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औरैयाः ब्लड बैंक के लिए मिला लैब टेक्नीशियन, लाइसेंस में ऩहीं आएगी बाधा
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संचालन के इंतजार में बंद ब्लड बैंक। संवाद
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। शहर के 50 शैया युक्त जिला अस्पताल में बंद पड़े ब्लड बैंक के लिए लैब टेक्नीशियन की कमी पूरी हो गई है। ऐसे में लाइसेंस में बाधा नहीं आएगी। उधर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक ने जरूरी उपकरणों की खरीद किए जाने को बजट भी जारी कर दिया है। इससे जल्द ब्लड बैंक की सुविधा का लाभ मिल सकेगा।
वर्ष 2013 से तत्कालीन पैथोलॉजिस्ट के स्थानांतरण होने और लैब टेक्नीशियन का पद खाली होने पर तबसे ब्लड बैंक बंद है। लगभग नौ सालों से ब्लड बैंक के बंद रहने से लाइसेंस भी निरस्त हो गया था। इधर सीएमओ से लेकर 50 शैया युक्त अस्पताल प्रशासन के एड़ी चोटी का जोर लगाने के बाद भी खाली पदों को भरा नहीं जा सका था।
जिससे ब्लड बैंक का नया लाइसेंस आवेदन किए जाने के बाद भी नहीं बन सका था। ब्लड बैंक न होने के कारण जिले के लोगों को जरूरत पड़ने पर कानपुर, लखनऊ, आगरा, इटावा तक की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। सीएमएस डॉ.राजेश मोहन गुप्ता ने आने के बाद ब्लड बैंक संचालन में आ रही समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। पैथोलॉजिस्ट के खाली पद पर भी तैनाती कर दी गई।
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औषधि निरीक्षक ज्योत्सना आनंद ने ब्लड बैंक का निरीक्षण किया तो पता चला कि एसी गायब हैं। इसके अलावा अन्य कई खामियां मिलीं। जिस पर उन्होंने रिपोर्ट सीएमएस और सीएमओ को दी। इसके बाद खामियां दूर करने की प्रक्रिया शुरू हुई। हाल ही में लैब टेक्नीशियन के खाली पड़े पद के लिए कानपुर से आए मुकुल यादव की तैनाती कर दी गई।
यही नहीं जरूरी उपकरणों में दो एसी, यूपीएस, एयर कर्टेन, कंप्यूटर, प्रिंटर आदि खरीदने का बजट भी जारी कर दिया गया है। इससे नए लाइसेंस को बनाए जाने की बाधाएं दूर हो गईं हैं।
सीएमओ डॉ.अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि लैब टेक्नीशियन की तैनाती कर दी गई है। जरूरी सामान खरीदने को भी बजट मिल गया है। अब ब्लड बैंक के लाइसेंस बनवाने में आ रही बाधाएं खत्म हो गईं हैं। जल्द संचालन की दिशा में काम तेज किया जाएगा। , औरैया।
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वर्ष 2013 से तत्कालीन पैथोलॉजिस्ट के स्थानांतरण होने और लैब टेक्नीशियन का पद खाली होने पर तबसे ब्लड बैंक बंद है। लगभग नौ सालों से ब्लड बैंक के बंद रहने से लाइसेंस भी निरस्त हो गया था। इधर सीएमओ से लेकर 50 शैया युक्त अस्पताल प्रशासन के एड़ी चोटी का जोर लगाने के बाद भी खाली पदों को भरा नहीं जा सका था।
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जिससे ब्लड बैंक का नया लाइसेंस आवेदन किए जाने के बाद भी नहीं बन सका था। ब्लड बैंक न होने के कारण जिले के लोगों को जरूरत पड़ने पर कानपुर, लखनऊ, आगरा, इटावा तक की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। सीएमएस डॉ.राजेश मोहन गुप्ता ने आने के बाद ब्लड बैंक संचालन में आ रही समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। पैथोलॉजिस्ट के खाली पद पर भी तैनाती कर दी गई।
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औषधि निरीक्षक ज्योत्सना आनंद ने ब्लड बैंक का निरीक्षण किया तो पता चला कि एसी गायब हैं। इसके अलावा अन्य कई खामियां मिलीं। जिस पर उन्होंने रिपोर्ट सीएमएस और सीएमओ को दी। इसके बाद खामियां दूर करने की प्रक्रिया शुरू हुई। हाल ही में लैब टेक्नीशियन के खाली पड़े पद के लिए कानपुर से आए मुकुल यादव की तैनाती कर दी गई।
यही नहीं जरूरी उपकरणों में दो एसी, यूपीएस, एयर कर्टेन, कंप्यूटर, प्रिंटर आदि खरीदने का बजट भी जारी कर दिया गया है। इससे नए लाइसेंस को बनाए जाने की बाधाएं दूर हो गईं हैं।
सीएमओ डॉ.अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि लैब टेक्नीशियन की तैनाती कर दी गई है। जरूरी सामान खरीदने को भी बजट मिल गया है। अब ब्लड बैंक के लाइसेंस बनवाने में आ रही बाधाएं खत्म हो गईं हैं। जल्द संचालन की दिशा में काम तेज किया जाएगा। , औरैया।