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घोटाला: 39 बार खातों से लेनदेन कर 26 लाख हड़पे
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औरैया। समाज कल्याण कार्यालय में अनुसूचित जाति अत्याचार मद में 26 लाख की हेराफेरी के मामले में कई विभागीय अधिकारी भी निशाने पर है। जांच में सामने आया है कि पटल सहायक व अन्य कर्मियों ने अपने सगे संबंधियों के खातों में 39 बार में 26 लाख की धनराशि स्थानांतरित की। विभागीय अधिकारियों की संलिप्त पर जिला प्रशासन ने एक टीम और बनाई है, जो अभिलेखों की क्रास जांच करेगी।
वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए शासन से तीन करोड़ रुपये अनुसूचित जाति अत्याचार मद के लिए आवंटित हुए थे। इस मद में 26 लाख हेराफेरी किए जाने के आरोप लगे थे। विभागीय जांच शुरू हुई तो एक के बाद एक कई वर्षों की गड़बड़ियां निकल कर सामने आईं हैं।
सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि जांच में पता चला है कि वर्ष 2019-20 में 13, वर्ष 2020-21 में नौ, वर्ष 2021-22 में 17 बार अलग अलग-खातों में 26 लाख की धनराशि स्थानांतरित कराई गई है। जांच में पटल सहायक आकाश गौतम, लेखाकार वासिद, कार्यालय सहायक संदीप कुमार, कंप्यूटर आपरेटर मनोज कुमार की संलिप्तता पाई गई है।
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इन लोगों ने अभिलेखों में हेराफेरी कर 39 बार में लेनदेन कर 26 लाख का हेरफेर किया है। वर्ष 2021-22 में तत्कालीन प्रभारी समाज कल्याण अधिकारी आवेश कुमार के कार्यकाल के दौरान भी खातों में परिवर्तन पाया गया है। मामले में क्रास जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो दो दिन में पूरी रिपोर्ट देेगी। विभागीय कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन भेजी जाएगी।
जांच रिपोर्ट में बचते नजर आए अफसर
जिला समाज कल्याण अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि विभाग में वृद्धावस्था पेंशन, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में भी खाते बदल कर कर्मचारियों ने हेराफेरी की। अधिकारियों की व्यस्तता का लाभ उठा कर कर्मचारी हेराफेरी करते रहे। इस पर मनमानी रोकने अनुशासनहीनता को लेकर पत्रचार भी किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसका फायदा उठा कर कर्मचारियों ने कूटरचित तरीके से हेराफेरी की।
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वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए शासन से तीन करोड़ रुपये अनुसूचित जाति अत्याचार मद के लिए आवंटित हुए थे। इस मद में 26 लाख हेराफेरी किए जाने के आरोप लगे थे। विभागीय जांच शुरू हुई तो एक के बाद एक कई वर्षों की गड़बड़ियां निकल कर सामने आईं हैं।
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सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि जांच में पता चला है कि वर्ष 2019-20 में 13, वर्ष 2020-21 में नौ, वर्ष 2021-22 में 17 बार अलग अलग-खातों में 26 लाख की धनराशि स्थानांतरित कराई गई है। जांच में पटल सहायक आकाश गौतम, लेखाकार वासिद, कार्यालय सहायक संदीप कुमार, कंप्यूटर आपरेटर मनोज कुमार की संलिप्तता पाई गई है।
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इन लोगों ने अभिलेखों में हेराफेरी कर 39 बार में लेनदेन कर 26 लाख का हेरफेर किया है। वर्ष 2021-22 में तत्कालीन प्रभारी समाज कल्याण अधिकारी आवेश कुमार के कार्यकाल के दौरान भी खातों में परिवर्तन पाया गया है। मामले में क्रास जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो दो दिन में पूरी रिपोर्ट देेगी। विभागीय कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन भेजी जाएगी।
जांच रिपोर्ट में बचते नजर आए अफसर
जिला समाज कल्याण अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि विभाग में वृद्धावस्था पेंशन, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में भी खाते बदल कर कर्मचारियों ने हेराफेरी की। अधिकारियों की व्यस्तता का लाभ उठा कर कर्मचारी हेराफेरी करते रहे। इस पर मनमानी रोकने अनुशासनहीनता को लेकर पत्रचार भी किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसका फायदा उठा कर कर्मचारियों ने कूटरचित तरीके से हेराफेरी की।