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Auraiya News: 14 लाख आबादी पर आईसीयू सुविधा नहीं, वेंटिलेटर बेकार पड़े
Thu, 10 Sep 2026 12:20 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:20 AM IST
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वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद
औरैया। जिले में 14 लाख से अधिक आबादी होने के बावजूद एक भी सरकारी अस्पताल में आईसीयू सुविधा उपलब्ध नहीं है। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए सैफई या कानपुर भेजा जा रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान मिले 30 से ज्यादा वेंटिलेटर कर्मचारियों के अभाव में बेकार पड़े हैं। यह स्थिति जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठाती है।
जिले में कुल 32 से अधिक सरकारी अस्पताल हैं। इनमें से किसी में भी वेंटिलेटर चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं हैं। 100 शैया जिला अस्पताल चिचौली को 21 वेंटिलेटर मिले थे। यह अस्पताल अब मेडिकल कॉलेज में बदल चुका है। यहां 21 वेंटिलेटर अभी भी संचालन योग्य हैं। परंतु कर्मचारियों की कमी से इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
शासन ने वेंटिलेटर तो दिए, पर उन्हें चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी और इकाई नहीं बनाई। वेंटिलेटर आधारित आईसीयू की जरूरत वाले मरीज बाहर स्थानांतरित किए जा रहे हैं। शहर के 50 शैया जिला अस्पताल में भी यह सुविधा नहीं है। प्रदेश में स्वाइनफ्लू के मामले बढ़ने के बावजूद यह अनदेखी जारी है।
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इन मरीजों को वेंटिलेटर की आवश्यकता
विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार, जिन मरीजों का ऑक्सीजन स्तर 60 के नीचे चला जाता है, उन्हें वेंटिलेटर पर लेना चाहिए। सांप काटने पर सांस लेने में दिक्कत होने पर भी इसकी जरूरत पड़ती है। सांस के मरीज और सिर में गंभीर चोट वाले रोगी भी वेंटिलेटर पर रखे जाते हैं। दिल के रोगियों को भी इसकी आवश्यकता हो सकती है। आपातकालीन वार्ड में मरीज की हालत बिगड़ने पर यह अंतिम विकल्प होता है। यह मरते हुए मरीज की जान बचाने में काफी कारगर है।
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वेंटिलेटर टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ का अभाव
मेडिकल कॉलेज में 420 बेड की स्वास्थ्य सेवाएं केवल 14 नर्सिंग कर्मचारियों द्वारा दी जा रही हैं। एक वेंटिलेटर के लिए एक नर्सिंग कर्मचारी और एक वेंटिलेटर तकनीशियन की जरूरत होती है। चार साल बाद भी यह कमी पूरी नहीं हो सकी है। कोविड के समय पीएचसी और सीएचसी के कर्मचारियों को आईसीयू संचालन में लगाया गया था। प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ. मुकेश वीर सिंह ने बताया कि जरूरी कर्मचारियों की मांग शासन को भेजी गई है। कर्मचारियों की कमी पूरी होने के बाद वेंटिलेटर सुविधा शुरू हो जाएगी।
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रोजाना 20 से ज्यादा गंभीर मरीज हो रहे रेफर
शहर के 50 शैया जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सीएचसी स्तर पर रोजाना 20 से ज्यादा गंभीर मरीज आते हैं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सैफई या कानपुर स्थानांतरित कर दिया जाता है। पर्याप्त संसाधनों के बावजूद कर्मचारियों की कमी स्वास्थ्य सेवाओं को काफी हद तक प्रभावित कर रही है। जिले में 8 सीएचसी, 20 पीएचसी, एक 50 शैया जिला अस्पताल और एक 420 बेड का मेडिकल कॉलेज है। दो मातृ एवं शिशु अस्पताल भी दिबियापुर और बिधूना में हैं।
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जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक नजर-- -
जिले की आबादी- 14 लाख के पार
सीएचसी-अजीतमल, बिधूना, अछल्दा, सहार, बेला, एरवाकटरा, दिबियापुर, अयाना
पीएचसी- 20
जिला अस्पताल- शहर में 50 शैया जिला अस्पताल
मेडिकल कॉलेज- 420 बेड का अस्पताल चिचौली में
