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तत्कालीन नायब तहसीलदार, कानूनगो व लेखपाल पर दर्ज होगी रिपोर्ट
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औरैया। जीवित व्यक्ति को मृत दर्शाते हुए ग्राम शहबाजपुर स्थित जमीन को सरकारी अभिलेखों में फर्जीवाड़ा करके दूसरे के नाम दर्ज करने के आरोपी तत्कालीन नायब तहसीलदार, कानूनगो तथा लेखपाल के खिलाफ कोतवाली बिधूना में अभियोजन दर्ज करने के आदेश न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जीवक कुमार सिंह ने दिए हैं।
अभियोजन के अनुसार ग्राम पुर्वा कड़ा, मौजा बराऊ थाना सहायल औरैया निवासी 70 वर्षीय गंगाराम ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया कि उसकी कुछ कृषि भूमि मौजा शहबाजपुर में है। उक्त खेत को उसके जीवित होते हुए भी तत्कालीन लेखपाल रामस्वरूप शाक्य, कानूनगो सुरेश सिंह यादव तथा नायब तहसीलदार
बिधूना संजय कुशवाहा ने 20 मार्च 2015 को विजय सिंह व योगेंद्र सिंह निवासी बराऊ के नाम सरकारी अभिलेखों में दर्ज कर दिया। बताया कि इस हेराफेरी की जानकारी तब हुई, जब वह खतौनी का इंतखाब लेने तहसील बिधूना गए। इंतखाब में उनका खेत दूसरे के नाम दर्ज मिला।
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इसके बाद वह अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इस पर 23 दिसंबर 2019 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष वाद दायर किया। इस मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने प्रथमदृष्ट्या मामला संज्ञेय अपराध का पाया तथा थानाध्यक्ष को आदेश दिया कि वह समुचित धाराओं में
आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर एक प्रति 31 मई 2022 तक न्यायालय में दें। वरिष्ठ अधिवक्ता महावीर शर्मा ने बताया कि तत्कालीन लेखपाल व कानूनगो के सेवानिवृत्त होने तथा नायब तहसीलदार के किसी जनपद में तहसीलदार पद पर कार्यरत होने की जानकारी राजस्व विभाग से प्राप्त हुई है।
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अभियोजन के अनुसार ग्राम पुर्वा कड़ा, मौजा बराऊ थाना सहायल औरैया निवासी 70 वर्षीय गंगाराम ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया कि उसकी कुछ कृषि भूमि मौजा शहबाजपुर में है। उक्त खेत को उसके जीवित होते हुए भी तत्कालीन लेखपाल रामस्वरूप शाक्य, कानूनगो सुरेश सिंह यादव तथा नायब तहसीलदार
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बिधूना संजय कुशवाहा ने 20 मार्च 2015 को विजय सिंह व योगेंद्र सिंह निवासी बराऊ के नाम सरकारी अभिलेखों में दर्ज कर दिया। बताया कि इस हेराफेरी की जानकारी तब हुई, जब वह खतौनी का इंतखाब लेने तहसील बिधूना गए। इंतखाब में उनका खेत दूसरे के नाम दर्ज मिला।
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इसके बाद वह अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इस पर 23 दिसंबर 2019 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष वाद दायर किया। इस मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने प्रथमदृष्ट्या मामला संज्ञेय अपराध का पाया तथा थानाध्यक्ष को आदेश दिया कि वह समुचित धाराओं में
आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर एक प्रति 31 मई 2022 तक न्यायालय में दें। वरिष्ठ अधिवक्ता महावीर शर्मा ने बताया कि तत्कालीन लेखपाल व कानूनगो के सेवानिवृत्त होने तथा नायब तहसीलदार के किसी जनपद में तहसीलदार पद पर कार्यरत होने की जानकारी राजस्व विभाग से प्राप्त हुई है।