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उपहारों का बाजार, धनतेरस पर झूमा बाजार, 250 करोड़ का हुआ जिले में कारोबार
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फोटो 25एयूआरपी06- एक सराफ की दुकान पर जेवरात पसंद करतीं महिला
- फोटो : AURAIYA
औरैया। धनतेरस के दिन बाजारों में खूब चहल-पहल देखने को मिली। शहर के ही ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले बाजारों में भी जबरदस्त भीड़ देखने को मिली। दुकानदारों ने ग्राहकों को लुभाने के लिए कई स्कीमें लांच की तो, उपहार भी बांटे। जिसके चलते धनतेरस पर जिले भर के बाजारों में 250 करोड़ की धन वर्षा हुई। सबसे अधिक दो पहिया वाहनों का क्रेज रहा। इसके बाद बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक बाजार झूमा।
इलेक्ट्रॉनिक शोरूमों पर ग्राहकों को लुभाने के लिए कंपनियों ने कई तरह की छूट ग्राहकों को ऑफर में दिए, तो वहीं ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए शोरूम मालिकों ने भी सजावट के साथ ग्राहकों को उपहार बांटे। जहां फ्रिज, एलईडी टीवी, वाशिंग मशीन और अन्य घरेलू उपकरणों के अलावा गैजेट खरीदकर लोगों ने दिवाली ऑफर का भरपूर लाभ लिया। हालांकि सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण सराफा बाजार ठंडा रहा। उपहारों की खरीददारी का क्रेज बाजार में नजर आया। धनतेरस के चलते शुक्रवार को बाजार सुबह नौ बजे ही खुले दिखे। लेकिन बाजार में भीड़ दोपहर 12 बजे के बाद देखने को मिली। परिवार समेत लोगों ने बाजारों में पहुंचकर खरीददारी कर आनंद लिया। देर रात तक बाजार गुलजार रहे।
धनतेरस पर बर्तन खरीदना ज्यादा शुभ होता है। शुक्रवार को धनतेरस के कारण बाजार खुले रहे। शहर के सभी बर्तनों की दुकानों पर दोपहर 12 बजे से खरीददारों की भीड़ लगना शुरू हुई। जो देर रात तक देखने को मिली। लोगों की भीड़ ने स्टील, पीतल, कांच के अलावा सेरेमिक के बर्तन भी लोगों ने खरीदे। देर रात तक लोग बर्तन खरीदते नजर आए। क्रॉकरी गिफ्ट से लेकर आकर्षक बर्तनों और माइक्रोवेव ओवेन में प्रयोग होने वाले बर्तनों की मांग रही। इसके साथ ही इस बार लोगों में पीतल के बर्तनों की मांग भी देखी गई। बर्तन कारोबारी अशोक अग्रवाल ने बताया कि धनतेरस पर स्टील व चांदी के बर्तन के खरीदने का विशेष महत्व है। लेकिन बदलते दौर में लोग फैंसी आइटम पसंद करते हैं। किचन में क्रॉकरी, लकड़ी के बर्तनों का क्रेज बढ़ा है। इसलिए दूसरे मैटेरियल के बर्तन भी काफी खरीदे गए।
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धनतेरस पर सराफा बाजार पिछले वर्षों के मुकाबले ठंडा रहा। जीएसटी, नोटबंदी के बाद सोने के बढ़ते दामों का असर सराफा बाजार में साफ नजर आया। सदर बाजार स्थित सराफा कारोबारी लाले वर्मा ने बताया कि पिछले सालों की अपेक्षा इस बार सराफा कारोबार ठंडा रहा है। इतनी उम्मीद नहीं थी। धनतेरस पर जहां पहले बाजार में सुबह 10 बजे से भीड़ देखने को मिलती थी। इस बार शाम चार बजे तक बाजारों में सन्नाटे की स्थिति देखने को मिली। शाम के समय सराफा बाजार में हल्की भीड़ रही। ग्राहकों द्वारा हल्के वजन के गहने, चांदी की मूर्तियां, चांदी के सिक्के, डालर की खरीदारी की गई। निखिल वर्मा ने बताया कि पहली बार सोने की बढ़ी कीमतों के कारण ग्राहक सोने की तरफ नहीं आए।
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इलेक्ट्रॉनिक शोरूमों पर ग्राहकों को लुभाने के लिए कंपनियों ने कई तरह की छूट ग्राहकों को ऑफर में दिए, तो वहीं ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए शोरूम मालिकों ने भी सजावट के साथ ग्राहकों को उपहार बांटे। जहां फ्रिज, एलईडी टीवी, वाशिंग मशीन और अन्य घरेलू उपकरणों के अलावा गैजेट खरीदकर लोगों ने दिवाली ऑफर का भरपूर लाभ लिया। हालांकि सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण सराफा बाजार ठंडा रहा। उपहारों की खरीददारी का क्रेज बाजार में नजर आया। धनतेरस के चलते शुक्रवार को बाजार सुबह नौ बजे ही खुले दिखे। लेकिन बाजार में भीड़ दोपहर 12 बजे के बाद देखने को मिली। परिवार समेत लोगों ने बाजारों में पहुंचकर खरीददारी कर आनंद लिया। देर रात तक बाजार गुलजार रहे।
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धनतेरस पर बर्तन खरीदना ज्यादा शुभ होता है। शुक्रवार को धनतेरस के कारण बाजार खुले रहे। शहर के सभी बर्तनों की दुकानों पर दोपहर 12 बजे से खरीददारों की भीड़ लगना शुरू हुई। जो देर रात तक देखने को मिली। लोगों की भीड़ ने स्टील, पीतल, कांच के अलावा सेरेमिक के बर्तन भी लोगों ने खरीदे। देर रात तक लोग बर्तन खरीदते नजर आए। क्रॉकरी गिफ्ट से लेकर आकर्षक बर्तनों और माइक्रोवेव ओवेन में प्रयोग होने वाले बर्तनों की मांग रही। इसके साथ ही इस बार लोगों में पीतल के बर्तनों की मांग भी देखी गई। बर्तन कारोबारी अशोक अग्रवाल ने बताया कि धनतेरस पर स्टील व चांदी के बर्तन के खरीदने का विशेष महत्व है। लेकिन बदलते दौर में लोग फैंसी आइटम पसंद करते हैं। किचन में क्रॉकरी, लकड़ी के बर्तनों का क्रेज बढ़ा है। इसलिए दूसरे मैटेरियल के बर्तन भी काफी खरीदे गए।
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धनतेरस पर सराफा बाजार पिछले वर्षों के मुकाबले ठंडा रहा। जीएसटी, नोटबंदी के बाद सोने के बढ़ते दामों का असर सराफा बाजार में साफ नजर आया। सदर बाजार स्थित सराफा कारोबारी लाले वर्मा ने बताया कि पिछले सालों की अपेक्षा इस बार सराफा कारोबार ठंडा रहा है। इतनी उम्मीद नहीं थी। धनतेरस पर जहां पहले बाजार में सुबह 10 बजे से भीड़ देखने को मिलती थी। इस बार शाम चार बजे तक बाजारों में सन्नाटे की स्थिति देखने को मिली। शाम के समय सराफा बाजार में हल्की भीड़ रही। ग्राहकों द्वारा हल्के वजन के गहने, चांदी की मूर्तियां, चांदी के सिक्के, डालर की खरीदारी की गई। निखिल वर्मा ने बताया कि पहली बार सोने की बढ़ी कीमतों के कारण ग्राहक सोने की तरफ नहीं आए।