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Auraiya News: 200 करोड़ की 48 एकड़ जमीन हथियाने वाले 55 लोगों पर एफआईआर

Fri, 27 Jun 2025 11:57 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Fri, 27 Jun 2025 11:57 PM IST
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FIR against 55 people who grabbed 48 acres of land worth Rs 200 crore
दिबियापुर (औरैया)। वैसुंधरा के जमीन फर्जीवाड़े में जिला प्रशासन ने आरोपियों पर शिकंजा कस दिया है। रसूखदारों ने फर्जी प्रविष्टि से करीब 200 करोड़ रुपये की 48 एकड़ जमीन हथिया ली थी।
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बाद में एसडीएम कोर्ट के आदेश पर जमीन को ग्रामसभा में दर्ज करा दिया गया है। अब इस प्रकरण में डीएम के आदेश पर क्षेत्रीय लेखपाल ने जमीन पर काबिज 55 लोगों के खिलाफ गुरुवार रात दिबियापुर में एफआईआर दर्ज कराई है।
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साल 1987-88 में सदर तहसील के दिबियापुर कस्बे से सटे गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी। इसमें वैसुंधरा मौजा भी शामिल था। चकबंदी के दौरान 50 से अधिक लोगों ने जालसाजी करके करीब 48 एकड़ जमीन हथिया ली थी।
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यह जमीन अलग-अलग गाटा संख्या में है। आरोपियों ने फर्जी प्रविष्टियों के सहारे जमीन अपने नाम करवा ली थी। सालों तक मामला दबा रहा।

पिछले साल यह फर्जीवाड़ा अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद सुर्खियों में आ गया था। इसके बाद मामले में डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने 31 जुलाई 2024 को जांच के आदेश दिए थे। उन्होंने जांच कमेटी गठित करके रिपोर्ट मांगी थी।



जांच पूरी होने के बाद डीएम तक रिपोर्ट पहुंचती इससे पहले ही जालसाज कोर्ट पहुंच गए थे। वहीं, इनके खिलाफ यह मामले सदर तहसील से लेकर डीएम, एडीएम व चकबंदी न्यायालय में दर्ज हुए थे। 30 अक्तूबर 2024 को सदर एसडीएम कोर्ट में 4.73 एकड़ से जुड़ा आठ लोगों का मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद एसडीएम सदर राकेश कुमार ने फैसला सुनाया।
एसडीएम ने आरोपी दिनेश चंद्र, सतीश चंद्र, कलावती, सत्यदेव, सुरेश, महेश, गंगा देवी व थान सिंह समेत आठ लोगों के नाम दर्ज 4.73 एकड़ जमीन को ग्रामसभा की बंजर जमीन में दर्ज करने का आदेश दिया था।
इसके बाद जमीन को ग्राम सभा में दर्ज करा दिया गया है। अब जांच के बाद मामले में डीएम के निर्देश पर लेखपाल अभिनय कुमार ने 55 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
दिबियापुर थाना प्रभारी रुद्र नारायण त्रिपाठी ने बताया कि तहरीर के आधार पर 55 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। तहसीलदार सदर रणवीर सिंह ने बताया कि जमीन के फर्जीवाड़े के मामले में 55 लोगों के खिलाफ गुरुवार रात रिपोर्ट दर्ज कराई है।



इन पर दर्ज हुई रिपोर्ट



वैसुंधरा में हुए जमीन फर्जीवाड़ा मामले में रामजानकी पत्नी राधेश्याम, दर्शनलाल पुत्र गणेश प्रसाद, संजीव कुमार व जगजीवनराम पुत्रगण सूबेदार, दीक्षा पुत्री सुल्तान सिंह, शिवम सहारा पुत्र सुल्तान सिंह, कमलादेवी पत्नी सुल्तान सिंह, संजीव कुमार पुत्र सूबेदार, बदन सिंह पुत्र सुखवासी के खिलाफ रिपोर्ट हुई है।

इनके अलावा, किरन कुमारी पत्नी राजेंद्र कुमार, दिनेश व सतीश पुत्र शिवराम, कलावती पत्नी सोनेलाल, सत्येदव पुत्र बंगाली सिंह, सुरेश चंद्र व महेश चंद्र पुत्र बेचेलाल, गंगा देवी पत्नी बेंचेलाल, थान सिंह पुत्र गोपाल दास, चेतराम पुत्र मैकू, रमेश चंद्र, सुभाष चंद्र व रविंद्र सिंह पुत्रगण लालाराम, शिवम नावा पुत्र वेदप्रकाश, शिवानी व आरुषी पुत्री वेदप्रकाश, लता मंजेश पत्नी वेदप्रकाश के खिलाफ रिपोर्ट हुई है।



वहीं, राजेश, देवेंद्र व अशोक पुत्रगण ज्ञान सिंह, दर्शन सिंह, राकेश बाबू, रामकिशोर, बृजकिशोर पुत्रगण नाथूराम, रामवीर सिंह दत्तक पुत्र नाथूराम, प्रेमवती पत्नी रमेश चंद्र, अजय कुमार पुत्रगण ओमप्रकाश, जसवंत सिंह पुत्र रुस्तम सिंह, नरेंद्र सिंह, मुकुट सिंह पुत्रगण गेंदालाल, रामवीर सिंह पुत्र दत्तक सिंह पर केस हुआ है।

पदम नारायण व रवि सिंह पुत्रगण बलवंत सिंह, स्वदेश बाबू दत्तकपुत्र श्रीराम, रामदास व लक्ष्मीनारायण पुत्रगण गोरेलाल, बृजेंद्र कुमार, अवधेश कुमार व दीपक कुमार पुत्रगण रामस्वरूप, दशरथ पुत्र गोपाल, शिवकृष्ण, श्रीकृष्ण, हरीकृष्ण व सर्वेश कुमार पुत्रगण श्रीराम, त्रिवेणी देवी पत्नी गंगा नारायण पर भी एफआईआर हुई है।



जमीन हथियाने वालों में कई रसूखदार



वैसुंधरा में करीब 200 करोड़ रुपये की जमीन पर फर्जीवाड़ा करने वालों में सपा, भाजपा व बसपा से जुड़े कई लोग शामिल हैं। एक सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष का भाई भी शामिल बताया गया है। एक ही परिवार के चार-पांच-पांच लोग शामिल हैं। इस फर्जीवाड़े में कई महिलाएं व युवतियां भी शामिल रही हैं। उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई है।

करोड़ों का मुआवजा हड़पने वाले भी रडार पर

गत दिनों जारी आदेश में एसडीएम कोर्ट ने आठ लोगों के हिस्से फर्जी तरीके से चढ़ी 4.73 एकड़ जमीन को बंजर में दर्ज कराने का आदेश दिया था। ये वे लोग हैं, जिन्होंने सालों पहले फर्जी तरीके से बेशकीमती जमीन हथियाई थी।

इनमें 15 ने चकबंदी के दौरान 1987-88 में फर्जी पट्टा के कागजात सरकारी कर्मियों से मिलकर बनवाए और जमीन हथिया कर 50 करोड़ तक मुआवजा लेकर जमीन पाता पेट्रो केमिकल्स को दे दी थी।
राजस्व सूत्रों की मानें तो इस कवायद में वह लोग छूट गए हैं, लेकिन प्रशासन के रडार पर ऐसे लोग भी हैं। जिन पर जांच के बाद कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
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