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Auraiya News: वित्त मंत्री का फर्जी वीडियो बना ठगी करने वालों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश
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औरैया। जिले में साइबर ठगी के एक बड़े मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि यह प्रथम दृष्टया गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी का मामला है। इसे केवल पुलिस जांच और साइबर सेल की सक्रियता से ही बेनकाब किया जा सकता है। अधिवक्ता अजय कुमार पांडेय ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। उन्होंने ऑनलाइन एक अखबार में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का फर्जी इंटरव्यू पढ़ा था। इसमें ऑनलाइन निवेश पोर्टल में निवेश कर भारी मुनाफा कमाने की बात थी। इस एआई-जनरेटेड वीडियो के झांसे में आकर उन्होंने अपने ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों के लिए निवेश किया। आरोपियों ने विभिन्न बैंक खातों और यूपीआई से उनसे साढ़े चार लाख रुपये ठगे।
साइबर थाना की प्रारंभिक जांच के बाद आरोपियों ने पीड़ित के 3,23,847 रुपये वापस किए, लेकिन शेष राशि आज तक नहीं मिली। मुख्य आरोपी भी पकड़ से बाहर हैं। इसके बावजूद सीजेएम कोर्ट ने बिना मुकम्मल सुनवाई के मामले को खारिज कर दिया था। सत्र न्यायालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि सीजेएम कोर्ट का आठ लाइनों का आदेश कानून के सिद्धांतों के विपरीत था। अदालत ने यह भी माना कि आरोपियों ने देश की वित्त मंत्री के नाम और छवि का दुरुपयोग करने के लिए खुद एआई-जनरेटेड वीडियो का सहारा लिया था।
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अदालत ने कहा कि यह प्रथम दृष्टया गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी का मामला है। इसे केवल पुलिस जांच और साइबर सेल की सक्रियता से ही बेनकाब किया जा सकता है। अधिवक्ता अजय कुमार पांडेय ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। उन्होंने ऑनलाइन एक अखबार में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का फर्जी इंटरव्यू पढ़ा था। इसमें ऑनलाइन निवेश पोर्टल में निवेश कर भारी मुनाफा कमाने की बात थी। इस एआई-जनरेटेड वीडियो के झांसे में आकर उन्होंने अपने ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों के लिए निवेश किया। आरोपियों ने विभिन्न बैंक खातों और यूपीआई से उनसे साढ़े चार लाख रुपये ठगे।
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साइबर थाना की प्रारंभिक जांच के बाद आरोपियों ने पीड़ित के 3,23,847 रुपये वापस किए, लेकिन शेष राशि आज तक नहीं मिली। मुख्य आरोपी भी पकड़ से बाहर हैं। इसके बावजूद सीजेएम कोर्ट ने बिना मुकम्मल सुनवाई के मामले को खारिज कर दिया था। सत्र न्यायालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि सीजेएम कोर्ट का आठ लाइनों का आदेश कानून के सिद्धांतों के विपरीत था। अदालत ने यह भी माना कि आरोपियों ने देश की वित्त मंत्री के नाम और छवि का दुरुपयोग करने के लिए खुद एआई-जनरेटेड वीडियो का सहारा लिया था।
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