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निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहे अधिकारी, मामला जस का तस
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औरैया। स्वच्छ भारत मिशन में जिले की 477 ग्राम पंचायतों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) करने के लिए वर्ष 2014 से 18 के बीच में एक लाख 39 हजार 821 शौचालय के लिए किस्तों में धनराशि भेजी गई थी। जिले के ओडीएफ होने के बाद राज्य व जिला की ऑडिट में 16 करोड़ की धनराशि अतिरिक्त आ जाने का मामला प्रकाश में आया था, जिसमें साढ़े सात करोड़ रुपये ही एसबीएम (स्वच्छ भारत मिशन) के खाते में पाए गए, शेष साढ़े आठ करोड़ रुपये शासन ने जांच कर वापस करने के निर्देश दिए हैं, 15 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अधिकारी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके हैं।
बेस लाइन सर्वे के हिसाब से जिले की 477 ग्राम पंचायतों में एक अरब 67 करोड़ 54 लाख 52 हजार रुपये से 139621 शौचालयों का निर्माण कराकर जून 2008 में जिले को ओडीएफ कर दिया गया था। ओडीएफ के बाद राज्य व जिले की ऑडिट में 16 करोड़ रुपये अतिरिक्त पहुंचने का मामला प्रकाश में आया था। जिसमें साढ़े सात करोड़ रुपये एसबीएम (स्वच्छ भारत मिशन) खाते में उपलब्ध मिले। जबकि साढ़े आठ करोड़ रुपये का अंतर मिला। पिछले दिनों पंचायत राज डायरेक्टर बृहम देव तिवारी नेे वीडियो कांफ्रेसिंग में डीपीआरओ को इस प्रकरण की जांच कराकर शेष धनराशि को अविलंब शासन भेजने के निर्देश दिए थे। 15 दिन के अधिक का समय बीत चुका है। विभागीय अधिकारी जांच चलने की बात कर रहे हैं।
जिम्मेदार बोले
भाग्यनगर, एरवाकटरा, औरैया, अछल्दा, सहार व अजीतमल में ग्राम पंचायत वार बैंकों से मंगाए स्टेटमेंट के हिसाब से करीब 19 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिला है। बिधूना ब्लॉक की स्टेटमेंट का अभी मिलान नहीं हो सका है। बताया कि तत्कालीन डीपीआरओ कमल किशोर ने ग्राम पंचायतों में अतिरिक्त भेजी गई धनराशि ऐसी ग्राम पंचायतों में समायोजित की थी, जहां पर लक्ष्य के हिसाब शौचालय की धनराशि कम भेजी गई थी। इसकी जांच होना अभी बाकी है।
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राजेश चौरसिया
डीपीआरओ
जांच के नाम पर हो रही खानापूर्ति
औरैया। ओडीएफ के लिए शासन से भेजी गई धनराशि में अंतर के मामले में डीपीआरओ कार्यालय द्वारा की जा रही जांच में कई पेंच हैं। 2014 से पहले निर्मल भारत अभियान योजना के नाम से ग्राम पंचायतों में खाते खुले थे। बाद में स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) ग्राम पंचायतों में निर्मल भारत अभियान के खाते खोल दिए थे। इसमें 2012 से 2014 के बीच की पड़ी धनराशि भी समायोजित हो गई थी। जबकि डीपीआरओ कार्यालय द्वारा 2014 से लेकर 2018 के बीच ओडीएफ के दौरान के स्टेटमेंट से जांच चल रही है। दो तीन वर्ष के बीच ग्राम पंचायतों में अतिरिक्त धनराशि पड़ी रही, लेकिन ब्लॉक के एडीओ पंचायत, पंचायत सचिव द्वारा संज्ञान नहीं लिया गया और न ही उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। इससे विभाग की जांच में सवालिया निशान उठने लगे हैं।
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बेस लाइन सर्वे के हिसाब से जिले की 477 ग्राम पंचायतों में एक अरब 67 करोड़ 54 लाख 52 हजार रुपये से 139621 शौचालयों का निर्माण कराकर जून 2008 में जिले को ओडीएफ कर दिया गया था। ओडीएफ के बाद राज्य व जिले की ऑडिट में 16 करोड़ रुपये अतिरिक्त पहुंचने का मामला प्रकाश में आया था। जिसमें साढ़े सात करोड़ रुपये एसबीएम (स्वच्छ भारत मिशन) खाते में उपलब्ध मिले। जबकि साढ़े आठ करोड़ रुपये का अंतर मिला। पिछले दिनों पंचायत राज डायरेक्टर बृहम देव तिवारी नेे वीडियो कांफ्रेसिंग में डीपीआरओ को इस प्रकरण की जांच कराकर शेष धनराशि को अविलंब शासन भेजने के निर्देश दिए थे। 15 दिन के अधिक का समय बीत चुका है। विभागीय अधिकारी जांच चलने की बात कर रहे हैं।
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जिम्मेदार बोले
भाग्यनगर, एरवाकटरा, औरैया, अछल्दा, सहार व अजीतमल में ग्राम पंचायत वार बैंकों से मंगाए स्टेटमेंट के हिसाब से करीब 19 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिला है। बिधूना ब्लॉक की स्टेटमेंट का अभी मिलान नहीं हो सका है। बताया कि तत्कालीन डीपीआरओ कमल किशोर ने ग्राम पंचायतों में अतिरिक्त भेजी गई धनराशि ऐसी ग्राम पंचायतों में समायोजित की थी, जहां पर लक्ष्य के हिसाब शौचालय की धनराशि कम भेजी गई थी। इसकी जांच होना अभी बाकी है।
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राजेश चौरसिया
डीपीआरओ
जांच के नाम पर हो रही खानापूर्ति
औरैया। ओडीएफ के लिए शासन से भेजी गई धनराशि में अंतर के मामले में डीपीआरओ कार्यालय द्वारा की जा रही जांच में कई पेंच हैं। 2014 से पहले निर्मल भारत अभियान योजना के नाम से ग्राम पंचायतों में खाते खुले थे। बाद में स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) ग्राम पंचायतों में निर्मल भारत अभियान के खाते खोल दिए थे। इसमें 2012 से 2014 के बीच की पड़ी धनराशि भी समायोजित हो गई थी। जबकि डीपीआरओ कार्यालय द्वारा 2014 से लेकर 2018 के बीच ओडीएफ के दौरान के स्टेटमेंट से जांच चल रही है। दो तीन वर्ष के बीच ग्राम पंचायतों में अतिरिक्त धनराशि पड़ी रही, लेकिन ब्लॉक के एडीओ पंचायत, पंचायत सचिव द्वारा संज्ञान नहीं लिया गया और न ही उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। इससे विभाग की जांच में सवालिया निशान उठने लगे हैं।