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अस्पताल में गर्भवती की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
Updated Mon, 27 Jul 2015 11:30 PM IST
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जाई गई गर्भवती महिला की मौत हो गई। महिला फफूंद थाना क्षेत्र के दयाल नगर
मोहल्ले की थी। परिजनों ने डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगा पुलिस को
तहरीर दी है।
जानकारी के मुताबिक फफूंद थाना क्षेत्र के ग्राम दयालनगर निवासी विनोद कुमार की पत्नी मोनिका (26) को रविवार को प्रसव पीड़ा हुई तो आशा अन्न्पूर्णा उसको परिजनों के साथ औरैया के गोविंद पैथोलाजी सेंटर में ले आई। यहां चिकित्सकों ने मोनिका का उपचार शुरू कर दिया।
मोनिका की हालत बिगड़ने पर सोमवार को उसकी मौत हो गई। डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगा परिजन थाना फफूंद में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे। मामला औैरैया सदर का होने के कारण पुलिस ने उन्हें कोतवाली भेज दिया। कोतवाली पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जननी सुरक्षा योजना अंतर्गत केंद्र सरकार सुरक्षित प्रसव के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च रही है। आशाओं को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव कराने के सख्त निर्देश हैं। बावजूद इसके आशा प्राइवेट अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को भर्ती करा रही हैं।
मोनिका को आशा अन्नपूर्णा ने प्राइवेट अस्पताल में क्यों भर्ती कराया, इसकी जांच की जानी चाहिए। अन्नपूूर्णा से स्वास्थ्य विभाग को गहन पूछताछ करनी चाहिए।
सूत्रों की माने तो प्राइवेट अस्पताल में गर्भवती को भर्ती कराने पर आशा को दो से तीन हजार रुपये नगद ईनाम के तौर पर दिए जाते हैं।
जानकारी के मुताबिक फफूंद थाना क्षेत्र के ग्राम दयालनगर निवासी विनोद कुमार की पत्नी मोनिका (26) को रविवार को प्रसव पीड़ा हुई तो आशा अन्न्पूर्णा उसको परिजनों के साथ औरैया के गोविंद पैथोलाजी सेंटर में ले आई। यहां चिकित्सकों ने मोनिका का उपचार शुरू कर दिया।
मोनिका की हालत बिगड़ने पर सोमवार को उसकी मौत हो गई। डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगा परिजन थाना फफूंद में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे। मामला औैरैया सदर का होने के कारण पुलिस ने उन्हें कोतवाली भेज दिया। कोतवाली पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जननी सुरक्षा योजना अंतर्गत केंद्र सरकार सुरक्षित प्रसव के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च रही है। आशाओं को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव कराने के सख्त निर्देश हैं। बावजूद इसके आशा प्राइवेट अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को भर्ती करा रही हैं।
मोनिका को आशा अन्नपूर्णा ने प्राइवेट अस्पताल में क्यों भर्ती कराया, इसकी जांच की जानी चाहिए। अन्नपूूर्णा से स्वास्थ्य विभाग को गहन पूछताछ करनी चाहिए।
सूत्रों की माने तो प्राइवेट अस्पताल में गर्भवती को भर्ती कराने पर आशा को दो से तीन हजार रुपये नगद ईनाम के तौर पर दिए जाते हैं।