रामायण से अच्छा कोई ग्रंथ नहीं-रामभद्राचार्य जी महाराज
ग्राम मुडै़ना रामदत्त में चल रहीं श्रीराम कथा को सुनाते हुए आचार्य रामभद्राचार्य जी महाराज ने कहा कि रामायण जैसा कोई ग्रंथ अन्य धर्मो में नहीं है। गोस्वामी तुलसीदास जैसी चौपाई किसी शेर, शायरी व गजलों में नहीं है। तो फिर क्यों रस रामायण छोड़कर अन्य धर्मो में भटककर नर्क की ओर जा रहे हैं।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि हम सभी को अपने भारत देश की संस्कृति कभी नहीं भूलनी चाहिए। विदेशों में लोग भारत देश की संस्कृति को अपना रहे हैं। वहीं भारतवासी स्वयं देश की संस्कृति को भुला रहे हैं।
भारतवासियों, हिंदुत्व प्रेमियों, श्रीराम व रामायण में आस्था रखने वाले प्रत्येक श्रद्धालुओं सहित देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में जोश भरते हुए उन्होंने कहा कि ये कौम जो आतंकवाद की ज्वाला में भारत को जला रही है। वह भारत का भला कभी नहीं कर सकती है।
वहीं उन्हाेंने महिलाओं को सीख देते हुए बताया कि सास-बहुआें का प्रेम हो तो सीता व कौशल्या जैसा। बताया कि एक ओर जहां सीता की मां सुनयना ने सीता जी को गिरजा पूजन के लिए पैदल भेज दिया था। वहीं सास कौशल्या ने बारह वर्षो तक सीता को पैदल नहीं चलने दिया और बहू की खुशामद बेटी की तरह की।