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Auraiya News: जमीन अधिग्रहण के मुआवजे के लालच में लेखपाल ने किया फर्जीवाड़ा
Sun, 06 Jul 2025 11:28 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 06 Jul 2025 11:28 PM IST
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औरैया। राजस्व महकमे के खेल ही निराले हैं। सदर तहसील की ग्राम पंचायत भीखमपुर के एक लेखपाल ने एक तो मृतक के एक वारिस के नाम वरासत चढ़ा दी। वहीं, शेष छह वारिसों के नाम वरासत चढ़ाने में छोड़ दिए।
मामले में लेखपाल ने मृतक के जिस बेटे के नाम जमीन की वरासत कराई, उसी से ही अपनी पत्नी के नाम एक बैनामा करा लिया। लेखपाल ने यह फर्जीवाड़ा हाईवे से मुआवजा वसूलने के लालच में किया। अब मामले में जांच बैठ गई।
इस मामले में प्लॉटधारकों ने शिकायत की तो वरासत में छूटे सदस्यों के नाम भी बगैर किसी सक्षम अधिकारी के आदेश से खतौनी में चढ़ा दिए, हालांकि मामले की जांच एडीएम ने एसडीएम को सौंपी है।
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ग्राम भीखमपुर निवासी चेतराम पुत्र मंगू के नाम 1381-1384 में गाटा संख्या 218 में 41 डिसमिल जमीन थी। भीखमपुर में चकबंदी के बाद गाटा संख्या 218 चार गाटों में विभाजित हुए, इनमें 323, 324, 558 व 559 शामिल हैं।
गाटा संख्या 218 में वर्ष 1971 में राष्ट्रीय राजमार्ग अधिग्रहण में 15 डिसमिल जमीन चली गई थी, जो वर्तमान में गाटा संख्या 559 है। इससे उसके पास 26 डिसमिल जमीन ही बची थी। इसके बाद चेतराम ने 26 डिसमिल में से 9.03 डिसमिल जमीन कैलाश नाथ व रामप्रकाश के नाम बेच दी थी।
बाद मेंं उसने छुन्नू बाबू, रामदत्त, कृष्णा देवी, मुंशीलाल व हरगोविंद को भी 15 डिसमिल बेच दी थी। इसी बीच भूस्वामी चेतराम की मौत हो गई। उनकी मृत्यु के बाद चेतराम के वारिस रमेश चंद्र, राकेश चंद्र व राजकिशोर का नाम खतौनी में दर्ज हुआ। इसी बीच रमेश चंद्र की भी मृत्यु हो गई।
रमेश की मौत के बाद उसके हिस्से की जमीन वारिसों के नाम दर्ज होनी थी, लेकिन क्षेत्रीय लेखपाल ने 10 अगस्त 2021 को रमेश चंद्र के छह वारिसों को छोड़कर उसके एक बेटे अजय कुमार के नाम वरासत दर्ज कर दी। जबकि रमेश चंद्र के वारिस अजय कुमार के अलावा अनिल कुमार, आनंद, श्रीबेटी, पूजा, शिवालिका व संगीता के नाम भी खतौनी में दर्ज होने थे।
मामले में लेखपाल ने रमेश चंद्र के वारिस अजय कुमार से अपनी पत्नी व भीखमपुर निवासी अपने निजी सहायक व एक अन्य के नाम भी 135.687 वर्ग मीटर के प्लॉट बैनामा करा लिया। जबकि मौके पर कोई जमीन नहीं थी।
तीन जुलाई को डीएम व एडीएम से की शिकायत
यह मामला संज्ञान में आने के बाद शिकायतकर्ता राकेश कुमार, हरीकृष्ण अग्निहोत्री, पुष्पेंद्र पांडेय, श्यामनारायण मिश्रा, अशोक कुमार दीक्षित व राम प्रकाश ने तीन जुलाई को डीएम व एडीएम से शिकायत की। आरोप है कि क्षेत्रीय लेखपाल ने हाईवे में अधिग्रहण जमीन का मुआवजा अर्जित करने के लिए यह फर्जीवाड़ा किया है।
बिना आदेश खतौनी में चढ़ा दिए वारिसों के नाम
