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दवाइयों के बढ़े दाम, पुरानी कीमतों पर आपूर्ति बंद
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औरैया। इस समय बीमारियों के साथ दवाओं की कीमत भी जोर पकड़े है। जितनी तेजी से बीमारी बढ़ रही है, उसी तरह मांग भी बढ़ी है। इधर कच्चे माल के दामों में हुई बढ़ोतरी से सामान्य दवाओं की कीमतों में इजाफा हुआ है। दवा व्यापारी बताते हैं कि छह माह में दूसरी बार दवाओं की कीमतें बढ़ी हैं। नवंबर माह में भी दवाओं की कीमत बढ़ने की उम्मीद है।
दवा कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि कच्चे माल और चीन से फार्मूलेशन न आने के चलते हृदय, दर्द निवारक दवाओं के साथ मलहम, शुगर, बीपी, आईड्राप, एंटीबायोटिक दवाएं के दामों में छह महीने से लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
कारोबारियों की मानें तो दवाओं की कीमतों में दो से तीन गुना तक बढ़ोतरी देखने को मिली है। जबकि कुछ दवाएं तीन से पांच गुना तक महंगी हुई हैं। जिसमें सबसे अधिक बिकने वाली पैरासीटामाल भी शामिल है। दवा कारोबारी नरेंद्र पाल ने बताया कि नए स्टॉक की कीमतों में 20 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी देखने को मिली है।
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मेडीशियन लेब की एमडी रश्मी गुप्ता ने बताया कि दवाओं की महंगाई का एक कारण जीएसटी भी है। अधिक जरूरत वाली दवाओं पर जीएसटी नहीं लगना चाहिए। जीएसटी के चलते दवाओं के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।
दवा कारोबारी अभिषेक गुप्ता ने बताया कि 50 फीसदी से अधिक दवाओं के दामों में डेढ़ से दो गुना तक कीमतें बढ़ीं हैं। यहीं नहीं कई दवाओं में कीमतें तीन से चार गुनी तक जा पहुंची है। इससे लोग परेशान हो रहे हैं।
दवा कीमत पहले कीमत अब
पैरासिटामॉल 350 1000-1200
पैंट्रोप्राजोल 170 210
सफीजिम 140 225-220
पेन किलर 65 120-145
टेल्मा-40 (बीपी) 70 125-135
आंख का ड्राप 75 12135
मल्टी विटामिन 90 100-125
यूरोमैक्स-डी 425 500
नाइट्रोलॉग (हार्ट) 150 180
पुराने दामों पर सप्लाई बंद
दवा कारोबारियों की मानें तो फार्मा कंपनियों के तेवर बता रहे हैं कि जल्द ही दामों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। कई दवाओं की पुरानी कीमत पर सप्लाई बंद कर दी गई है। दवाओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पुराने बैच की जो दवाएं 60 से 80 रुपये में मिला करतीं थी। वह अब 125 से 150 के करीब हैं। इससे नवंबर माह में एक बार दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद दिखाई दे रही है।
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दवा कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि कच्चे माल और चीन से फार्मूलेशन न आने के चलते हृदय, दर्द निवारक दवाओं के साथ मलहम, शुगर, बीपी, आईड्राप, एंटीबायोटिक दवाएं के दामों में छह महीने से लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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कारोबारियों की मानें तो दवाओं की कीमतों में दो से तीन गुना तक बढ़ोतरी देखने को मिली है। जबकि कुछ दवाएं तीन से पांच गुना तक महंगी हुई हैं। जिसमें सबसे अधिक बिकने वाली पैरासीटामाल भी शामिल है। दवा कारोबारी नरेंद्र पाल ने बताया कि नए स्टॉक की कीमतों में 20 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी देखने को मिली है।
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मेडीशियन लेब की एमडी रश्मी गुप्ता ने बताया कि दवाओं की महंगाई का एक कारण जीएसटी भी है। अधिक जरूरत वाली दवाओं पर जीएसटी नहीं लगना चाहिए। जीएसटी के चलते दवाओं के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।
दवा कारोबारी अभिषेक गुप्ता ने बताया कि 50 फीसदी से अधिक दवाओं के दामों में डेढ़ से दो गुना तक कीमतें बढ़ीं हैं। यहीं नहीं कई दवाओं में कीमतें तीन से चार गुनी तक जा पहुंची है। इससे लोग परेशान हो रहे हैं।
दवा कीमत पहले कीमत अब
पैरासिटामॉल 350 1000-1200
पैंट्रोप्राजोल 170 210
सफीजिम 140 225-220
पेन किलर 65 120-145
टेल्मा-40 (बीपी) 70 125-135
आंख का ड्राप 75 12135
मल्टी विटामिन 90 100-125
यूरोमैक्स-डी 425 500
नाइट्रोलॉग (हार्ट) 150 180
पुराने दामों पर सप्लाई बंद
दवा कारोबारियों की मानें तो फार्मा कंपनियों के तेवर बता रहे हैं कि जल्द ही दामों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। कई दवाओं की पुरानी कीमत पर सप्लाई बंद कर दी गई है। दवाओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पुराने बैच की जो दवाएं 60 से 80 रुपये में मिला करतीं थी। वह अब 125 से 150 के करीब हैं। इससे नवंबर माह में एक बार दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद दिखाई दे रही है।