फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Auraiya News ›   health

डिब्बा बंद आहार स्वास्थ्य के लिए घातक

Sat, 27 Jun 2020 11:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jun 2020 11:57 PM IST
विज्ञापन
health
औरैैया। कोविड-19 के इस मुश्किल दौर में बच्चों की कुपोषण दर को कम करने व उनके स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने अहम कदम उठाया है। कोरोना महामारी के दौरान शिशु स्वास्थ्य के लिए काम कर रही सभी पोषण संस्थाओं और संगठनों को निर्देश दिए गए हैं कि वह किसी भी प्रकार का डिब्बा बंद शिशु आहार न बांटे। यह जानकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी शरद अवस्थी ने दी।
विज्ञापन

शरद अवस्थी का कहना है कि छह माह पूर्ण होने पर मां के दूध के साथ ऊपरी आहार व दो साल तक स्तनपान शिशु का सर्वोत्तम आहार है। इसी को देखते हुए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के निदेशक शत्रुघ्न सिंह ने निर्देश दिया है कि केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में लागू आईएमएस एक्ट, 2003 का सख्ती से पालन किया जाए।
विज्ञापन

उधर, बालरोग विशेषज्ञ डॉ.जीपी चौधरी का कहना है कि मां का दूध बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। साथ ही छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उन्हें डायरिया, निमोनिया व कुपोषण जैसे रोगों से भी बचाता है। वहीं, बाजार में मिलने वाले डिब्बा बंद दूध में मां के दूध के मुकाबले कम पोषक तत्व होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed