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यमुना नदी के पानी ने उतार की तरफ किया रुख, लोगों ने ली राहत

Sat, 21 Sep 2019 12:39 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 21 Sep 2019 12:39 AM IST
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औरैया। कई दिनों से उफनाई यमुना का जलस्तर शुक्रवार को भोर से घटना शुरू हो गया है। खतरे के निशान 113 मीटर को पारकर 117.36 मीटर पर पहुंचा नदी का पानी शुक्रवार को शाम डेढ़ मीटर नीचे पहुंच गया। हालांकि बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की दुश्वारियां अभी कम नहीं हुई हैं। गांवों में अभी तक घरों में पानी भरा होने से हालात जस के तस हैं। तिनका-तिनका सहेजकर जुटाई गृहस्थी बाढ़ के पानी से नष्ट होने की पीड़ा सभी के चेहरे पर साफ झलकती दिखी। सदर तहसील क्षेत्र के सबसे ज्यादा प्रभावित बीहड़ी गांव अस्ता में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने पहुंचकर गांव खाली कराकर ग्रामीणों को राहत शिविरों में पहुंचाया। शिविरों में उनके ठहरने से लेकर खाने व सोने का भी इंतजाम कराया गया है।
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केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारियों के मुताबिक गुरुवार देर रात तक पैमाने पर यमुना नदी के पानी ने 117.36 मीटर पर पहुंचकर स्थिरता बना ली थी। इसके बाद शुक्रवार को भोर से पानी ने नीचे की ओर रुख करना शुरू कर दिया। शाम पांच बजे जलस्तर 116.03 मीटर पर पहुंच गया। शुक्रवार को पानी के उतार-चढ़ाव की स्थिति का निरीक्षण करने केंद्रीय जल आयोग के एसडीओ अनुज शर्मा ने दोपहर में यमुना नदी पुल पर पहुंचे। जहां उन्होंने यमुना नदी के जल स्तर की पैमाने पर माप-जोख कराई। इस मौके पर मौजूद जेई कुलदीप कुमार के अलावा अन्य कर्मचारियों जनक मोहतो, सुरेश कुमार आदि को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। वहीं, अमर उजाला ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया तो साफ दिखा कि लोगों की दुश्वारियां तनिक भी कम नहीं हुई हैं। शुक्रवार को भी लोग अपने-अपने घरों से नाव से सामान लेकर राहत शिविरों में पहुंचते दिखाई दिए। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों को दवा वितरित की।
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अमर उजाला की टीम ने सदर तहसील के सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित गांव अस्ता का जायजा लिया। गांव अस्ता निवासी शिव सिंह ने बताया कि प्रशासन की तरफ से खाने का इंतजाम करा दिया गया है। तंबू लगाने के लिए प्लास्टिक भी मुहैया करा दी गई है। उन्हें सबसे ज्यादा पीड़ा गृहस्थी बर्बाद होने की है। हालत यह है कि वह अपनी बूढ़ी मां कैलाशी (60), पत्नी सूर्यकांती, पुत्र श्रीकृष्ण (06), आशीष (03) व पुत्री राधा देवी (04), छोटे भाई होतीलाल की पत्नी छोटी देवी के अलावा उसके मासूम तीन बच्चे तेजल(05), संजय(03) व छोटू (01), दादी बिटानी देवी (70) पत्नी स्व.दुलीचंद्र, छोटे भाई रामप्रसाद की पत्नी ममता व मासूम पुत्र रनवीर (03), चाची राजेश्वरी पत्नी रामजी के साथ गांव के बाहर खुद के बनाए राहत शिविर में रहने को मजबूर हैं। ग्राम अस्ता निवासी शकुंतला देवी ने बताया कि उन्हें अपनी गृहस्थी चौपट होने का मलाल है। शकुंतला बोली की उन्होंने आज तक इतना पानी कभी गांव में भरता नहीं देखा।
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गांव में लगे एक अन्य राहत शिविर पर पहुंचने पर वहां मौजूद सुनील कुमार अपने भाई व भाभी के अलावा उनके बच्चों के साथ बाढ़ राहत शिविर में मौजूद नजर आए। उनके चेहरे पर भी बाढ़ के पानी से गृहस्थी बर्बाद होने का दुख नजर आ रहा था। बोले बाढ़ का पानी गांव में इतनी तेजी से आया कि उन्हें संभलने का मौका ही नहीं मिला। उनके देखते-देखते घर में पानी भर गया। तीन परिवारों की गृहस्थी जलमग्न हो गई।
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