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Auraiya News: किस्तों में मिल रही 130 गांवों को बिजली, दिन भर आंख मिचौली का खेल
Mon, 14 Sep 2026 12:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 14 Sep 2026 12:16 AM IST
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फोटो -5- रामदास शाक्य
एरवाकटरा। विद्युत उपकेंद्र से जुड़े करीब 130 गांवों और मजरों के ग्रामीण इन दिनों बिजली की आंख-मिचौली से परेशान हैं। पिछले चार दिनों से तेज धूप के कारण उमस बढ़ी हुई है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे धरातल पर बेअसर नजर आ रहे हैं। क्षेत्र को बमुश्किल आधी बिजली मिल रही है और वह भी लगातार नहीं, बल्कि किस्तों में।
उपकेंद्र के उमरैन, एरवाकटरा, दोबामाफी, समायन और गाजीपुर फीडरों से जुड़े गांवों में सुबह से रात तक बिजली कटौती का सिलसिला जारी है। ग्रामीणों के अनुसार करीब दो घंटे बिजली गुल रहने के बाद मुश्किल से आधे घंटे आपूर्ति मिलती है। इसके बाद फिर एक से डेढ़ घंटे की कटौती हो जाती है। यही सिलसिला पूरे दिन चलता रहता है। टुकड़ों में मिल रही बिजली से घरेलू कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं।
वहीं किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। एक घंटे की बिजली मिलने के बाद डेढ़ से दो घंटे की कटौती होने से किसान खेतों की सिंचाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं। पांच घंटे में पूरी होने वाली सिंचाई में करीब 15 घंटे तक लग रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब बिजली लगातार उपलब्ध ही नहीं हो रही तो 18 घंटे आपूर्ति के दावे का उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा।
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दो घंटे की कटौती के बाद मिलती आधे-पौन घंटे
बिजली का कोई समय तय नहीं है। दो घंटे की कटौती के बाद बमुश्किल आधा-पौन घंटा बिजली आती है। पांच घंटे की सिंचाई के लिए हमें 15-15 घंटे खेतों पर भूखे-प्यासे बैठकर इंतजार करना पड़ रहा है।
- रामदास शाक्य, किसान
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सरकारी दावे पूरी तरह से खोखले
18 घंटे बिजली देने के सरकारी दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। किस्तों में 10-12 घंटे मिल रही बिजली से ट्यूबवेल की मोटर बार-बार बंद होती है, इससे फसलों की सिंचाई समय पर नहीं हो पा रही है।
-मनोज श्रीवास्तव, किसान
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उपकेंद्र से रोस्टर के अनुसार बिजली की आपूर्ति की जा रही है। फॉल्ट व अन्य दिक्कतें कभी-कभार आती हैं। शेड्यूल के अनुसार बिजली मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-सतेंद्र कुमार, उपखंड अधिकारी बिधूना
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उपकेंद्र के उमरैन, एरवाकटरा, दोबामाफी, समायन और गाजीपुर फीडरों से जुड़े गांवों में सुबह से रात तक बिजली कटौती का सिलसिला जारी है। ग्रामीणों के अनुसार करीब दो घंटे बिजली गुल रहने के बाद मुश्किल से आधे घंटे आपूर्ति मिलती है। इसके बाद फिर एक से डेढ़ घंटे की कटौती हो जाती है। यही सिलसिला पूरे दिन चलता रहता है। टुकड़ों में मिल रही बिजली से घरेलू कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं।
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वहीं किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। एक घंटे की बिजली मिलने के बाद डेढ़ से दो घंटे की कटौती होने से किसान खेतों की सिंचाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं। पांच घंटे में पूरी होने वाली सिंचाई में करीब 15 घंटे तक लग रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब बिजली लगातार उपलब्ध ही नहीं हो रही तो 18 घंटे आपूर्ति के दावे का उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा।
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दो घंटे की कटौती के बाद मिलती आधे-पौन घंटे
बिजली का कोई समय तय नहीं है। दो घंटे की कटौती के बाद बमुश्किल आधा-पौन घंटा बिजली आती है। पांच घंटे की सिंचाई के लिए हमें 15-15 घंटे खेतों पर भूखे-प्यासे बैठकर इंतजार करना पड़ रहा है।
- रामदास शाक्य, किसान
सरकारी दावे पूरी तरह से खोखले
18 घंटे बिजली देने के सरकारी दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। किस्तों में 10-12 घंटे मिल रही बिजली से ट्यूबवेल की मोटर बार-बार बंद होती है, इससे फसलों की सिंचाई समय पर नहीं हो पा रही है।
-मनोज श्रीवास्तव, किसान
उपकेंद्र से रोस्टर के अनुसार बिजली की आपूर्ति की जा रही है। फॉल्ट व अन्य दिक्कतें कभी-कभार आती हैं। शेड्यूल के अनुसार बिजली मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-सतेंद्र कुमार, उपखंड अधिकारी बिधूना

फोटो -5- रामदास शाक्य