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औरैयाः बिलराया-पनवाड़ी मार्ग पर सात बार हो चुका पैचवर्क, स्थिति जस की तस
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फोटो 24 एयूआरपी -03 - बिना गार्ड के संचालित यूनियन बैंक का एटीएम। संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। जालौन चौराहे से यमुना नदी पुल तक बिलराया-पनवाड़ी मार्ग पर एक साल में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने सात बार पैचवर्क कराया। इसके बावजूद इसकी स्थिति जस की तस है। इस मार्ग पर प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन रहता है। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी लोगों को गड्ढों से निजात नहीं मिली है।
शहर से शेरगढ़ घाट स्थित यमुना नदी तक कुल पांच किलोमीटर का हिस्सा गड्ढों से पटा पड़ा है। अहम बात यह है कि इस हिस्से पर पीडब्ल्यूडी की ओर से सात बार में गड्ढामुक्त योजना के तहत काम कराया गया। काम की गुणवत्ता का अंदाजा मार्ग की हालत को देखकर लगाया जा सकता है। यहां छोटे-बड़े वाहनों के गुजरने के दौरान उनके पलटने की हर समय आशंका बनी रहती है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक साल में इस मार्ग पर सात बार कराए गए काम में गड्ढों को भरने के नाम पर लगभग 40 लाख रुपये का बजट खर्च किया जा चुका है।
पीडब्ल्यूडी के जेई कृष्ण कुमार सिंह का कहना है कि यह सड़क लगभग 15 साल पहले बनी थी। तब इस सड़क पर वाहनों का लोड वर्तमान जैसा नहीं था। छह माह पहले सर्वे किया गया था। इसमें पूर्व की तुलना में लगभग दो गुना अधिक वाहनों का लोड पाया गया था। ऐसे में मार्ग का क्षतिग्रस्त होना संभव है। वाहनों के लोड के अनुसार सड़क का निर्माण कराया जाता है, जिससे यह जल्दी खराब न हों।
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पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता अभिषेक यादव ने कहा कि जब यह सड़क बनी थी तब वाहनों के गुजरने की संख्या कुछ और थी। अब इस सड़क का नए सिरे से निर्माण कराया जाना है। इसके लिए पिछले दिनों चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंता ने मार्ग का निरीक्षण किया था। जल्द ही इस मार्ग को फोरलेन करने का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। इसलिए तब तक गिट्टी और मसाले का पैचवर्क कर काम चलाना मजबूरी है। इस सड़क पर गड्ढों को एक-दो दिन में भरा दिया जाएगा। जल्द ही इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
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शहर से शेरगढ़ घाट स्थित यमुना नदी तक कुल पांच किलोमीटर का हिस्सा गड्ढों से पटा पड़ा है। अहम बात यह है कि इस हिस्से पर पीडब्ल्यूडी की ओर से सात बार में गड्ढामुक्त योजना के तहत काम कराया गया। काम की गुणवत्ता का अंदाजा मार्ग की हालत को देखकर लगाया जा सकता है। यहां छोटे-बड़े वाहनों के गुजरने के दौरान उनके पलटने की हर समय आशंका बनी रहती है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक साल में इस मार्ग पर सात बार कराए गए काम में गड्ढों को भरने के नाम पर लगभग 40 लाख रुपये का बजट खर्च किया जा चुका है।
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पीडब्ल्यूडी के जेई कृष्ण कुमार सिंह का कहना है कि यह सड़क लगभग 15 साल पहले बनी थी। तब इस सड़क पर वाहनों का लोड वर्तमान जैसा नहीं था। छह माह पहले सर्वे किया गया था। इसमें पूर्व की तुलना में लगभग दो गुना अधिक वाहनों का लोड पाया गया था। ऐसे में मार्ग का क्षतिग्रस्त होना संभव है। वाहनों के लोड के अनुसार सड़क का निर्माण कराया जाता है, जिससे यह जल्दी खराब न हों।
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पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता अभिषेक यादव ने कहा कि जब यह सड़क बनी थी तब वाहनों के गुजरने की संख्या कुछ और थी। अब इस सड़क का नए सिरे से निर्माण कराया जाना है। इसके लिए पिछले दिनों चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंता ने मार्ग का निरीक्षण किया था। जल्द ही इस मार्ग को फोरलेन करने का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। इसलिए तब तक गिट्टी और मसाले का पैचवर्क कर काम चलाना मजबूरी है। इस सड़क पर गड्ढों को एक-दो दिन में भरा दिया जाएगा। जल्द ही इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा जाएगा।

जालौन रोड पर बने गड्ढ़े से बचकर निकलते कार चालक। संवाद- फोटो : AURAIYA

यमुना नदी पुल से ठीक पहले बने गड्ढे में भरा पानी। संवाद- फोटो : AURAIYA