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खाद विक्रेताओं के स्टॉक का होगा सत्यापन
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औरैया। खाद की कालाबाजारी से निपटने के लिए सभी उर्वरक विक्रेताओं के स्टॉक का सत्यापन होगा। कमी मिलने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिले में ई-पॉस मशीनों से उर्वरक बिक्री करने की व्यवस्था लागू है। शासन ने निर्देश दिया है कि जिले के सभी उर्वरक विक्रेताओं के भौतिक स्टॉक और ई-पॉस मशीन में दर्ज बिक्री विवरण की जांच की जाए। इसमें अंतर मिलने पर विक्रेताओं पर कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, मामला ऑनलाइन पोर्टल पर स्टॉक सत्यापन से संबंधित है। विक्रेता कई बार किसानों को उर्वरक वितरण कर देते हैं, लेकिन बिक्री के समय उन्हें ई-पॉस मशीन की रसीद नहीं देते। ऐसे में स्टॉक कम हो जाता है, लेकिन पोर्टल पर रिकार्ड दर्ज नहीं हो पाता।
चूंकि केंद्र सरकार ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज रिजर्व और बिक्री स्टॉक के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराती है। यदि ऑनलाइन विवरण और भौतिक स्टाक में अंतर मिलेगा तो जिले में उर्वरक का संकट पैदा हो सकता है। उर्वरक संकट से निपटने के लिए दुकानवार भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। शासन के निर्देशानुसार सोमवार से 25 मार्च तक अभियान चलाकर जिले के करीब 600 उर्वरक विक्रेताओं का भौतिक और मशीन में दर्ज बिक्री विवरण से मिलान करते हुए जांच की जाएगी।
वर्जन
यदि मशीन में दर्ज बिक्री डाटा और भौतिक रूप से उपलब्ध उर्वरक में अंतर पाया गया तो विक्रेताओं पर सीधे कार्रवाई की जाएगी। टीम गठित कर दी गई हैं। सभी टीमों से निर्धारित समय में जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। - आवेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी
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जिले में ई-पॉस मशीनों से उर्वरक बिक्री करने की व्यवस्था लागू है। शासन ने निर्देश दिया है कि जिले के सभी उर्वरक विक्रेताओं के भौतिक स्टॉक और ई-पॉस मशीन में दर्ज बिक्री विवरण की जांच की जाए। इसमें अंतर मिलने पर विक्रेताओं पर कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, मामला ऑनलाइन पोर्टल पर स्टॉक सत्यापन से संबंधित है। विक्रेता कई बार किसानों को उर्वरक वितरण कर देते हैं, लेकिन बिक्री के समय उन्हें ई-पॉस मशीन की रसीद नहीं देते। ऐसे में स्टॉक कम हो जाता है, लेकिन पोर्टल पर रिकार्ड दर्ज नहीं हो पाता।
चूंकि केंद्र सरकार ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज रिजर्व और बिक्री स्टॉक के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराती है। यदि ऑनलाइन विवरण और भौतिक स्टाक में अंतर मिलेगा तो जिले में उर्वरक का संकट पैदा हो सकता है। उर्वरक संकट से निपटने के लिए दुकानवार भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। शासन के निर्देशानुसार सोमवार से 25 मार्च तक अभियान चलाकर जिले के करीब 600 उर्वरक विक्रेताओं का भौतिक और मशीन में दर्ज बिक्री विवरण से मिलान करते हुए जांच की जाएगी।
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यदि मशीन में दर्ज बिक्री डाटा और भौतिक रूप से उपलब्ध उर्वरक में अंतर पाया गया तो विक्रेताओं पर सीधे कार्रवाई की जाएगी। टीम गठित कर दी गई हैं। सभी टीमों से निर्धारित समय में जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। - आवेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी
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