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Auraiya News: वन मंत्रालय में फंसी बाढ़ प्रभावितों को ऊंचाई पर बसाने की फाइल
Mon, 20 Mar 2023 12:11 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 20 Mar 2023 12:11 AM IST
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औरैया। जिले के बाढ़ प्रभावित गांव मई, अस्ता व नौरी के ग्रामीणों को ऊंचाई पर बसाने की फाइल वन मंत्रालय में पिछले लगभग एक साल से एनओसी के इंतजार में फंसी पड़ी है। जिससे इन गांवों के ग्रामीणों को आज तक ऊंचे पर जमीन मुहैया नहीं कराई जा सकी है। जबकि पिछले दो बार से इन गांवों के ग्रामीण यमुना नदी में आने वाली बाढ़ के दंश को झेल चुके हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने के दौरान पिछले साल जन प्रतिनिधियों ने जल्द जमीन मुहैया कराए जाने का आश्वासन भी दिया था, लेकिन आज तक ग्रामीण आश्वासन पर ही जीने को मजबूर हैं।
जिले में पिछले दो सालों से यमुना नदी में आने वाली बाढ़ की चपेट में आने से मई, अस्ता व नौरी के लोग सर्वाधिक प्रभावित हुए थे। इन गांवों के लोगों को प्रशासन ने राहत कार्य के माध्यम से ऊंचे पर पहुंचाने का काम किया था। बार-बार बाढ़ का दंश झेलने से थक चुके ग्रामीणों की मांग पर पिछले साल बाढ़ प्रभावित गांवों को दौरे के दौरान जन प्रतिनिधियों ने उन्हें ऊंचे पर बसाने का आश्वासन दिया था।
इस पर जिला प्रशासन की ओर से वन विभाग की ऊंचाई की जमीन लेकर उतनी ही जमीन नीचे की देने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को स्वीकृति के लिए भेजा गया था। अहम बात यह है कि आज तक यह प्रस्ताव वन मंत्रालय में एनओसी के लिए बाट जोह रहा है। ऐसे में ग्रामीणों में खासा आक्रोश व्याप्त है।
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बता दें कि वर्ष 2021 में यमुना नदी में बाढ़ का पानी 117 मीटर पार कर गया था। जबकि 2022 में 118 मीटर जल स्तर पार कर गया था। जिससे नीचाई पर स्थित गांवों में पानी भरने से ग्रामीणों के सामने जबरजस्त संकट खड़ा हो गया था।
ठगा सा महसूस कर रहे ग्रामीण
गांव अस्ता निवासी मंगल सिंह कहते हैं कि हर साल हम लोगों को बाढ़ का संकट झेलना पड़ता है। बावजूद इसके शासन और प्रशासन की तरफ से समस्या के स्थायी निदान के लिए आश्वासन हाथ लगता है। पिछले साल ऊंचाई पर जमीन देने का आश्वासन दिया था, अभी तक कुछ नहीं मिला।
बाढ़ के बाद कोई नहीं लेता सुध
गांव नौरी निवासी किसान शिववीर कहते हैं कि हर साल हम लोगों को हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। बाढ़ के पानी की चपेट में आने से जानवर भी मर जाते हैं, लेकिन हम लोगों को कोई स्थायी समाधान नहीं मुहैया कराया जा रहा है। शासन प्रशासन सिर्फ बाढ़ आने पर ही दिखाई देते हैं, उसके बाद कोई भी सुध लेने नहीं आता है।
बोले जिम्मेदार-- -
बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों को ऊंचे पर बसाने के लिए वन विभाग की जो जमीन चिह्नित की गई है, उसकी एनओसी के लिए फाइल वन विभाग के मंत्रालय में पहुंच गई है। वहां से एनओसी मिलते ही बाढ़ प्रभावितों को ऊंचाई पर बसाने का काम किया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से लगातार संबंधित विभाग से पत्राचार भी किया जा रहा है। -महेंद्र प्रताप सिंह, अपर जिलाधिकारी, औरैया।
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जिले में पिछले दो सालों से यमुना नदी में आने वाली बाढ़ की चपेट में आने से मई, अस्ता व नौरी के लोग सर्वाधिक प्रभावित हुए थे। इन गांवों के लोगों को प्रशासन ने राहत कार्य के माध्यम से ऊंचे पर पहुंचाने का काम किया था। बार-बार बाढ़ का दंश झेलने से थक चुके ग्रामीणों की मांग पर पिछले साल बाढ़ प्रभावित गांवों को दौरे के दौरान जन प्रतिनिधियों ने उन्हें ऊंचे पर बसाने का आश्वासन दिया था।
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इस पर जिला प्रशासन की ओर से वन विभाग की ऊंचाई की जमीन लेकर उतनी ही जमीन नीचे की देने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को स्वीकृति के लिए भेजा गया था। अहम बात यह है कि आज तक यह प्रस्ताव वन मंत्रालय में एनओसी के लिए बाट जोह रहा है। ऐसे में ग्रामीणों में खासा आक्रोश व्याप्त है।
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बता दें कि वर्ष 2021 में यमुना नदी में बाढ़ का पानी 117 मीटर पार कर गया था। जबकि 2022 में 118 मीटर जल स्तर पार कर गया था। जिससे नीचाई पर स्थित गांवों में पानी भरने से ग्रामीणों के सामने जबरजस्त संकट खड़ा हो गया था।
ठगा सा महसूस कर रहे ग्रामीण
गांव अस्ता निवासी मंगल सिंह कहते हैं कि हर साल हम लोगों को बाढ़ का संकट झेलना पड़ता है। बावजूद इसके शासन और प्रशासन की तरफ से समस्या के स्थायी निदान के लिए आश्वासन हाथ लगता है। पिछले साल ऊंचाई पर जमीन देने का आश्वासन दिया था, अभी तक कुछ नहीं मिला।
बाढ़ के बाद कोई नहीं लेता सुध
गांव नौरी निवासी किसान शिववीर कहते हैं कि हर साल हम लोगों को हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। बाढ़ के पानी की चपेट में आने से जानवर भी मर जाते हैं, लेकिन हम लोगों को कोई स्थायी समाधान नहीं मुहैया कराया जा रहा है। शासन प्रशासन सिर्फ बाढ़ आने पर ही दिखाई देते हैं, उसके बाद कोई भी सुध लेने नहीं आता है।
बोले जिम्मेदार
बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों को ऊंचे पर बसाने के लिए वन विभाग की जो जमीन चिह्नित की गई है, उसकी एनओसी के लिए फाइल वन विभाग के मंत्रालय में पहुंच गई है। वहां से एनओसी मिलते ही बाढ़ प्रभावितों को ऊंचाई पर बसाने का काम किया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से लगातार संबंधित विभाग से पत्राचार भी किया जा रहा है। -महेंद्र प्रताप सिंह, अपर जिलाधिकारी, औरैया।