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रमजान : दूसरे जुमे पर इबादत में झुके सिर, कोरोना वायरस के खात्मे की दुआ की गई

Fri, 08 May 2020 11:15 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2020 11:15 PM IST
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ramjaan
औरैया। रमजान के दूसरे जुमे पर शुक्रवार को पर रोजेदारों ने अल्लाह की बारगाह में सिर झुकाए और हाथ उठाकर मगफिरत की दुआ मांगी। मस्जिदों में नमाज के दौरान गिनती के चार लोग मौजूद रहे। वहीं रोजेदारों ने घरों में नमाज अदा की। इस दौरान बच्चों से लेकर बड़ों तक ने कोरोना के खात्मे की दुआएं की। जुमे की नमाज के पहले खुत्बा भी हुआ।
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मौलाना कारी आरिफ रहमानी ने बताया कि इस्लाम में मगफिरत के लिए तक्वा (संयम) जरूरी होता है। रमजान के मुबारक माह के 11 वें रोजे से मगफिरत का अशरा शुरू हो जाता है, जो बीसवें रोजे तक रहता है। रमजान के इस दूसरे अशरे को इसलिए भी मगफिरत का अशरा कहा जाता है कि इसमें अल्लाह से खुद की मगफित के लिए दुआ की जाती है। उधर, रोजेदारों ने बताया कि इस बार लॉकडाउन से रमजान का पता ही नहीं चल रहा है। हर ओर सन्नाटा होने से कहीं भी रमजान की रौनक दिखी नहीं रही है।
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एकेएम इंटर कालेज के प्रबंधक फखरुल इस्लाम ने बताया कि रमजान गरीबों से हमदर्दी का महीना है। अल्लाह ने इस मुकद्दस माह में लोगों के दिलों में एक-दूसरे से मोहब्बत पैदा करने के लिए रोजों को फर्ज किया है। रोजा सब्र का नाम भी है। सब्र उन सभी चीजों से जिसे करने के लिए अल्लाह और उसके रसूल ने मना किया है। अल्लाह ने रोजा हमें बुराइयों से बचाने के लिए ढाल के तौर पर दिया है।
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रुहाई मोहल्ला निवासी फहीम खान ने बताया कि अल्लाह ने बंदों की राहे हक पर डटे रहने को रमजान पाक का महीना दिया है। रोजा हक और नेकी की राह पर चलने की सीख देता है। इस महीने में अल्लाह ने जन्नत के दरवाजे खोल दिए हैं, ताकि बंदों की नेकियों का हक उन्हें मिल सके। रमजान के रोजे इंसान को जिंदगी में आगे बढ़ने और सब्र करने की हिम्मत अदा करते है।

मदद करने में नफा नुकसान न सोचें
रुहाई मोहल्ला निवासी मुनव्वर सुल्तान ने बताया कि रमजान अल्लाह की रहमत का महीना है। इस पाक महीने का मकसद ही नेकी करना, दूसरे की मदद के साथ तमाम बुराईयों से बचकर रहना है। रोजेदार को नेकी की राह और गरीबों की मदद की चाह दिल में उतारनी होगी। तभी अल्लाह की रहमत हासिल हो सकती है। किसी की मदद करने में कभी नफा-नुकसान न सोचें।
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