शिकायत होने पर मामला दबाने के लिए क्षेत्रीय लेखपाल ने बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के खतौनी में सीधे अन्य वारिसों के नाम खतौनी चढ़वा दिए। मामला संज्ञान में आने के बाद अपर जिलाधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह ने एसडीएम सदर को प्रकरण की जांच सौंपी है। एडीएम ने बताया कि मामले की जांच एसडीएम को देकर रिपोर्ट मांगी गई है।
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मामले में लेखपाल ने मृतक के जिस बेटे के नाम जमीन की वरासत कराई, उसी से ही अपनी पत्नी के नाम एक बैनामा करा लिया। लेखपाल ने यह फर्जीवाड़ा हाईवे से मुआवजा वसूलने के लालच में किया। अब मामले में जांच बैठ गई।
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इस मामले में प्लॉटधारकों ने शिकायत की तो वरासत में छूटे सदस्यों के नाम भी बगैर किसी सक्षम अधिकारी के आदेश से खतौनी में चढ़ा दिए, हालांकि मामले की जांच एडीएम ने एसडीएम को सौंपी है।
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ग्राम भीखमपुर निवासी चेतराम पुत्र मंगू के नाम 1381-1384 में गाटा संख्या 218 में 41 डिसमिल जमीन थी। भीखमपुर में चकबंदी के बाद गाटा संख्या 218 चार गाटों में विभाजित हुए, इनमें 323, 324, 558 व 559 शामिल हैं।
गाटा संख्या 218 में वर्ष 1971 में राष्ट्रीय राजमार्ग अधिग्रहण में 15 डिसमिल जमीन चली गई थी, जो वर्तमान में गाटा संख्या 559 है। इससे उसके पास 26 डिसमिल जमीन ही बची थी। इसके बाद चेतराम ने 26 डिसमिल में से 9.03 डिसमिल जमीन कैलाश नाथ व रामप्रकाश के नाम बेच दी थी।
बाद मेंं उसने छुन्नू बाबू, रामदत्त, कृष्णा देवी, मुंशीलाल व हरगोविंद को भी 15 डिसमिल बेच दी थी। इसी बीच भूस्वामी चेतराम की मौत हो गई। उनकी मृत्यु के बाद चेतराम के वारिस रमेश चंद्र, राकेश चंद्र व राजकिशोर का नाम खतौनी में दर्ज हुआ। इसी बीच रमेश चंद्र की भी मृत्यु हो गई।
रमेश की मौत के बाद उसके हिस्से की जमीन वारिसों के नाम दर्ज होनी थी, लेकिन क्षेत्रीय लेखपाल ने 10 अगस्त 2021 को रमेश चंद्र के छह वारिसों को छोड़कर उसके एक बेटे अजय कुमार के नाम वरासत दर्ज कर दी। जबकि रमेश चंद्र के वारिस अजय कुमार के अलावा अनिल कुमार, आनंद, श्रीबेटी, पूजा, शिवालिका व संगीता के नाम भी खतौनी में दर्ज होने थे।
मामले में लेखपाल ने रमेश चंद्र के वारिस अजय कुमार से अपनी पत्नी व भीखमपुर निवासी अपने निजी सहायक व एक अन्य के नाम भी 135.687 वर्ग मीटर के प्लॉट बैनामा करा लिया। जबकि मौके पर कोई जमीन नहीं थी।
तीन जुलाई को डीएम व एडीएम से की शिकायत
यह मामला संज्ञान में आने के बाद शिकायतकर्ता राकेश कुमार, हरीकृष्ण अग्निहोत्री, पुष्पेंद्र पांडेय, श्यामनारायण मिश्रा, अशोक कुमार दीक्षित व राम प्रकाश ने तीन जुलाई को डीएम व एडीएम से शिकायत की। आरोप है कि क्षेत्रीय लेखपाल ने हाईवे में अधिग्रहण जमीन का मुआवजा अर्जित करने के लिए यह फर्जीवाड़ा किया है।
बिना आदेश खतौनी में चढ़ा दिए वारिसों के नाम
शिकायत होने पर मामला दबाने के लिए क्षेत्रीय लेखपाल ने बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के खतौनी में सीधे अन्य वारिसों के नाम खतौनी चढ़वा दिए। मामला संज्ञान में आने के बाद अपर जिलाधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह ने एसडीएम सदर को प्रकरण की जांच सौंपी है। एडीएम ने बताया कि मामले की जांच एसडीएम को देकर रिपोर्ट मांगी गई है।