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वित्तीय वर्ष हो रहा पूरा, काम रहे न अधूरा
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
Updated Fri, 01 Apr 2016 12:57 AM IST
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सीएमओ दफ्तर में फाइलों से उलझे बाबू।
- फोटो : अमर उजाला
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वित्तीय वर्ष समाप्त हो रहा है। सरकारी कार्यालयों में अब तक अलमारियों में कैद फाइलों के ढेर बाबुओं की मेज पर दिखाई देने लगे। अभिलेखों में आंकड़ेबाजी का दौर पिछले सत्रों की तरह इस बार भी पूरे रंग में नजर आ रहा है। गुरुवार को अमर उजाला टीम ने सरकारी कार्यालयों की पड़ताल की। बिखरे हुए कागज, बाबुओं की काम करने की तल्लीनता, बकाया बिलों का भुगतान कराने वालों की होड़ से सरकारी कार्यालयों में कुछ ऐसे हालात नजर आए...
सीन - एक- ठेकेदार ढेर, बाबू बने कुबेर - औरैया। जेसीज चौराहे के निकट स्थित विद्युत विभाग का अधिशाषी अभियंता का दफ्तर कम, धन कुबेरों का प्रतीक्षालय अधिक नजर आ रहा था। यहां सभी नियमित हो संविदा बाबू सभी अपनी-अपनी सीट पर जमे मिले। कोई कागजों पर तो कोई कंप्यूटर पर विभागीय आंकड़ेबाजी करने में तल्लीन नजर आया।
एकाउंटेंट कक्ष विभागीय ठेकेदारों के कब्जे में तो एकाउंटेंट कुबेर की हैसियत में दिखाई दिए। कर्मचारियों के अलावा कार्यालय में मौजूद मिले लोगों में केवल अपने बकाया बिलों के भुगतान चेक बनवाने की होड़ दिखाई दी।
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सीन - दो- करें कोरम पूरा, हिसाब रहे न अधूरा- औरैया। यूं तो जाते हुए वित्तीय वर्ष पर सभी सरकारी विभाग फाइलों में उलझे होते हैं, लेकिन इस मायने में सीएमओ कार्यालय के एनएचआरएम दफ्तर की बात ही कुछ और है। पड़ताल में एनएचआरएम कार्यालय परिसर में बाहर से सन्नाटा छाया हुआ दिखाई दिया। दफ्तर के अंदर डीपीएम से लेकर एकाउंटेंट तक आपरेटर के साथ कंप्यूटर से माथा पच्ची करते दिखाई दिए।
सीन - तीन- नहीं चलेगी चालबाजी, पूरी कर लो आंकड़ेबाजी- औरैया। समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष की व्यस्तता सीएमओ कार्यालय में भी देखी गई। कार्यालय में सभी पटलों के बाबू अभिलेखों के साथ माथा पच्ची करते दिखाई दिए। सभी के चेहरे पर जल्द काम पूरा करने की जल्दबाजी दिखाई दे रही थी। नए साल के खर्च ब्योरा रखे जाने की स्टेशनरी (रजिस्टर) आदि तैयार किए जाते हुए दिखाई दिए। वहीं मौजूदा वित्तीय वर्ष का लेखा जोखा का मिलान करते हुए बाबू देखे गए।
हर दिन करें काम तो हासिल हो मुकाम- औरैया। आम जनता की निगाह में सरकारी कार्यालयों की कार्यशैली कुछ ज्यादा अच्छी नहीं हैं। पड़ताल के दौरान विभागों में सरकारी बाबू को आज जिन हाल में देखा गया है, यदि यही हालात हर रोज दफ्तरों के स्थाई हो जाएं तो वाकई औरैया पिछड़े जिलों में नहीं, विकास के पहले पायदान पर नजर आए।
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सीन - एक- ठेकेदार ढेर, बाबू बने कुबेर - औरैया। जेसीज चौराहे के निकट स्थित विद्युत विभाग का अधिशाषी अभियंता का दफ्तर कम, धन कुबेरों का प्रतीक्षालय अधिक नजर आ रहा था। यहां सभी नियमित हो संविदा बाबू सभी अपनी-अपनी सीट पर जमे मिले। कोई कागजों पर तो कोई कंप्यूटर पर विभागीय आंकड़ेबाजी करने में तल्लीन नजर आया।
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एकाउंटेंट कक्ष विभागीय ठेकेदारों के कब्जे में तो एकाउंटेंट कुबेर की हैसियत में दिखाई दिए। कर्मचारियों के अलावा कार्यालय में मौजूद मिले लोगों में केवल अपने बकाया बिलों के भुगतान चेक बनवाने की होड़ दिखाई दी।
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सीन - दो- करें कोरम पूरा, हिसाब रहे न अधूरा- औरैया। यूं तो जाते हुए वित्तीय वर्ष पर सभी सरकारी विभाग फाइलों में उलझे होते हैं, लेकिन इस मायने में सीएमओ कार्यालय के एनएचआरएम दफ्तर की बात ही कुछ और है। पड़ताल में एनएचआरएम कार्यालय परिसर में बाहर से सन्नाटा छाया हुआ दिखाई दिया। दफ्तर के अंदर डीपीएम से लेकर एकाउंटेंट तक आपरेटर के साथ कंप्यूटर से माथा पच्ची करते दिखाई दिए।
सीन - तीन- नहीं चलेगी चालबाजी, पूरी कर लो आंकड़ेबाजी- औरैया। समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष की व्यस्तता सीएमओ कार्यालय में भी देखी गई। कार्यालय में सभी पटलों के बाबू अभिलेखों के साथ माथा पच्ची करते दिखाई दिए। सभी के चेहरे पर जल्द काम पूरा करने की जल्दबाजी दिखाई दे रही थी। नए साल के खर्च ब्योरा रखे जाने की स्टेशनरी (रजिस्टर) आदि तैयार किए जाते हुए दिखाई दिए। वहीं मौजूदा वित्तीय वर्ष का लेखा जोखा का मिलान करते हुए बाबू देखे गए।
हर दिन करें काम तो हासिल हो मुकाम- औरैया। आम जनता की निगाह में सरकारी कार्यालयों की कार्यशैली कुछ ज्यादा अच्छी नहीं हैं। पड़ताल के दौरान विभागों में सरकारी बाबू को आज जिन हाल में देखा गया है, यदि यही हालात हर रोज दफ्तरों के स्थाई हो जाएं तो वाकई औरैया पिछड़े जिलों में नहीं, विकास के पहले पायदान पर नजर आए।