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खुले में शौच से अभी नहीं मिली मुक्ति
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औरैया। जिले को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) किए हुए एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। मगर धरातल में इस दावेदारी की हकीकत कुछ और ही है। जिले की 477 ग्राम पंचायतों में अधिकांश में शौचालय अधूरे पड़े हैं। वहीं जो शौचालय पूरे होने के दावे किए जा रहे हैं, वह भी प्रयोग करने लायक नहीं है। ब्लॉक सहार की ग्राम पंचायत खुते मदारी के बाशिंदे भी ऐसी समस्या से जूझ रहे हैं। मजबूरन ग्रामीण खुले में शौच करने को विवश हो रहे हैं।
जिले में स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लगता दिख रहा है। स्वच्छ ग्राम पंचायत खुते मदारी में 38 लाख 16 हजार की लागत से 318 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। अधिकांश शौचालयों का निर्माण ठेकेदारी प्रथा से कराया गया है। जिससे इन शौचालयों की गुणवत्ता खराब है। कई शौचालय ऐसे हैं, जिनका निर्माण आधा-अधूरा कराकर छोड़ दिया गया है। किसी शौचालय में गेट नहीं तो किसी में छत नहीं है। ऐसे में यह शौचालय सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। गरीब परिवारों के शौचालय निर्माण के लिए दी गई धनराशि खर्च हो चुकी है, लेकिन अभी तक बहुतायत शौचालय अधूरे पड़े हैं।
किसी का गड्ढा बना है तो किसी की सीट नहीं बैठाई गई है। जिससे हालत यह है कि 25 से 30 फीसदी तक शौचालय उपयोग करने लायक नहीं है। मजबूरन ग्रामीण खुले में शौच करने को विवश हो रहे हैं। जिससे शासन की मंशा पर फिलहाल पानी फिरता नजर आ रहा है।। छूटे 70 शौचालयों का निर्माण ग्राम पंचायत में कराया जा रहा है, इसमें भी इनका निर्माण ठेकेदारी प्रथा से हो रहा है।
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शौचालयों के निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितता की शिकायतें मिल रही हैं, इसके लिए ग्राम पंचायतवार रजिस्टर तैयार कराने के निर्देश दिए गए हैं, जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ग्राम पंचायत खुते मदारी में एडीओ पंचायत को मौके पर भेजकर जांच करवाई जाएगी।
-राजेश चौरसिया, डीपीआरओ
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जिले में स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लगता दिख रहा है। स्वच्छ ग्राम पंचायत खुते मदारी में 38 लाख 16 हजार की लागत से 318 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। अधिकांश शौचालयों का निर्माण ठेकेदारी प्रथा से कराया गया है। जिससे इन शौचालयों की गुणवत्ता खराब है। कई शौचालय ऐसे हैं, जिनका निर्माण आधा-अधूरा कराकर छोड़ दिया गया है। किसी शौचालय में गेट नहीं तो किसी में छत नहीं है। ऐसे में यह शौचालय सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। गरीब परिवारों के शौचालय निर्माण के लिए दी गई धनराशि खर्च हो चुकी है, लेकिन अभी तक बहुतायत शौचालय अधूरे पड़े हैं।
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किसी का गड्ढा बना है तो किसी की सीट नहीं बैठाई गई है। जिससे हालत यह है कि 25 से 30 फीसदी तक शौचालय उपयोग करने लायक नहीं है। मजबूरन ग्रामीण खुले में शौच करने को विवश हो रहे हैं। जिससे शासन की मंशा पर फिलहाल पानी फिरता नजर आ रहा है।। छूटे 70 शौचालयों का निर्माण ग्राम पंचायत में कराया जा रहा है, इसमें भी इनका निर्माण ठेकेदारी प्रथा से हो रहा है।
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शौचालयों के निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितता की शिकायतें मिल रही हैं, इसके लिए ग्राम पंचायतवार रजिस्टर तैयार कराने के निर्देश दिए गए हैं, जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ग्राम पंचायत खुते मदारी में एडीओ पंचायत को मौके पर भेजकर जांच करवाई जाएगी।
-राजेश चौरसिया, डीपीआरओ