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अब गुनाहों से माफी के लिए होगी इबादत

Mon, 04 May 2020 10:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 04 May 2020 10:33 PM IST
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gunaho se maafi ke liye hoti ebadat
औरैया। रमजान-उल-मुबारक का पहला अशरा सोमवार को पूरा हो गया। इसी के साथ इबादतों का दौर भी तेज हो गया है। दूसरा असरा मगफिरत का है यानी दस दिनों में रोजेदार ज्यादा से ज्यादा इबादत कर अपने गुनाहों की माफी मांगेंगे। वहीं, लॉकडाउन के चलते घरों में ही इबादत और रोजा इफ्तार का दौर जारी है।
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रमजान-उल-मुबारक के तीस दिन को तीन अशरों में बांटा गया है। रमजान का पहला अशरा यानी दस दिन रहमत का है। दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों से निजात और तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी का है। रहमत का पहला अशरा सोमवार को 10वें रोजे के साथ पूरा हो गया। कारी आरिफ रहमानी ने कहा कि रमजान का महीना इबादत और गरीबों के साथ हमदर्दी का महीना है। उन्होंने कहा कि इस महीने की रातों में कयाम करने को भी सवाब बना दिया गया है। इस्लाम में जरूरतमंदों पर खर्च करना दौलत बढ़ाने का जरिया कहा जाता है। उन्होंने बताया कि गरीब रिश्तेदारों पर खर्च करने से दोगुना सवाब मिलता है। इसके अलावा समाज में ऐसे गरीब और परेशान लोगों को तलाश कर उनकी मदद करनी चाहिए, जो किसी के सामने हाथ नहीं फैलाते है।
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गरीबों से हमदर्दी का महीना है रमजान
हाफिज मु.कासिम ने बताया कि रमजान इबादत और गरीबों के साथ हमदर्दी का महीना है। इस पाक महीने में अल्लाह अपनी रहमतों के दरवाजे खोलता है। अल्लाह ने रोजे की हालत में किए गए हर काम को सवाब का जरिया बना दिया है। रोजा इंसान को इस तरह से ढालता है कि उसकी जिंदगी का हर पल, हर लम्हा अल्लाह की बंदगी में गुजरता हुआ नजर आता है।
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रमजान में बंद हो जाते है जहन्नुम के दरवाजे
हाफिज मु. इमरान का कहना है कि अल्लाह के रसूल फरमाते हैं कि रमजान के मुकद्दस महीने में जन्नत को खुशबुओं की धूनी दी जाती है। जब रमजान की पहली रात होती है अर्श के नीचे से एक हवा चलती है, जिससे जन्नत के दरख्तों के पत्ते और दरवाजे बजने लगते है। जन्नत के दरवाजे हुजूर पाक की उम्मत के लिए खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते है।

हमदर्दी का जज्बा पैदा करता है रोजा
सूफी शमीम ने बताया कि रमजान में रोजा अमीरों को गरीबों से हमदर्दी और एहसान का जज्बा पैदा करता है। वह गरीब की गुरबत और भूख को महसूस करते हैं। इस तरह समाज बेहतरी की तरफ बढ़ता है। इस महीने ज्यादा से ज्यादा कुरान की तिलावत करें।
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