फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Auraiya News ›   pika plan not working due to lac of budget

पायका योजना का निकला दम, खेलो इंडिया भी बजट के अभाव में बेदम

Mon, 02 Aug 2021 11:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 02 Aug 2021 11:33 PM IST
विज्ञापन
pika plan not working due to lac of budget
बेला (औरैया)। ग्रामीण अंचलों के खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए संचालित खेलो इंडिया योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। हाल ये है कि खेल मैदान कूड़ाघर बन गए हैं। खिलाड़ियों के लिए न तो उपकरण हैं और न सुविधाएं। ऐसे में खेलो इंडिया अभियान पिछड़ गया है।
विज्ञापन

2008 में ग्राम पंचायत स्तर पर पायका (पंचायत युवा क्रीड़ा व खेल अभियान) योजना की शुरुआत हुई थी। योजना का मकसद था कि ग्रामीण क्षेत्र से खेल की प्रतिभाएं निखर कर सामने आएं। जैसे-जैसे सरकारें बदलती गईं योजनाओं ने रूप बदल लिया। वर्ष 2014 में पायका योजना को बदलकर राजीव गांधी खेल अभियान किया गया। भाजपा की सरकार आने पर 2017 में इसे खेलो इंडिया योजना नाम दिया गया। लेकिन ग्रामीण स्तर पर इनकी हकीकत नहीं परखी गई। देखरेख और बजट के अभाव में खेल मैदान ही विलुप्त होते गए।
विज्ञापन

सामान और उपकरण तक गायब
ग्राम पंचायत बेला की पूर्व प्रधान संतोष कुमारी चौहान ने कुँवर हनुमंत सिंह इंटर कालेज के मैदान में पायका केंद्र बनवाया था। जिसके बाद जिला प्रशासन ने युवाओं की प्रतिभा में निखार लाने के लिए खेलकूद आयोजित किए थे। समय के साथ-साथ आयोजन बंद होते चले गए। हाल ये है कि पिछले तीन वर्षों से कोई आयोजन नहीं हो सका है और यहां मौजूद सामान और उपकरण तक गायब हो गए। अब खेल के मैदान में लोगों ने कूड़ा डालना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

देखरेख का अभाव और बजट नहीं
ग्राम पंचायत हरदू के उच्च माध्यमिक विद्यालय के पास खाली पड़े मैदान में ग्राम प्रधान जागेश्वरी देवी ने पायका केंद्र का शुभारंभ किया था। जिसके बाद एक वर्ष तक तो युवाओं ने खेलकूद के कार्यक्रमों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। बजट न आने पर योजना दम तोड़ती चली गई। अब मैदान पर खेलकूद के लिए उकरण तो हैं लेकिन देखरेख न होने से मैदान में घास उग आई है।

विभाग ही हो गया अनजान
पायका योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत को एक-एक लाख रुपये का बजट दिया गया। इससे खेल के लिए मैदान का समतलीकरण करा कर खेलकूद के लिए उपकरण मुहैया कराए गए। पूरी योजना के संचालन की जिम्मेदारी जिला युवा कल्याण विभाग की थी। धीरे धीरे विभाग भी योजना से अनजान हो गया। योजना पूरी तरह से बेदम हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed