं की जा सकी है।
सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की कमी
शहर के 50 शैया और 100 शैया अस्पताल में विशेष चिकित्सकों के साथ काफी स्टाफ की कमी है। जिसमें 100 शैया युक्त जिला अस्पताल में दो फिजीशियन, एक स्किन/एसटीडी, एक निश्चेतक, दो जनरल सर्जन, एक आर्थोपेडिक सर्जन, एक ईएनटी सर्जन, तीन ईएमओ, चिकित्साधिकारी (कॉर्डियोलॉजिस्ट) व चिकित्साधिकारी (पैथोलॉजिस्ट) के पद रिक्त है। महिला विभाग में चिकित्सा अधीक्षक, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, दो ईएमओ, दो निश्चेतक, चिकित्साधिकारी (कॉर्डियोलॉजिस्ट), चिकित्साधिकारी (पैथोलॉजिस्ट) व दो वरिष्ठ स्त्री रोग परामर्शदाता के पद खाली है। महिला एवं बाल चिकित्सालय में चिकित्सा अधीक्षक, तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ, तीन बाल रोग विशेषज्ञ, तीन निश्चेतक, छह ईएमओ, चिकित्साधिकारी (कॉर्डियोलॉजिस्ट) व चिकित्साधिकारी (पैथोलॉजिस्ट) पद रिक्त है।

50 शैया युक्त मातृ शिशु अस्पताल। संवाद- फोटो : AURAIYA

बिधूना का डॉ. राममनोहर लोहिया नेत्र चिकित्सालय। संवाद- फोटो : AURAIYA