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सोलह संस्कारों में महत्वपूर्ण है नामकरण संस्कार
ब्यूरो अमर उजाला, औरैया
Updated Sun, 22 Nov 2015 12:11 AM IST
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आज के बदलते परिवेश में हाईटेक हो चुकी व्यवस्थाओं के चलते बड़े बुजुर्गों की बात अब लोगों के गले नहीं उतरती है। पहले बच्चों के नामकरण संस्कार बड़े बुजुर्ग ही किया करते थे, लेकिन अब हाईटेक युग में कंप्यूटर पर नाम खोजकर रख लिए जाते हैं। ऐसे में भारतीय संस्कृति का धीरे-धीरे हृास होता जा रहा है।
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ब्रह्मनगर मोहल्ले में चल रही श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ में पांचवे दिन की कथा सुनाते हुए आचार्य कालिकानंद जी ने श्रद्धालुओं को भगवान राम के नामकरण संस्कार की कथा का श्रवण कराया। बताया कि जिस घर में बड़े-बुजुर्गों का सम्मान नहीं होता, उस घर में लक्ष्मी का भी वास नहीं होता।
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कहा कि हाईटेक युग के दौर में हम सभी धीरे-धीरे संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। इसके चलते तमाम बुराइयां जन्म ले रही हैं। बड़ों का अदब भूलने का ही परिणाम है कि आज लोग शांति की खोज में दर-दर मारे फिरते हैं और उन्हें शांति नहीं मिलती। माता पिता के साथ किए गए कर्म उन्हें बुजुर्ग होने पर स्वयं के बच्चों से वापस मिलते हैं।
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स्वामी जी ने कहा कि बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय। अर्थात जो व्यक्ति अपने बुजुर्ग की सेवा सत्कार नहीं कर सकता, उसके बच्चे भी बुढ़ापे में उसका साथ नहीं देते। कथा के दौरान स्वामी कालिकानंद जी ने नामकरण संस्कार को सोलह संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण बताया।
कहा कि सनातन धर्म के अनुसार बच्चों का नामकरण संस्कार गुरु व बुजुर्ग ही करते हैं, लेकिन आज की संस्कृति में इस संस्कार को लोग कंप्यूटर के माध्यम से नाम खोजकर करने लगे हैं।
इस दौरान स्वामी जी ने भगवान राम के बचपन के साथ अल्पकाल की क्रिया कलापों पर प्रकाश डाला। बताया कि बाल्यकाल के बाद जब भगवान राम कुछ बड़े हुए तो गुरु वशिष्ठ के आश्रम में जाकर शिक्षा ग्रहण की। तभी क्षत्रिय धर्म का शिकार भी किया।
उन्होंने पावन मृग मारही जिम जानी...चौपाई सुनाते हुए कहा कि गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान भगवान राम ने ऐसे मृगों का शिकार किया, जिन्हें कस्तूरी कहा जाता है। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का मार्मिक वर्णन सुनाया। कथा मंडप में रसपान करने को श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है।
वहीं दूसरी ओर ओमनगर मोहल्ले में चल रहे रुद्राभिषेक कार्यक्रम में शुक्रवार देर रात राम दरबार की मनमोहक झांकी निकाली गई। कथा स्थल से शुरू हुई शोभायात्रा यमुना रोड, रोडवेज बस स्टैंड, ब्रह्मनगर होते हुए वापस कथा मंडप पर पहुंचकर समाप्त हो गई।
शोभायात्रा में बैंडबाजों की भक्तिमयी धुन पर श्रद्धालु थिरके। आयोजक आनंद तिवारी ने लोगों से रुद्राभिषेक कथा कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की है।