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युवक की हत्या में दो भाइयों समेत चार को उम्रकैद
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औरैया। करीब तीन वर्ष पहले रुपये के लेनदेन में युवक की हत्या के जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार ने दो भाइयों समेत चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। प्रत्येक को एक-एक लाख रुपये अर्थदंड भी दिया है। मामला तीन साल पुराना है।
जिला शासकीय अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा व वादी के वकील बलराम सिंह चौहान के अनुसार मनोज कुमार पुत्र सुखवीर सिंह मूल निवासी केबिन की मड़ैया हाल मुकाम निवासी नहर बाजार दिबियापुर ने रिपोर्ट लिखाई थी कि सात व आठ सितंबर 2016 की रात में वह अपनी मां, चाचा अनिल कुमार व भाई प्रशांत उर्फ शेर सिंह (19) के साथ घर में लेटे थे। रात करीब दो बजे ग्राम बादशाहपुर छौंक थाना सहायल निवासी रुचित सिंह अपने साथी अरविंद कुमार पुत्र भारत सिंह निवासी बादशाहपुर छौंक, अरुण कुमार यादव व उमेश कुमार पुत्रगण रामकेश यादव निवासी अजमतपुर थाना दिबियापुर उसके पहुंचे। रुचित ने उसके भाई प्रशांत को आवाज देकर बुलाया और कहा कि कुछ जरूरी काम है। पूछने पर काम नहीं बताया। वे लोग प्रशांत को बाइक पर बैठाकर ले गए। आरोप लगाया कि उन लोगों ने प्रशांत को श्री साईं सीमेंट एजेंसी के गेट पर मारापीटा और सुबह लगभग चार बजे हत्या कर दी। वादी का कहना था कि चारों दबंग किस्म के हैं और इनसे रुपयों के लेनदेन पर पुरानी रंजिश है। प्रशांत के शव का पोस्टमार्टम हुआ। पुलिस ने विवेचना कर धारा 302/34 आईपीसी में आरोप पत्र जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया। विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से डीजीसी अभिषेक मिश्रा व वरिष्ठ अधिवक्ता बलराम सिंह चौहान ने एक युवक की घर से ले जाकर नृशंस हत्या के आरोपियों को कठोर दंड देने की मांग की। बचाव पक्ष ने उन्हें निर्दोष बताया। दोनों पक्षकारों को सुनने के बाद जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार ने अरुण कुमार यादव, उमेश कुमार, अरविंद कुमार, व रुचित सिंह को हत्या का दोषी माना। चारों को आजीवन कारावास व प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की वसूली राजस्व के बकाया की भांति होगी। अधिवक्ता शिवम शर्मा ने बताया कि वसूले अर्थदंड की 80 फीसदी धनराशि बतौर हर्जा मृतक के विधिक उत्तराधिकारियों को देय होगी। चारों को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया।
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जिला शासकीय अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा व वादी के वकील बलराम सिंह चौहान के अनुसार मनोज कुमार पुत्र सुखवीर सिंह मूल निवासी केबिन की मड़ैया हाल मुकाम निवासी नहर बाजार दिबियापुर ने रिपोर्ट लिखाई थी कि सात व आठ सितंबर 2016 की रात में वह अपनी मां, चाचा अनिल कुमार व भाई प्रशांत उर्फ शेर सिंह (19) के साथ घर में लेटे थे। रात करीब दो बजे ग्राम बादशाहपुर छौंक थाना सहायल निवासी रुचित सिंह अपने साथी अरविंद कुमार पुत्र भारत सिंह निवासी बादशाहपुर छौंक, अरुण कुमार यादव व उमेश कुमार पुत्रगण रामकेश यादव निवासी अजमतपुर थाना दिबियापुर उसके पहुंचे। रुचित ने उसके भाई प्रशांत को आवाज देकर बुलाया और कहा कि कुछ जरूरी काम है। पूछने पर काम नहीं बताया। वे लोग प्रशांत को बाइक पर बैठाकर ले गए। आरोप लगाया कि उन लोगों ने प्रशांत को श्री साईं सीमेंट एजेंसी के गेट पर मारापीटा और सुबह लगभग चार बजे हत्या कर दी। वादी का कहना था कि चारों दबंग किस्म के हैं और इनसे रुपयों के लेनदेन पर पुरानी रंजिश है। प्रशांत के शव का पोस्टमार्टम हुआ। पुलिस ने विवेचना कर धारा 302/34 आईपीसी में आरोप पत्र जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया। विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से डीजीसी अभिषेक मिश्रा व वरिष्ठ अधिवक्ता बलराम सिंह चौहान ने एक युवक की घर से ले जाकर नृशंस हत्या के आरोपियों को कठोर दंड देने की मांग की। बचाव पक्ष ने उन्हें निर्दोष बताया। दोनों पक्षकारों को सुनने के बाद जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार ने अरुण कुमार यादव, उमेश कुमार, अरविंद कुमार, व रुचित सिंह को हत्या का दोषी माना। चारों को आजीवन कारावास व प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की वसूली राजस्व के बकाया की भांति होगी। अधिवक्ता शिवम शर्मा ने बताया कि वसूले अर्थदंड की 80 फीसदी धनराशि बतौर हर्जा मृतक के विधिक उत्तराधिकारियों को देय होगी। चारों को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया।
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