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रोजगार सेवकों की कमी से ठप मनरेगा

Tue, 10 May 2016 11:21 PM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
Auraiya, Uttar pradesh, India Updated Tue, 10 May 2016 11:21 PM IST
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MGNREGA stalled by the lack of employment servants
मनरेगा मजदूर - फोटो : Bureau
अजीतमल ब्लाक में रोजगार सेवकों की कमी से महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ठप पड़ी है। विकास खंड में रोजगार सेवकों के 22 पद खाली पड़े हैं। इससे ग्राम पंचायतों के लिए स्वीकृत विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। वहीं बिना रोजगार सेवकों के ग्राम प्रधान मेठ (ठेकेदारों के प्रतिनिधि) बनकर रह गए हैं।
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अजीतमल विकास खंड क्षेत्र में 68 ग्राम पंचायतें हैं। ग्राम पंचायतों के विकास में मनरेगा योजना का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। लेकिन ब्लाक क्षेत्र की 22 ग्राम पंचायतों में रोजगार सेवकों के पद खाली पड़े हैं। इनमें विरूहनी, चांदपुर ककरैया, बल्लापुर, भीखेपुर, शेखूपुर, जैनपुर, ऊंचा, भदसान, दरवटपुर, बाबरपुर देहात, रतनपुर गढिया, साफर, सेऊपुर, दहियापुर, मुड़ैना रूपसहाय, गंगदासपुर, मलगंवा, पचदेवरा, चकसत्तापुर, सतहड़ी, चन्दनापुर दयालसिंह, हाफिजपुर, जगनपुर ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
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इन ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत विभिन्न स्वीकृत परियोजनाओं पर काम भी कराया जा रहा है। लेकिन परियोजनाओं को तेजी से पूरा कराने में रोजगार सेवकों की कमी खल रही है। उनके न होने से योजना के तहत होने वाले काम थम से गए हैं। ग्राम पंचायतों में प्रधानों को रोजगार सेवकों के काम करने पड़ रहे हैं। रोजगार सेवक विहीन ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान जयनारायण तिवारी, मुकेश सिंह, प्रमोद कुमार, अरविंद राजपूत, प्रेम सिंह कहते हैं कि रोजगार सेवक न होने से हम लोगों को पंचायत में मनरेगा योजना संचालित करने में बहुत परेशानी हो रही है। रोजगार सेवकों की तैनाती न होने से हम प्रधान ठेकेदारों में मेठ बनकर रह गए हैं।
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यह हैं रोजगार सेवकों के काम
लेबर गणना, मास्टर रोल भरना, मौके पर काम का भौतिक सत्यापन करना, नापजोख करना।

रोजगार सेवकों के पद भरने के लिए शासन को पत्र लिख कर अवगत कराया गया है। शासन की अनुमति पर ही रिक्त पदों पर रोजगार सेवकों को नियुक्ति की जाएगी। फिलहाल, मनरेगा के काम प्रभावित न हों, इसके लिए ग्राम प्रधानों को मेठ के माध्यम से काम चलाए जाने की वैकल्पिक स्वीकृति है।
सतेन्द्र नाथ चौधरी, सीडीओ
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