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ईश्वर के दरबार में जाति-धर्म नहीं प्रेम सर्वोपरि
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
Updated Sun, 31 May 2015 11:55 PM IST
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ग्राम बौहरा में चल रही श्री राम कथा के दौरान आचार्य श्याम जी द्विवेदी ने कहा कि भगवान के लिए सभी समान है। ईश्वर के दरबार में जाति-धर्म का कोई महत्व नहीं है, वहां सिर्फ इंसान का महत्व है।
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भगवान श्रीराम ने शबरी से जूठे बेर खाकर इसका उदाहरण प्रस्तुत किया है। वहीं केवट की नाव में बैठ उसे चरण पखारने का अवसर भी दिया। भगवान अपने भक्त की हर इच्छा को अवश्य पूरा करते हैं।
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भगवान की भक्ति में जाति धर्म का नहीं प्रेम का स्थान सर्वोपरि होता है। इसलिए भगवान ईश्वर को पाने के लिए श्रद्घा, विश्वास व भाईचारा सत्कर्म आदि गुणों के साथ ईश्वर की निश्चल मन से उपासना करते हैं। कथा श्रवण के दौरान सैकड़ों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।
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