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कुलाबे का पानी भरने से समरथपुर गांव बना टापू
अमर उजाला ब्यूरो/औरैया
Updated Thu, 14 Dec 2017 11:47 PM IST
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समरथपुर गांव में भरे पानी से निकलते लोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विकास खंड के ग्राम समरथपुर में कुलाबे का पानी भर जाने से गांव टापू बन गया है। पानी लोगों के घरों तक पहुंच गया है। इससे लोगों को घुटनों तक पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। वहीं, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। दूसरी तरफ एक सौ बीघा से अधिक फसल जलमग्न हो गई है।
समरथमपुर के लोगों के लिए आनेपुर बंबा रजबहा किसी मुसीबत से कम नहीं है। नहर आने के बाद कुलाबे में छोड़े गए पानी से लोगों की स्थिति नारकीय हो चुकी है। गांव निवासी रोहित सेंगर ने बताया कि जब नहर चालू की जाती है, तो पूरा गांव जलमग्न हो जाता है। गांव के लगभग 50 मकान पानी से घिर चुके हैं। इन घरों के अधिकांश बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। वहीं, छोटे बच्चों को बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है।
छोटे सिंह निषाद ने बताया कि शहर जाने के लिए घुटनों तक पानी से होकर निकलना पड़ रहा है। महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। बूढ़े-बुजुर्ग घरों में दुबकने को बाध्य हैं। सुरेश बाथम ने बताया कि गांव में कई नए मकान बन रहे हैं। जिन मकानों की नई नींव भरी है, वह धंसकने के कगार पर हैं। दूसरी तरफ एक सौ बीघा फसल जलमग्न हो गई है। जिसमें गेहूं, चना व सरसों आदि की फसल बर्बाद हो चुकी है। इससे किसानों में हाहाकार मचा है। पुराने समय से कुलाबे की चौड़ाई 20 इंच है, जबकि यहां पर अधिकांश लोगों के मकान बन चुके हैं। खेती का रकबा कम हो चुका है, लेकिन पानी पुराने रोस्टर से ही आ रहा है। समय-समय पर तहसील दिवस व अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। रात के समय घर लौटने पर लोग पानी में गिरकर चुटहिल हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी लोगों को जानवरों को बांधने में हो रही है।
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दीपेंद्र दुबे का कहना है कि यदि कुलाबे की चौड़ाई 20 से घटाकर छह इंच कर दी जाए तो रोज-रोज की किल्लत से निजात मिल सकती है। इस संबंध अधिशासी अभियंता भोगनीपुर प्रखंड सुरेश कुमार का कहना है कि समरथपुर के लोग इसकी शिकायत करें। उनकी शिकायत की डिमांड अधीक्षण अभियंता को भेजी जाएगी, तभी इस समस्या का स्थाई समाधान संभव है।
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समरथमपुर के लोगों के लिए आनेपुर बंबा रजबहा किसी मुसीबत से कम नहीं है। नहर आने के बाद कुलाबे में छोड़े गए पानी से लोगों की स्थिति नारकीय हो चुकी है। गांव निवासी रोहित सेंगर ने बताया कि जब नहर चालू की जाती है, तो पूरा गांव जलमग्न हो जाता है। गांव के लगभग 50 मकान पानी से घिर चुके हैं। इन घरों के अधिकांश बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। वहीं, छोटे बच्चों को बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है।
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छोटे सिंह निषाद ने बताया कि शहर जाने के लिए घुटनों तक पानी से होकर निकलना पड़ रहा है। महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। बूढ़े-बुजुर्ग घरों में दुबकने को बाध्य हैं। सुरेश बाथम ने बताया कि गांव में कई नए मकान बन रहे हैं। जिन मकानों की नई नींव भरी है, वह धंसकने के कगार पर हैं। दूसरी तरफ एक सौ बीघा फसल जलमग्न हो गई है। जिसमें गेहूं, चना व सरसों आदि की फसल बर्बाद हो चुकी है। इससे किसानों में हाहाकार मचा है। पुराने समय से कुलाबे की चौड़ाई 20 इंच है, जबकि यहां पर अधिकांश लोगों के मकान बन चुके हैं। खेती का रकबा कम हो चुका है, लेकिन पानी पुराने रोस्टर से ही आ रहा है। समय-समय पर तहसील दिवस व अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। रात के समय घर लौटने पर लोग पानी में गिरकर चुटहिल हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी लोगों को जानवरों को बांधने में हो रही है।
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दीपेंद्र दुबे का कहना है कि यदि कुलाबे की चौड़ाई 20 से घटाकर छह इंच कर दी जाए तो रोज-रोज की किल्लत से निजात मिल सकती है। इस संबंध अधिशासी अभियंता भोगनीपुर प्रखंड सुरेश कुमार का कहना है कि समरथपुर के लोग इसकी शिकायत करें। उनकी शिकायत की डिमांड अधीक्षण अभियंता को भेजी जाएगी, तभी इस समस्या का स्थाई समाधान संभव है।