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इलाज के अभाव में गई युवक की जान
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Thu, 25 Aug 2016 12:05 AM IST
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हादसे में घायल
- फोटो : अमर उजाला
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सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नरायनपुर में नहाते समय बाथरूम में फिसल जाने से एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे शहर स्थित जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन अस्पताल में इमरजेंसी सेवा न होने के कारण उसका उपचार नहीं हो सका। इस पर परिजनों ने हंगामा काटा। बाद में परिजन युवक को सौ शैय्या अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मोहल्ला नरायनपुर निवासी राघवेंद्र सिंह उर्फ छुन्नू (40) पुत्र मंगल सिंह नरायनपुर में मिठाई की दुकान किए हुए हैं। बुधवार सुबह करीब 6:30 बजे वह दुकान पर जाने के लिए तैयार होने लगा। इसी बीच घर में नहाते समय बाथरूम में उसका पैर फिसल गया। इससे वह जमीन पर गिरकर बेहोश हो गया। उसके सिर पर गंभीर चोटें आईं। परिजन उसे घायलावस्था में लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में इमरजेंसी सेवा शुरू न हो पाने से सुबह कोई भी डाक्टर व कर्मचारी नहीं मिला।
काफी देर तक परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा काटा। जिला अस्पताल में किसी डाक्टर के न आने पर परिजन घायल को सौ शैय्या अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन तब तक युवक की मौत हो गई। अस्पताल में डाक्टरों ने युवक को मृत घोषित कर दिया। जिला अस्पताल की हालत पर परिजनों में खासा आक्रोश रहा। अगर यहां इमरजेंसी सुविधा होती तो सायद जान बच सकती थी।
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इमरजेंसी शुरू होने के नहीं दिख रहे आसार
लगभग दो लाख की आबादी के इस शहर में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए जिला अस्पताल है। खास बात यह है कि शहर से दस किलोमीटर दूर बनाए गए सौ शैय्या अस्पताल के शुरू हो जाने के बाद से इस अस्पताल की इमरजेंसी सेवाएं बंद हो गई। हाईवे के सबसे पास अस्पताल होने के कारण आए दिन अस्पताल में दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के आने का सिलसिला बना रहता है। लेकिन इमरजेंसी सेवा के अभाव में गंभीर हालत में सौ शैय्या युक्त जिला अस्पताल पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देते हैं।
जिला अस्पताल में डाक्टरों की कमी है। इस संबंध में शासन को पत्र लिखा जा चुका है। डाक्टरों की उपलब्धता होते ही इमरजेंसी सेवा शुरू करा दी जाएंगी। यह सेवा कब तक शुरू हो पाएगी इस मामले में कुछ भी कह पाना संभव नहीं है।
माला श्रीवास्तव
डीएम
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मोहल्ला नरायनपुर निवासी राघवेंद्र सिंह उर्फ छुन्नू (40) पुत्र मंगल सिंह नरायनपुर में मिठाई की दुकान किए हुए हैं। बुधवार सुबह करीब 6:30 बजे वह दुकान पर जाने के लिए तैयार होने लगा। इसी बीच घर में नहाते समय बाथरूम में उसका पैर फिसल गया। इससे वह जमीन पर गिरकर बेहोश हो गया। उसके सिर पर गंभीर चोटें आईं। परिजन उसे घायलावस्था में लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में इमरजेंसी सेवा शुरू न हो पाने से सुबह कोई भी डाक्टर व कर्मचारी नहीं मिला।
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काफी देर तक परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा काटा। जिला अस्पताल में किसी डाक्टर के न आने पर परिजन घायल को सौ शैय्या अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन तब तक युवक की मौत हो गई। अस्पताल में डाक्टरों ने युवक को मृत घोषित कर दिया। जिला अस्पताल की हालत पर परिजनों में खासा आक्रोश रहा। अगर यहां इमरजेंसी सुविधा होती तो सायद जान बच सकती थी।
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इमरजेंसी शुरू होने के नहीं दिख रहे आसार
लगभग दो लाख की आबादी के इस शहर में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए जिला अस्पताल है। खास बात यह है कि शहर से दस किलोमीटर दूर बनाए गए सौ शैय्या अस्पताल के शुरू हो जाने के बाद से इस अस्पताल की इमरजेंसी सेवाएं बंद हो गई। हाईवे के सबसे पास अस्पताल होने के कारण आए दिन अस्पताल में दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के आने का सिलसिला बना रहता है। लेकिन इमरजेंसी सेवा के अभाव में गंभीर हालत में सौ शैय्या युक्त जिला अस्पताल पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देते हैं।
जिला अस्पताल में डाक्टरों की कमी है। इस संबंध में शासन को पत्र लिखा जा चुका है। डाक्टरों की उपलब्धता होते ही इमरजेंसी सेवा शुरू करा दी जाएंगी। यह सेवा कब तक शुरू हो पाएगी इस मामले में कुछ भी कह पाना संभव नहीं है।
माला श्रीवास्तव
डीएम