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Auraiya News: खानपुर की तरह ही जिले की तीन गोशालाएं संवारेगी समिति
Tue, 09 Jun 2026 11:57 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 09 Jun 2026 11:57 PM IST
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फोटो-02 - रजुआमऊ गोशाला का दृश्य। संवाद
औरैया। पशु चिकित्सा विभाग की ओर से गोशालाओं की बेहतरी को लेकर एक समिति के जरिए खानपुर गोशाला को बेहतर बनाया गया।
वहीं अब जिले की तीन वृहद गोशालाओं की जिम्मेदारी भी समिति को सौंप दी गई है। दो अन्य गोशालाओं को भी समिति के हैंडओवर करने की तैयारी बनाई गई है।
श्री गोमाता ग्रामोद्योग सेवा समिति के संचालक संतोष गुप्ता के तरफ से खानपुर गोशाला का संचालन पिछले एक साल से किया जा रहा है। समिति के द्वारा गोवंशों के गोबर से गोकाष्ठ, उपले, धूपबत्ती, दीये, मूर्ति व खाद से लेकर कई उत्पाद बनाए जाते हैं।
अब वृहद गोशालाएं रजुआमऊ, उमरी व मलगवां को इस समिति को सौंप दिया गया है। साथ ही सौंथरा व वैसोली गोशाला को भी इस समिति को सौंपने के लिए कागजी प्रक्रिया शुरू की गई है। इन गोशालाओं में गोबर गैस से लेकर अन्य इंतजामों का तानाबाना भी खड़ा किया जाएगा, गो संवर्धन के कार्य शुरू किए जाएंगे।
80 गोवंशों तक सीमित खानपुर गोशाला की बदली तस्वीर को देखकर जिला प्रशासन ने वृहद गोशालाओं पर नजर टिकाई है। तीनों वृहद गोशालाओं में 400 गोवंशों के संरक्षण की क्षमता है। उधर, ग्राम पंचायत की देखरेख में होने वाली अनदेखी की समस्या दूर हो जाएगी।
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51 गोशालाओं में संरक्षित 6170 गोवंश
जिले में 51 गोशालाओं के जरिए गो संवर्धन व संरक्षण की कवायद हो रही है। यहां पर 6170 गोवंश संरक्षित हैं। शहरी क्षेत्र में नौ और ग्रामीण क्षेत्र के दायरे में 42 गोशालाएं आ रही हैं। नगर क्षेत्र में निकायों के जिम्मेदारी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में अभी तक गोशालाओं को ग्राम पंचायत स्तर पर देखा जा रहा था।
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खानपुर की तरह जिले की तीन वृहद गोशालाओं का संचालन समिति के जरिए कराया जाएगा। समिति को तीनों गोशालाओं के देखरेख की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। वहीं, दो अन्य गोशालाएं भी इस कड़ी दी जाएंगी।
-डॉ. विशन सिंह विकल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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वहीं अब जिले की तीन वृहद गोशालाओं की जिम्मेदारी भी समिति को सौंप दी गई है। दो अन्य गोशालाओं को भी समिति के हैंडओवर करने की तैयारी बनाई गई है।
श्री गोमाता ग्रामोद्योग सेवा समिति के संचालक संतोष गुप्ता के तरफ से खानपुर गोशाला का संचालन पिछले एक साल से किया जा रहा है। समिति के द्वारा गोवंशों के गोबर से गोकाष्ठ, उपले, धूपबत्ती, दीये, मूर्ति व खाद से लेकर कई उत्पाद बनाए जाते हैं।
अब वृहद गोशालाएं रजुआमऊ, उमरी व मलगवां को इस समिति को सौंप दिया गया है। साथ ही सौंथरा व वैसोली गोशाला को भी इस समिति को सौंपने के लिए कागजी प्रक्रिया शुरू की गई है। इन गोशालाओं में गोबर गैस से लेकर अन्य इंतजामों का तानाबाना भी खड़ा किया जाएगा, गो संवर्धन के कार्य शुरू किए जाएंगे।
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80 गोवंशों तक सीमित खानपुर गोशाला की बदली तस्वीर को देखकर जिला प्रशासन ने वृहद गोशालाओं पर नजर टिकाई है। तीनों वृहद गोशालाओं में 400 गोवंशों के संरक्षण की क्षमता है। उधर, ग्राम पंचायत की देखरेख में होने वाली अनदेखी की समस्या दूर हो जाएगी।
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51 गोशालाओं में संरक्षित 6170 गोवंश
जिले में 51 गोशालाओं के जरिए गो संवर्धन व संरक्षण की कवायद हो रही है। यहां पर 6170 गोवंश संरक्षित हैं। शहरी क्षेत्र में नौ और ग्रामीण क्षेत्र के दायरे में 42 गोशालाएं आ रही हैं। नगर क्षेत्र में निकायों के जिम्मेदारी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में अभी तक गोशालाओं को ग्राम पंचायत स्तर पर देखा जा रहा था।
खानपुर की तरह जिले की तीन वृहद गोशालाओं का संचालन समिति के जरिए कराया जाएगा। समिति को तीनों गोशालाओं के देखरेख की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। वहीं, दो अन्य गोशालाएं भी इस कड़ी दी जाएंगी।
-डॉ. विशन सिंह विकल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी