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औरैयाः डेयरी खोलकर महिलाओं की आदर्श बनीं रीता
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डेयरी उद्योग में मशीनों के साथ रीता दुबे
- फोटो : AURAIYA
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दिबियापुर (औरैया)। दो वर्ष पूर्व डेयरी उद्योग लगाकर स्वरोजगार अपनाने वाली रीता दुबे आज क्षेत्र की महिलाओं के लिए आदर्श बनी हुई हैं। वह महिलाओं को स्वरोजगार से जुड़ने के लिए लगातार प्रेरित कर रहीं हैं। आने वाले दिनों में दूध उत्पादों की पैकिंग कर महिलाओं को रोजगार देने की तैयारी में जुटी हैं। वहीं, कुछ महिलाएं डेयरी में काम कर धन अर्जित कर रहीं हैं।
दिबियापुर क्षेत्र के दुबे का पुर्वा निवासी रीता दुबे बताती हैं कि दो वर्ष पहले वह एक घरेलू महिला थीं। पति बृजेंद्र दुबे व्यवसाय करते थे। इसी दौरान गांव में खाद्य प्रसंस्करण विभाग औरैया ने गांव में शिविर लगाकर उद्योग लगाने के लिए प्रेरित किया। इस पर डेयरी उद्योग लगाने की ललक पैदा हुई। औरैया में ट्रेनिंग के बाद उन्होंने डेयरी उद्योग की यूनिट गांव में ही लगाई। इसमें खोया बनाने की मशीन, दूध ठंडा करने वाली मशीन, क्रीम सेपरेटर मशीन लगी हैं। डेयरी उद्योग से खोया, पनीर, घी, दूध का व्यवसाय कर रहीं हैं।
अभी शुरूआत होने के कारण एक दिन में लगभग डेढ़ क्विंटल दूध की खपत है। दूध से उत्पादित सामान की अधिकांश बिक्री गांव में ही हो जाती है। होटलों और दुकानों पर काफी सामान सप्लाई होता है। बताया कि वह गांव की महिलाओं को स्वरोजगार से जुड़ने के लिए लगातार प्रेरित कर रहीं हैं। उनकी प्रेरणा से कई महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ रहीं हैं। उनके साथ भी कई महिलाएं जुड़कर धन अर्जित कर रहीं हैं।
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पैकिंग कर महिलाओं को रोजगार देने की तैयारी
रीता दुबे का कहना है कि वह अपने पति बृजेंद्र दुबे के सहयोग से पैकिंग मशीन लगा रहीं हैं। मशीन आ गई है। मशीन के माध्यम से दूध, दही, घी के पैकेट पैक कर बाजार में बेचे जाएंगे। इसमें गांव क्षेत्र की महिलाओं को और रोजगार दे सकेंगी। जल्द ही पैकिंग का काम शुरू हो जाएगा।
मशीन से चेक करतीं दूध की क्वालिटी
रीता दुबे का कहना है कि प्रतिदिन आने वाले दूध की क्वालिटी के आधार पर किसानों को दूध का भुगतान किया जाता है। इसके लिए उनके डेयरी उद्योग में मशीन लगी है। मशीन से आने वाले दूध की क्वालिटी वह स्वयं चेक करती हैं।
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दिबियापुर क्षेत्र के दुबे का पुर्वा निवासी रीता दुबे बताती हैं कि दो वर्ष पहले वह एक घरेलू महिला थीं। पति बृजेंद्र दुबे व्यवसाय करते थे। इसी दौरान गांव में खाद्य प्रसंस्करण विभाग औरैया ने गांव में शिविर लगाकर उद्योग लगाने के लिए प्रेरित किया। इस पर डेयरी उद्योग लगाने की ललक पैदा हुई। औरैया में ट्रेनिंग के बाद उन्होंने डेयरी उद्योग की यूनिट गांव में ही लगाई। इसमें खोया बनाने की मशीन, दूध ठंडा करने वाली मशीन, क्रीम सेपरेटर मशीन लगी हैं। डेयरी उद्योग से खोया, पनीर, घी, दूध का व्यवसाय कर रहीं हैं।
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अभी शुरूआत होने के कारण एक दिन में लगभग डेढ़ क्विंटल दूध की खपत है। दूध से उत्पादित सामान की अधिकांश बिक्री गांव में ही हो जाती है। होटलों और दुकानों पर काफी सामान सप्लाई होता है। बताया कि वह गांव की महिलाओं को स्वरोजगार से जुड़ने के लिए लगातार प्रेरित कर रहीं हैं। उनकी प्रेरणा से कई महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ रहीं हैं। उनके साथ भी कई महिलाएं जुड़कर धन अर्जित कर रहीं हैं।
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पैकिंग कर महिलाओं को रोजगार देने की तैयारी
रीता दुबे का कहना है कि वह अपने पति बृजेंद्र दुबे के सहयोग से पैकिंग मशीन लगा रहीं हैं। मशीन आ गई है। मशीन के माध्यम से दूध, दही, घी के पैकेट पैक कर बाजार में बेचे जाएंगे। इसमें गांव क्षेत्र की महिलाओं को और रोजगार दे सकेंगी। जल्द ही पैकिंग का काम शुरू हो जाएगा।
मशीन से चेक करतीं दूध की क्वालिटी
रीता दुबे का कहना है कि प्रतिदिन आने वाले दूध की क्वालिटी के आधार पर किसानों को दूध का भुगतान किया जाता है। इसके लिए उनके डेयरी उद्योग में मशीन लगी है। मशीन से आने वाले दूध की क्वालिटी वह स्वयं चेक करती हैं।