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दो दिन में जिले में आए 220 प्रवासी
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औरैया। लॉकडाउन के चलते अन्य प्रांतों में फंसे मजदूरों व अन्य लोगों के घर वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। बुधवार और गुरुवार दो दिन के अंदर बाहर से 220 लोग आए। इन सभी को जांच के बाद घर भेजा गया। साथ ही उन्हें 21 दिन के लिए होम क्वारंटीन रहने के सख्त निर्देश भी दिए गए। घर जाते समय सभी को राशन आदि भी दिया गया।
बुधवार और गुरुवार को बिधूना तहसील में 44, अजीतमल तहसील में 83 और सदर तहसील क्षेत्र में 93 लोग आए। इनको रोडवेज बस से संबंधित तहसीलों में बने शेल्टर होम में ले जाया गया। वहां थर्मल स्क्रीनिंग के बाद रोका गया। साथ ही 12 घंटे बाद सभी को दोबोरा थर्मल स्क्रीनिंग के बाद उन्हें घर भेजा गया है। इस दौरान उन्हें 21 दिनों के लिए होम क्वारंटीन रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्हें राशन और खाद्यान्न भी उपलब्ध कराया गया है।
उधर, तहसीलदार सदर राजकुमार चौधरी ने बताया कि पांडेय गेस्ट हाउस में मौजूद झारखंड निवासी मजदूरों को गुरुवार को रवाना किया गया। इससे एक दिन पहले बिहार के मजदूरों को रवाना किया जा चुका है। अब सिर्फ उनके यहां औरैया से संबंधित लोग ही आ रहे हैं।
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वहीं, ऐरवाकटरा क्षेत्र के गांव फैजुल्लापुर निवासी गोविंद ने बताया कि वह सूरत में नौकरी करता था। वहां से बस से यहां आया है। थर्मल स्क्रीनिंग में सब कुछ सही आया। उसे शीघ्र घर जाने का आश्वासन दिया गया है।
ऐरवाकटरा क्षेत्र के गांव रमपुरा निवासी राजेश कुमार ने बताया कि वह इंदौर में नौकरी करता था। लॉकडाउन के बाद फैक्ट्री में काम न होने पर घर में रहना पड़ रहा था। रुपयों की कमी आड़े आने लगी थी। वह शासन द्वारा चलाईं गई बसों से औरैया पहुंचा। यहां शीघ्र ही गांव भेजे जाने का आश्वासन दिया गया है।
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बुधवार और गुरुवार को बिधूना तहसील में 44, अजीतमल तहसील में 83 और सदर तहसील क्षेत्र में 93 लोग आए। इनको रोडवेज बस से संबंधित तहसीलों में बने शेल्टर होम में ले जाया गया। वहां थर्मल स्क्रीनिंग के बाद रोका गया। साथ ही 12 घंटे बाद सभी को दोबोरा थर्मल स्क्रीनिंग के बाद उन्हें घर भेजा गया है। इस दौरान उन्हें 21 दिनों के लिए होम क्वारंटीन रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्हें राशन और खाद्यान्न भी उपलब्ध कराया गया है।
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उधर, तहसीलदार सदर राजकुमार चौधरी ने बताया कि पांडेय गेस्ट हाउस में मौजूद झारखंड निवासी मजदूरों को गुरुवार को रवाना किया गया। इससे एक दिन पहले बिहार के मजदूरों को रवाना किया जा चुका है। अब सिर्फ उनके यहां औरैया से संबंधित लोग ही आ रहे हैं।
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वहीं, ऐरवाकटरा क्षेत्र के गांव फैजुल्लापुर निवासी गोविंद ने बताया कि वह सूरत में नौकरी करता था। वहां से बस से यहां आया है। थर्मल स्क्रीनिंग में सब कुछ सही आया। उसे शीघ्र घर जाने का आश्वासन दिया गया है।
ऐरवाकटरा क्षेत्र के गांव रमपुरा निवासी राजेश कुमार ने बताया कि वह इंदौर में नौकरी करता था। लॉकडाउन के बाद फैक्ट्री में काम न होने पर घर में रहना पड़ रहा था। रुपयों की कमी आड़े आने लगी थी। वह शासन द्वारा चलाईं गई बसों से औरैया पहुंचा। यहां शीघ्र ही गांव भेजे जाने का आश्वासन दिया गया है।