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स्वच्छता की अलख जगा रही हैं सुमन
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Wed, 14 Feb 2018 11:33 PM IST
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बाहर शौच जाती महिलाओं को समझाती सुमन
- फोटो : amarujala
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औरैया। सुमन देवी की कहानी टायलेट एक प्रेमकथा की नायिका से कम नहीं है। इटावा की रहने वाली सुमन ब्याहकर औरैया पहुंची तो यहां सबसे बड़ी कमी शौचालय की लगी। पति से पहला वचन शौचालय का लिया। उसकी जिद पर पति ने शौचालय बनवा दिया। इससे हौंसला बढ़ा। अब गांव के लोगों के साथ शौचालय के प्रति लोगों को जागरुक कर रही हैं। अब तक 60 गांवों में वह स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय बनवा चुकी है। इसके लिए उन्हें दिल्ली व लखनऊ में सम्मानित भी किया गया है।
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इटावा शहर के निवासी इनकम टैक्स अफसर आरबी तिवारी की बेटी सुमन चतुर्वेदी समाज शास्त्र में एमए हैं। इनका विवाह वर्ष 2000 में औरैया जिले के अछल्दा ब्लाक के गांव औतों निवासी अशोक कुमार के साथ हुई। अशोक भोपाल में एक कंपनी में कार्यरत थे। वह ससुराल आई तो यहां शौचालय नहीं था। सुहागरात में पति ने उनकी फरमाइश पूछा। इस पर सुमन ने शौचालय बनवाने का वचन लिया। पति ने अगले दिन ही शौचालय बनवाना शुरू कर दिया। इससे सुमन का हौंसला बढ़ा।
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उन्होंने पूरे गांव में शौचालय बनवाने के लिए लोगों को प्रेरित करना शुरू किया। पास पड़ोस की महिलाओं से बात की। महिलाएं उनकी बात मान ली और अपने पतियों से शौचालय बनवाने का वचन लेने लगीं। बस, यहीं से यह कारवां आगे बढ़ा। यह बात प्रशासन को पता चला तो उसने सुमन की नजीर दूसरे गांवों में देनी शुरू की। इससे भी उनका हौंसला बढ़ा। अब वह कुछ महिलाओं व बच्चों की टोली लेकेर गांव-गांव जाकर लोगों को जागरुक कर रही हैं।
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सुमन बताती है कि ससुराल में शौच के लिए खेत में जाना दुल्हन के लिए सबसे शर्मिंदगी भरा होता है। मायके में शुरू से ही शौचालय प्रयोग करती रहीं। शौचालय आई तो यह कष्ट भोगा। इसी वजह से ससुराल में पहला काम शौचालय बनवाया। वह बताती है कि तीन अगस्त 2016 में पहली बार ओडीएफ मिशन से जुड़ीं। उनके परिवार में सास, ससुर, पति, देवर, देवरानी व उनकी दो बेटियां हैं। पहले सबने मना किया मगर बाद में सब उनके साथ हो लिए।
दीवार में लिख देती थी खुले में शौच जाने वालोें के नाम
जब सुमन इस अभियान से जुड़ी तो लोग हंसते थे और सुमन का साथ देने वाला कोई नहीं था। इस पर सुमन सुबह उठती और देखती कौन खुले में शौच जा रहा है। इसके बाद वह उनके नाम दीवार पर लिख देती। शुरू में झगड़े भी हुए और फिर लोग शर्म के कारण शौचालय बनवाने को तैयार होने लगे। इसके बाद युवाओं की टोली सुमन के साथ हो चली।
दिल्ली व लखनऊ में होगी चुकी हैं सम्मानित
औरैया। वह जिले की 60 पंचायतों में जागरुकता अभियान चला चुकी है। दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में यूपी की 12 महिलाओं को सम्मानित किया गया गया था, जिसमें औरैया जिले से सुमन का नाम था। इसी तरह लखनऊ में स्वच्छता मिशन में महत्वपूरर्ण भूमिका निभाने के लिए भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।
चुनौती स्वीकार है मुझे
स्वच्छताग्रही सुमन चतुर्वेदी का कहना है कि ग्रामीण स्वच्छता मिशन से जुड़ने के बाद उनमें नई ऊर्जा का संचार हुआ। परिवार के साथ-साथ डीपीआरओ कार्यालय के लोगों का भरपूर सहयोग है। मार्च 2018 तक जिले को शौच मुक्त बनाना उनका लक्ष्य है।
सास ससुर व पति को सुमन पर नाज
सुमन के इस अभियान में उनके पति विजय कुमार, देवर व देवरानी भी जुड़ गए और विभाग के अभियान में स्वच्छता ग्रही हैं। पति विजय कुमार कहते है कि वह अपनी पत्नी के साथ है। वहीं ससुर कमलेश चतुर्वेदी व सास उमा का कहना है कि उन्हें अपनी बहू पर गर्व पर है।