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अधूरे पड़े पंचायत सचिवालय, सचिवों को नोटिस 16-31-43
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विमटामऊ में अधूरा पड़ा पंचायत भवन। संवाद
- फोटो : AURAIYA
बिधूना। ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी ग्राम सचिवालय अधूरे पड़े हैं। इससे शासन की मंशा पूरी होती नजर नहीं आ रही है। ग्रामीण आज भी सरकारी कार्यों के लिए ब्लाक व जिले के चक्कर लगा रहे हैं। शिकायतों पर सीडीओ ने 155 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नोटिस जारी कर जल्द निर्माण कार्य पूरा करा संचालन के निर्देश दिए हैं।
जिले की 477 ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिवालयों का निर्माण कराया जाना है। इनमें से कुछ जगहों पर पहले से पंचायत भवन बने थे तो कुछ जगहों पर नया निर्माण कार्य कराया गया है। 14 ग्राम पंचायतों में जगह न होने पर निर्माण नहीं हो सका है। बिधूना, अछल्दा, औरैया, एरवाकटरा, अजीतमल, सहार ब्लाक की कई ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। शासन से सख्त निर्देश के बाद भी पंचायत सचिवालयों का संचालन नहीं हो पा रहा है। जबकि 419 सचिवालयों में पंचायत सहायक भी नियुक्त कर दिए गए हैं।
सचिवालयों का संचालन न होने पर आज भी लोग तहसील, ब्लाक के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों में सचिवालय अधूरे पड़े हैं, उन्हें जल्द पूरा कराने को लेकर ग्राम पंचायत अधिकारियों को नोटिस जारी की गई है। निर्देश के बाद भी कार्य में लापरवाही करने पर कार्रवाई की जाएगी।
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सीन-1-ग्राम पंचायत विमटामऊ में नौगंवा गांव के पास वर्ष 2019 में सचिवालय के निर्माण के लिए लगभग 18 लाख रुपये दिए गए थे। बजट आवंटित होने के बाद निर्माण कार्य तो शुरू हुआ, पर आज तक पूरा नहीं हो सका। ग्राम प्रधान हाकिम सिंह भदौरिया ने बताया कि पंचायत भवन का निर्माण पूर्व प्रधान के कार्यकाल में शुरू हुआ था। पंचायत भवन निर्माण कार्य के खाते में करीब चार लाख रुपये बचे हैं। इतने में निर्माण हो पाना संभव नहीं है। इस संबंध में बीडीओ व उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
सीन-2- वसई गांव के बाहर 12 लाख रुपये की लागत से सचिवालय का निर्माण कराया जा रहा है। कार्य शुरू हुए दो साल बीत गए न तो सचिवालय के भवन की छत डाली गई और न ही प्लास्टर हुआ। ग्राम प्रधान राजवीर ने बताया कि पंचायत का खाता बंद होने की वजह से निर्माण कार्य बीच में बंद हो गया था। खाता चालू हो गया है। जल्द ही सचिवालय का निर्माण पूरा कर कार्य शुरू किया जाएगा।
सीन-3-बेला ग्राम पंचायत में 19 लाख 80 हजार रुपये की लागत से सचिवालय का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य दो साल पहले शुरू तो हो गया लेकिन दो साल बाद भी बनकर तैयार नहीं हो सका। जिससे ग्रामीणों को 15 किलोमीटर चलकर बिधूना ब्लाक व तहसील में अपना काम करवाना पड़ रहा है। पंचायत सचिव राघवेंद्र ने बताया कि मनरेगा से पैसा नहीं आया, इस वजह से निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका।
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जिले की 477 ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिवालयों का निर्माण कराया जाना है। इनमें से कुछ जगहों पर पहले से पंचायत भवन बने थे तो कुछ जगहों पर नया निर्माण कार्य कराया गया है। 14 ग्राम पंचायतों में जगह न होने पर निर्माण नहीं हो सका है। बिधूना, अछल्दा, औरैया, एरवाकटरा, अजीतमल, सहार ब्लाक की कई ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। शासन से सख्त निर्देश के बाद भी पंचायत सचिवालयों का संचालन नहीं हो पा रहा है। जबकि 419 सचिवालयों में पंचायत सहायक भी नियुक्त कर दिए गए हैं।
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सचिवालयों का संचालन न होने पर आज भी लोग तहसील, ब्लाक के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों में सचिवालय अधूरे पड़े हैं, उन्हें जल्द पूरा कराने को लेकर ग्राम पंचायत अधिकारियों को नोटिस जारी की गई है। निर्देश के बाद भी कार्य में लापरवाही करने पर कार्रवाई की जाएगी।
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सीन-1-ग्राम पंचायत विमटामऊ में नौगंवा गांव के पास वर्ष 2019 में सचिवालय के निर्माण के लिए लगभग 18 लाख रुपये दिए गए थे। बजट आवंटित होने के बाद निर्माण कार्य तो शुरू हुआ, पर आज तक पूरा नहीं हो सका। ग्राम प्रधान हाकिम सिंह भदौरिया ने बताया कि पंचायत भवन का निर्माण पूर्व प्रधान के कार्यकाल में शुरू हुआ था। पंचायत भवन निर्माण कार्य के खाते में करीब चार लाख रुपये बचे हैं। इतने में निर्माण हो पाना संभव नहीं है। इस संबंध में बीडीओ व उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
सीन-2- वसई गांव के बाहर 12 लाख रुपये की लागत से सचिवालय का निर्माण कराया जा रहा है। कार्य शुरू हुए दो साल बीत गए न तो सचिवालय के भवन की छत डाली गई और न ही प्लास्टर हुआ। ग्राम प्रधान राजवीर ने बताया कि पंचायत का खाता बंद होने की वजह से निर्माण कार्य बीच में बंद हो गया था। खाता चालू हो गया है। जल्द ही सचिवालय का निर्माण पूरा कर कार्य शुरू किया जाएगा।
सीन-3-बेला ग्राम पंचायत में 19 लाख 80 हजार रुपये की लागत से सचिवालय का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य दो साल पहले शुरू तो हो गया लेकिन दो साल बाद भी बनकर तैयार नहीं हो सका। जिससे ग्रामीणों को 15 किलोमीटर चलकर बिधूना ब्लाक व तहसील में अपना काम करवाना पड़ रहा है। पंचायत सचिव राघवेंद्र ने बताया कि मनरेगा से पैसा नहीं आया, इस वजह से निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका।

वसई गांव ने बाहर अधूरा पड़ा पंचायत भवन। संवाद- फोटो : AURAIYA

ग्राम पंचायत बेला में निर्माण कार्य पूरा होने की राह देखता सचिवालय। संवाद- फोटो : AURAIYA

अधूरा पड़ा चिरौली ग्राम पंचायत का सचिवालय। संवाद- फोटो : AURAIYA