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तापमान बढ़ने से सरसों और गेहूं की घट सकती पैदावार
अमर उजाला ब्यूरो/औरैया
Updated Tue, 19 Dec 2017 11:47 PM IST
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खेत पर लहलहाती सरसों की फसल।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पछुआ हवाओं के कारण अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज नहीं हो रही है। इस कारण रात में नमी और दिन में गर्मी बरकरार है। दिन का तापमान जहां 22 से 24 डिग्री के बीच बना हुआ है, वहीं रात में तापमान 8 से 9 डिग्री की बीच रह रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह मौसम सरसों और गेहूं के लिए ठीक नहीं है। इससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
पिछले साल दिसंबर के पहले सप्ताह में जबरदस्त कोहरा और सर्दी हुई जो कि गेहूं और सरसों के लिए वरदान बनी। मगर इस बार कोहरा कभी कभार ही हो रहा है। सर्दी भी ठीक से नहीं पड़ रही। दो दिन पहले पुरवाई चली मगर फिर से हवा का रुख पछुआ हो गया। अधिकतम तापमान में गिरावट न होने से सरसों और गेहूं की फसल के लिए संकट खड़ा है।
कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डा. संदीप कुमार बताते हैं कि 23 से बदली रहेगी और कुछ बूंदाबांदी भी हो सकती है। 25 व 29 दिसंबर से बूंदाबांदी हो सकती है।
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ये हो सकती दिक्कतें
पौध की लंबाई रुक जाएगी, दाना कमजोर होगा, पैदावार पर असर पड़ सकता है, फसलों में कीट लगने की आशंका।
ऐसे करें बचाव
कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि अरहर में प्रति हेक्टेयर 100 लीटर पानी में दो किलो डीएपी का घोल बनाकर छिड़काव करें। सरसों की फसल में दूसरा पानी लगाएं तथा तीस किलो प्रति हेक्टेयर यूरिया का छिड़काव करें। आलू में भी पानी लगाकर यूरिया और कीट नाशक दवा का छिड़काव करें ताकि फसलों को नाइट्रोजन मिलता रहे। इसके अलावा खरपतवार नाशी का प्रयोग करें।
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पिछले साल दिसंबर के पहले सप्ताह में जबरदस्त कोहरा और सर्दी हुई जो कि गेहूं और सरसों के लिए वरदान बनी। मगर इस बार कोहरा कभी कभार ही हो रहा है। सर्दी भी ठीक से नहीं पड़ रही। दो दिन पहले पुरवाई चली मगर फिर से हवा का रुख पछुआ हो गया। अधिकतम तापमान में गिरावट न होने से सरसों और गेहूं की फसल के लिए संकट खड़ा है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डा. संदीप कुमार बताते हैं कि 23 से बदली रहेगी और कुछ बूंदाबांदी भी हो सकती है। 25 व 29 दिसंबर से बूंदाबांदी हो सकती है।
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ये हो सकती दिक्कतें
पौध की लंबाई रुक जाएगी, दाना कमजोर होगा, पैदावार पर असर पड़ सकता है, फसलों में कीट लगने की आशंका।
ऐसे करें बचाव
कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि अरहर में प्रति हेक्टेयर 100 लीटर पानी में दो किलो डीएपी का घोल बनाकर छिड़काव करें। सरसों की फसल में दूसरा पानी लगाएं तथा तीस किलो प्रति हेक्टेयर यूरिया का छिड़काव करें। आलू में भी पानी लगाकर यूरिया और कीट नाशक दवा का छिड़काव करें ताकि फसलों को नाइट्रोजन मिलता रहे। इसके अलावा खरपतवार नाशी का प्रयोग करें।