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Auraiya News: नवरात्र में चार महासंयोग, नौ दिनों का होगा व्रत
Tue, 21 Mar 2023 12:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 21 Mar 2023 12:36 AM IST
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बेला। शक्ति की आराधना का महापर्व नवरात्र 22 मार्च चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होगा। माता की आराधना के साथ नवसंवत्सर की भी शुरुआत हो जाएगी। इस बार नवरात्र में चार योग का महासंयोग बन रहा है। व्रत और पूजन के लिए नौ दिन मिलेंगे। इस बार माता का आगमन नौका और प्रस्थान डोले पर होगा। पंडित नंदलाल चौबे ने बताया कि चैत्र नवरात्र इस बार पूरे नौ दिनों का होगा। इस बार तीन सर्वार्थ सिद्धि, तीन रवि योग, दो अमृत सिद्धि योग और गुरु पुष्य का संयोग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग 23, 27 और 30 मार्च को लगेगा। अमृत सिद्धि योग 27 व 30 मार्च को और रवि योग 24, 26 व 29 मार्च को लगेगा। नवरात्र के अंतिम दिन रामनवमी पर गुरु पुष्य योग का महासंयोग बन रहा है।
नौ दुर्गा के साथ गौरी पूजन का विधान
चैत्र नवरात्र पर नौ दुर्गा के साथ ही गौरी की पूजा का विधान है। 22 मार्च को प्रथम शैलपुत्री की पूजा के साथ ही घट स्थापना की जाएगी। 30 मार्च को महागौरी की पूजा के साथ ही राम नवमी भी मनाई जाएगी।
31 मार्च को होगा पारण
नवरात्र का पारण 31 मार्च को होगा। दुर्गा सप्तशती के अनुसार नवरात्र बुधवार से शुरू हो रहे हैं। ऐसे में माता का आगमन नौका पर होगा जो फसल, धन-धान्य और विकास के लिए काफी लाभदायक रहेगा।
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कलश स्थापना की विधि
पंडित नंदलाल चौबे ने बताया कि जौ बोने के लिए मिट्टी का कलश व पात्र का इस्तेमाल कर सकते हैं। कलश स्थापित करने के लिए जौ, गंगाजल, फूल, नौ प्रकार की मिठाई, फल, रोली, चावल, प्रसाद भोग तैयार करें। सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर मंदिर की सफाई करें। पटरा या चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवती मां की मूर्ति रखें। इस बात का ध्यान रखें कि कलश स्थापना या भगवती मां के आह्वान में भगवती मां का मुख पश्चिम की ओर हो और आपका मुंह उनके सामने पूरब दिशा की ओर हो। कलश के दायीं तरफ दीपक जलाकर रखें।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
सुबह 6:04 बजे से 7:30 बजे तक मीन लग्न
सुबह 9:06 तक मिथुन लग्न
सुबह 11:00 बजे तक वृषभ लग्न है
शाम 03:34 बजे से 05:51 बजे तक सिंह लग्न रहेगा
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नौ दुर्गा के साथ गौरी पूजन का विधान
चैत्र नवरात्र पर नौ दुर्गा के साथ ही गौरी की पूजा का विधान है। 22 मार्च को प्रथम शैलपुत्री की पूजा के साथ ही घट स्थापना की जाएगी। 30 मार्च को महागौरी की पूजा के साथ ही राम नवमी भी मनाई जाएगी।
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31 मार्च को होगा पारण
नवरात्र का पारण 31 मार्च को होगा। दुर्गा सप्तशती के अनुसार नवरात्र बुधवार से शुरू हो रहे हैं। ऐसे में माता का आगमन नौका पर होगा जो फसल, धन-धान्य और विकास के लिए काफी लाभदायक रहेगा।
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कलश स्थापना की विधि
पंडित नंदलाल चौबे ने बताया कि जौ बोने के लिए मिट्टी का कलश व पात्र का इस्तेमाल कर सकते हैं। कलश स्थापित करने के लिए जौ, गंगाजल, फूल, नौ प्रकार की मिठाई, फल, रोली, चावल, प्रसाद भोग तैयार करें। सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर मंदिर की सफाई करें। पटरा या चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवती मां की मूर्ति रखें। इस बात का ध्यान रखें कि कलश स्थापना या भगवती मां के आह्वान में भगवती मां का मुख पश्चिम की ओर हो और आपका मुंह उनके सामने पूरब दिशा की ओर हो। कलश के दायीं तरफ दीपक जलाकर रखें।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
सुबह 6:04 बजे से 7:30 बजे तक मीन लग्न
सुबह 9:06 तक मिथुन लग्न
सुबह 11:00 बजे तक वृषभ लग्न है
शाम 03:34 बजे से 05:51 बजे तक सिंह लग्न रहेगा