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मन, कर्म, वचन की पवित्रता से मिलता है सच्चा सुख

Fri, 19 Jun 2015 12:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया Updated Fri, 19 Jun 2015 12:48 AM IST
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Mind , karma , the sanctity of the Word meets the true happiness

कलियुग में श्रीमद भागवत कथा सुनने मात्र से प्राणी को मोक्ष प्राप्त हो जाता है। मन, वचन, कर्म की पवित्रता मनुष्य को ईश्वर के करीब ले जाती है। मनुष्य को सभी के कल्याण का सोचना चाहिए। यह बात कथा वाचिका साध्वी राजन देवी शास्त्री ने भक्तों के बीच कही।

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अजीतमल तहसील के ग्राम लालपुर में श्रीमद भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन सरस कथा वाचिका साध्वी राजन देवी शास्त्री ने भक्तों से कहा कि कलियुग में मनुष्य की व्यस्तता भौतिकता की ओर बढ़ती जा रही है।
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भौतिक सुख की प्राप्ति के लिए उसने अपने मन का सुख- चैन सभी कुछ खो दिया है, उसका मन अशांत हो गया है। ऐसे मन के कभी स्थाई शांति नहीं मिलती है। मनुष्य को इस व्यस्त जीवन में कुछ समय श्रीमद भागवत कथा सुनने में अवश्य लगाना चाहिए, जिससे मन को शांति मिल सके।
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कहते हैं कि सज्जनों की संगति मात्र में आने से बुरे गुण दूर भागने लगते हैं। अच्छे गुणों का मन, कर्म और वचन में समावेश होता है। शनै-शनै मनुष्य ईश्वर के करीब होता जाता है। गुरुवार को भागवत कथा के दौरान सैकड़ों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।

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