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शर्तो से घाटे का सौदा, अनुबंध को नहीं मिल रही बसें

Sat, 08 Oct 2022 11:49 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 08 Oct 2022 11:49 PM IST
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Loss deal due to conditions, buses are not getting contract
औरैया। डग्गामारी बंद कराने के लिए परिवहन व रोडवेज विभाग ने निजी बसों को अनुबंध कर अलग-अलग रूटों पर चलाने पर पहल शुरू की है। मगर निजी बस संचालक विभागीय शर्तों में घाटे का सौदा महसूस कर अनुबंध के लिए तैयार नहीं है। जिससे विभाग की पहल पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
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यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने डग्गामारी पर शिकंजा कसा है। साथ ही परिवहन विभाग को निर्देश दे रखे हैं कि जिले में डग्गामारी करने वाले वाहनों को विभाग से अनुबंध कर अलग-अलग रूटों पर सुविधा के अनुसार संचालन कराया जाए। इसको लेकर एआरटीओ से बसों की उपलब्धता और यात्रियों की संख्या के अनुरूप रूट चिंहित कराए गए। जिन रूटों पर बसों का संचालन जरूरी था, इसकी रिपोर्ट बनाकर रोडवेज विभाग को दे दी गई। दोनों ही विभाग के अधिकारियों ने बस संचालकों के साथ बात करके उन्हें नियम व शर्तें बता कर बसों का अनुबंध कर चलाने पर जोर दिया।
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कुछ बस संचालकों का कहना है कि जिन शर्तों पर रोडवेज विभाग बसों का संचालन कराना चाहता है, उससे उनका खर्च निकल पाना भी मुश्किल है।
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इन रूटों पर अनुबंध के साथ चलनी है बसें
रूट- दूरी- सीट क्षमता लोड फैक्टर
औरैया- जहानाबाद- इटावा 173 किलो मीटर 52 65 प्रतिशत
औरैया- हरदोई, उरई, कन्नौज, औरैया 203 किलो मीटर 52 70 प्रतिशत
औरैया- दिबियापुर, बिधूना, छिबरामऊ, फर्रुखाबाद- 152 किलो मीटर 52 72 प्रतिशत
औरैया- बिधूना, किशनी, मैनपुरी, एटा- 172 किलो मीटर 52 75 प्रतिशत
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ये शर्तें बढ़ा रही परेशानी
रोडवेज में जिन बसों का अनुबंध किया जाना है उनमें कई नियम व शर्तें बस संचालकों को बताई गई हैं। जिसमें बस पांच वर्ष से पुरानी न हो। सरकारी मानक के अनुसार बस के बाडी बनी हो। फिटनेस, बीमा, रोड टैक्स आदि परिवहन कार्यालय से पूरा हो। प्रशिक्षित चालक होना अनिवार्य है। इसके अलावा तय रूट पर निर्धारित दूरी के चक्कर के हिसाब से परिवहन विभाग सात रुपये प्रति किलो मीटर की दर से अपना प्रशासनिक शुल्क लेगा। डीजल के स्वयं व डिपो से भी ले सकते हैं। रूट पर यदि कम सवारियां मिली तो बस संचालकों का नुकसान होगा।
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अनुबंध के लिए बस संचालकों के साथ बैठक हो चुकी है। नियमों में कुछ फेरबदल भी विभागीय स्तर पर होना है। बस संचालकों को सरकारी फायदे बताते हुए अनुबंध कराने के लिए आगे लाने पर जोर दिया जा रहा है। एआरटीओ स्तर पर भी पहल की जा रही है। आरएस चौधरी, एआरएम औरैया।
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