मातृ एवं शिशु अस्पताल- 2 (दिबियापुर व बिधूना)
वर्जन-- --
वेंटिलेटर के संचालन में स्टाफ की कमी रोड़ा बनी है। जरूरी स्टाफ की मांग समय-समय पर शासन में भेजी जा रही है। स्टाफ की कमी पूरी होने के बाद वेंटिलेटर की सुविधा शुरू हो जाएगी। हालांकि 20 बेड की इमरजेंसी में काफी हद तक बेहतर उपचार किया जा रहा है।
-डॉ. मुकेश वीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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जिले में कुल 32 से अधिक सरकारी अस्पताल हैं। इनमें से किसी में भी वेंटिलेटर चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं हैं। 100 शैया जिला अस्पताल चिचौली को 21 वेंटिलेटर मिले थे। यह अस्पताल अब मेडिकल कॉलेज में बदल चुका है। यहां 21 वेंटिलेटर अभी भी संचालन योग्य हैं। परंतु कर्मचारियों की कमी से इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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शासन ने वेंटिलेटर तो दिए, पर उन्हें चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी और इकाई नहीं बनाई। वेंटिलेटर आधारित आईसीयू की जरूरत वाले मरीज बाहर स्थानांतरित किए जा रहे हैं। शहर के 50 शैया जिला अस्पताल में भी यह सुविधा नहीं है। प्रदेश में स्वाइनफ्लू के मामले बढ़ने के बावजूद यह अनदेखी जारी है।
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इन मरीजों को वेंटिलेटर की आवश्यकता
विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार, जिन मरीजों का ऑक्सीजन स्तर 60 के नीचे चला जाता है, उन्हें वेंटिलेटर पर लेना चाहिए। सांप काटने पर सांस लेने में दिक्कत होने पर भी इसकी जरूरत पड़ती है। सांस के मरीज और सिर में गंभीर चोट वाले रोगी भी वेंटिलेटर पर रखे जाते हैं। दिल के रोगियों को भी इसकी आवश्यकता हो सकती है। आपातकालीन वार्ड में मरीज की हालत बिगड़ने पर यह अंतिम विकल्प होता है। यह मरते हुए मरीज की जान बचाने में काफी कारगर है।
वेंटिलेटर टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ का अभाव
मेडिकल कॉलेज में 420 बेड की स्वास्थ्य सेवाएं केवल 14 नर्सिंग कर्मचारियों द्वारा दी जा रही हैं। एक वेंटिलेटर के लिए एक नर्सिंग कर्मचारी और एक वेंटिलेटर तकनीशियन की जरूरत होती है। चार साल बाद भी यह कमी पूरी नहीं हो सकी है। कोविड के समय पीएचसी और सीएचसी के कर्मचारियों को आईसीयू संचालन में लगाया गया था। प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ. मुकेश वीर सिंह ने बताया कि जरूरी कर्मचारियों की मांग शासन को भेजी गई है। कर्मचारियों की कमी पूरी होने के बाद वेंटिलेटर सुविधा शुरू हो जाएगी।
रोजाना 20 से ज्यादा गंभीर मरीज हो रहे रेफर
शहर के 50 शैया जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सीएचसी स्तर पर रोजाना 20 से ज्यादा गंभीर मरीज आते हैं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सैफई या कानपुर स्थानांतरित कर दिया जाता है। पर्याप्त संसाधनों के बावजूद कर्मचारियों की कमी स्वास्थ्य सेवाओं को काफी हद तक प्रभावित कर रही है। जिले में 8 सीएचसी, 20 पीएचसी, एक 50 शैया जिला अस्पताल और एक 420 बेड का मेडिकल कॉलेज है। दो मातृ एवं शिशु अस्पताल भी दिबियापुर और बिधूना में हैं।
जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक नजर
जिले की आबादी- 14 लाख के पार
सीएचसी-अजीतमल, बिधूना, अछल्दा, सहार, बेला, एरवाकटरा, दिबियापुर, अयाना
पीएचसी- 20
जिला अस्पताल- शहर में 50 शैया जिला अस्पताल
मेडिकल कॉलेज- 420 बेड का अस्पताल चिचौली में
मातृ एवं शिशु अस्पताल- 2 (दिबियापुर व बिधूना)
वर्जन
वेंटिलेटर के संचालन में स्टाफ की कमी रोड़ा बनी है। जरूरी स्टाफ की मांग समय-समय पर शासन में भेजी जा रही है। स्टाफ की कमी पूरी होने के बाद वेंटिलेटर की सुविधा शुरू हो जाएगी। हालांकि 20 बेड की इमरजेंसी में काफी हद तक बेहतर उपचार किया जा रहा है।
-डॉ. मुकेश वीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज