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..लेकिन विदा न हो सकी बेटी किसान की
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Sun, 21 Feb 2016 11:43 PM IST
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कीमत तो खूब बढ़ गई खेतों में धान की, लेकिन विदा न हो सकी बेटी किसान की। किसानों के हालात को कविता के माध्यम से बयां कर फर्रुखाबाद के कवि शिवओम अंबर ने श्रोताओं को झकझोर दिया। मौका था शरदोत्सव प्रदर्शनी में शनिवार रात आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का। इस दौरान कवियों ने एक से बढ़कर एक नायाब कविताएं सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली से आईं गीतकार डा. कीर्ति काले की सरस्वती वंदना से की। इसके बाद लखनऊ के युवा कवि प्रख्यात मिश्रा ने उन्होंने जेएनयू पर अपनी कविता पढ़ते हुए कहा कि गाल पे तमाचा देश की खातिर नहीं खाना पड़ा, चाहे आजादी के लिए गर्दने ही क्यों न कटानी पड़े...सुनाकर खूब तालियां बटोरी। इलाहाबाद के हास्य कवि अखिलेश ने अपनी कविता सुनाते हुए सभी को लोट पोट कर दिया। उन्होंने पढ़ा, जो सब हैं पढ़े-लिखे वो संतरी बन गए, जिसने विवाह करके अपनी पत्नी छोड़ दी वो अपने देश के प्रधानमंत्री बन गए।
राजस्थान से आए ओज के कवि विनीत चौहान की कविताओं ने पूरे पांडाल में जोश पैदा कर दिया। उन्होंने आतंकवाद पर कविता पढ़ी। पूरी घाटी दहल उठी है आतंकी अंगारों से, कश्मीर में आग लगी है पाकिस्तानी नारों से। वहीं राजस्थान के कुंवर जावेद ने पढ़ा कि दिया बनूं तो पतंगा नसीब हो मुझको, नहाना चाहूं तो गंगा नसीब हो मुझको, मेरी तमन्ना गर कोई है तो सिर्फ यह है, मैं मरु तो तिरंगा नसीब हो मुझको। इस दौरान पदम अलबेला ने अपनी हास्य कविता में अलबेली पत्नी पर तमाम व्यंगात्मक टिप्पणियां दी। कानपुर से आई गीतकार चांदनी ने अपने श्रंगार रस की कविताएं सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। जबकि इंदौर से आए हास्य कवि अशोक नागर की कविताओं ने सभी को बहुत देर तक गुदगुदाया।
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इसके पहले कार्यक्रम की शुभारंभ मुख्य अतिथि एसडीएम सदर जितेंद्र श्रीवास्तव और सीओ सुभाष अत्री ने कराई। एसडीएम सदर ने कहा कि कविता ही एक ऐसी विधा है। जिसके माध्यम से देश के सही हालातों को बेहतरीन तरीके से उकेरा जा सकता है। कवि न होते तो देश और प्रदेश के हालात बद से बदतर हो जाते। इन्होंने ही समय-समय पर सोई हुई आवाम को जगाने का काम किया है। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजक सभासद राजेंद्र तिवारी, विवेक पोरवाल, राजेश बाजपेई, नरेंद्र तोमर, रामू पेंटर, हरिओम शर्मा, राजीव गुप्ता ने मुख्य अतिथि एसडीएम सदर, विशिष्ट अतिथि सीओ सदर समेत अध्यक्ष प्रतिनिधि लालजी शुक्ल का स्वागत किया।
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कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली से आईं गीतकार डा. कीर्ति काले की सरस्वती वंदना से की। इसके बाद लखनऊ के युवा कवि प्रख्यात मिश्रा ने उन्होंने जेएनयू पर अपनी कविता पढ़ते हुए कहा कि गाल पे तमाचा देश की खातिर नहीं खाना पड़ा, चाहे आजादी के लिए गर्दने ही क्यों न कटानी पड़े...सुनाकर खूब तालियां बटोरी। इलाहाबाद के हास्य कवि अखिलेश ने अपनी कविता सुनाते हुए सभी को लोट पोट कर दिया। उन्होंने पढ़ा, जो सब हैं पढ़े-लिखे वो संतरी बन गए, जिसने विवाह करके अपनी पत्नी छोड़ दी वो अपने देश के प्रधानमंत्री बन गए।
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राजस्थान से आए ओज के कवि विनीत चौहान की कविताओं ने पूरे पांडाल में जोश पैदा कर दिया। उन्होंने आतंकवाद पर कविता पढ़ी। पूरी घाटी दहल उठी है आतंकी अंगारों से, कश्मीर में आग लगी है पाकिस्तानी नारों से। वहीं राजस्थान के कुंवर जावेद ने पढ़ा कि दिया बनूं तो पतंगा नसीब हो मुझको, नहाना चाहूं तो गंगा नसीब हो मुझको, मेरी तमन्ना गर कोई है तो सिर्फ यह है, मैं मरु तो तिरंगा नसीब हो मुझको। इस दौरान पदम अलबेला ने अपनी हास्य कविता में अलबेली पत्नी पर तमाम व्यंगात्मक टिप्पणियां दी। कानपुर से आई गीतकार चांदनी ने अपने श्रंगार रस की कविताएं सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। जबकि इंदौर से आए हास्य कवि अशोक नागर की कविताओं ने सभी को बहुत देर तक गुदगुदाया।
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इसके पहले कार्यक्रम की शुभारंभ मुख्य अतिथि एसडीएम सदर जितेंद्र श्रीवास्तव और सीओ सुभाष अत्री ने कराई। एसडीएम सदर ने कहा कि कविता ही एक ऐसी विधा है। जिसके माध्यम से देश के सही हालातों को बेहतरीन तरीके से उकेरा जा सकता है। कवि न होते तो देश और प्रदेश के हालात बद से बदतर हो जाते। इन्होंने ही समय-समय पर सोई हुई आवाम को जगाने का काम किया है। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजक सभासद राजेंद्र तिवारी, विवेक पोरवाल, राजेश बाजपेई, नरेंद्र तोमर, रामू पेंटर, हरिओम शर्मा, राजीव गुप्ता ने मुख्य अतिथि एसडीएम सदर, विशिष्ट अतिथि सीओ सदर समेत अध्यक्ष प्रतिनिधि लालजी शुक्ल का स्वागत किया।