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सकरी गलियों में लगी आग तो भगवान ही सहारा, मचेगा हाहाकार
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फोटो 14एयूआरपी04- शहर के मोहल्ला रुहाई स्थित एक गली में का हाल फोटो 14एयूआरपी05- मोहल्ला विधिचंद की तंग
- फोटो : AURAIYA
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शहर में अधिकांश आबादी घनी बस्तियों में निवास करती है। जिस कारण शहर में संकरी गलियों की भरमार है। अगर इन गलियों के किसी भी मकान में आग लगती है, तो वहां दमकल गाड़ियों का पहुंचना मुुश्किल है।
ऐेसे में जान-माल का खतरा वहां के लोगों को अधिक है। दिल्ली और आगरा में हुए अग्निकांड के बाद शहर में संकरी गलियों में रहने वाले लोगों में जन जागरुकता की जरूरत महसूस होने लगी है। शहर की अधिकांश गलियों में हालात चिंताजनक देखने को मिले हैं।
शहर के मोहल्ला विधीचंद, होमगंज, बहन टोला, प्रार्थू गली, रुहाई मोहल्ला, बघाकटरा, परिहार टोला, सत्तेश्वर, गुमटी मोहल्ले आदि मोहल्लों में संकरी गलियों की संख्या अधिक है।
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यह वह मोहल्ले हैं जहां शहर की 60 से 70 फीसदी आबादी रहती है। इन क्षेत्रों में आग से सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। आवास के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ रहीं हैं। जिस कारण यहां पहुंचने के रास्ते और भी संकरे हो गए हैं। बता दें कि इन आवासीय मोहल्लों में कई स्थानों पर गोपनीय तरीके से घरों में अवैध रुप से फैक्ट्रियां भी संचालित हो रहीं हैं। जिनमें आग का खतरा बना हुआ है।
शहर की घनी बस्तियों की बात करें या चौड़े मुख्य मार्गों की। अधिकांश स्थानों पर भवन का निर्माण बिना मानक के धड़ल्ले से चल रहे हैं। शहर में केवल उन भवनों का निर्माण मानकों पर हो रहा है।
जिनके भवन मालिकों को बैंक से ऋण की जरूरत होती है। शहर में पिछले एक साल में कई ऐसे भवन तैयार हुए हैं। जिनमें आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। यहां प्रभाव प्रभावशाली लोगों के होने के चलते न तो किसी न शिकायत की और न ही अधिकारियों ने उन भवनों की जांच पड़ताल की। जिस कारण इन भवनों के पास फायर विभाग की मिलने वाली एनओसी भी नहीं हैं।
भवन निर्माण से पहले नक्शा पास करना होता है। दमकल विभाग निर्माण स्थल का निरीक्षण कर मानक तय करता है। तब तय होती है कि भवन की ऊंचाई कितनी होगी। इसके साथ ही भवन के चारों ओर सुरक्षित क्षेत्र भी तय होता है।
शहर में बनी अधिकांश भवन इसकी अनदेखी कर बने है। हाल ही जो बडे़ भवन बने है उनमें कुछ हद तक मानकों को पूरा करने की भवन मालिकों ने प्रयास किया है। लेकिन अधिकांश भवन बिना मानक के बन चुके हैं। जिनमें आग की घटना होने पर उनमें मौजूद लोगों के पास आग बुझाने से अधिक बचकर भाग निकलने में ही भलाई होगी।
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ऐेसे में जान-माल का खतरा वहां के लोगों को अधिक है। दिल्ली और आगरा में हुए अग्निकांड के बाद शहर में संकरी गलियों में रहने वाले लोगों में जन जागरुकता की जरूरत महसूस होने लगी है। शहर की अधिकांश गलियों में हालात चिंताजनक देखने को मिले हैं।
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शहर के मोहल्ला विधीचंद, होमगंज, बहन टोला, प्रार्थू गली, रुहाई मोहल्ला, बघाकटरा, परिहार टोला, सत्तेश्वर, गुमटी मोहल्ले आदि मोहल्लों में संकरी गलियों की संख्या अधिक है।
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यह वह मोहल्ले हैं जहां शहर की 60 से 70 फीसदी आबादी रहती है। इन क्षेत्रों में आग से सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। आवास के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ रहीं हैं। जिस कारण यहां पहुंचने के रास्ते और भी संकरे हो गए हैं। बता दें कि इन आवासीय मोहल्लों में कई स्थानों पर गोपनीय तरीके से घरों में अवैध रुप से फैक्ट्रियां भी संचालित हो रहीं हैं। जिनमें आग का खतरा बना हुआ है।
शहर की घनी बस्तियों की बात करें या चौड़े मुख्य मार्गों की। अधिकांश स्थानों पर भवन का निर्माण बिना मानक के धड़ल्ले से चल रहे हैं। शहर में केवल उन भवनों का निर्माण मानकों पर हो रहा है।
जिनके भवन मालिकों को बैंक से ऋण की जरूरत होती है। शहर में पिछले एक साल में कई ऐसे भवन तैयार हुए हैं। जिनमें आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। यहां प्रभाव प्रभावशाली लोगों के होने के चलते न तो किसी न शिकायत की और न ही अधिकारियों ने उन भवनों की जांच पड़ताल की। जिस कारण इन भवनों के पास फायर विभाग की मिलने वाली एनओसी भी नहीं हैं।
भवन निर्माण से पहले नक्शा पास करना होता है। दमकल विभाग निर्माण स्थल का निरीक्षण कर मानक तय करता है। तब तय होती है कि भवन की ऊंचाई कितनी होगी। इसके साथ ही भवन के चारों ओर सुरक्षित क्षेत्र भी तय होता है।
शहर में बनी अधिकांश भवन इसकी अनदेखी कर बने है। हाल ही जो बडे़ भवन बने है उनमें कुछ हद तक मानकों को पूरा करने की भवन मालिकों ने प्रयास किया है। लेकिन अधिकांश भवन बिना मानक के बन चुके हैं। जिनमें आग की घटना होने पर उनमें मौजूद लोगों के पास आग बुझाने से अधिक बचकर भाग निकलने में ही भलाई होगी।