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Auraiya News: खेतों में सूखा, उर्वरक बाजार में हरियाली
Fri, 24 Apr 2026 11:50 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Fri, 24 Apr 2026 11:50 PM IST
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फोटो-45-अछल्दा स्थित सहकारी समिति पर मौजूद किसान
औरैया। जिले में इन दिनों मौसम का मिजाज बदला हुआ है। गेहूं की कटाई के बाद ज्यादातर खेत खाली और सूखे पड़े हैं लेकिन इसके उलट उर्वरक बाजार में जबरदस्त हरियाली है।
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते मात्र 20 दिनों में जिले के किसानों ने 27 हजार बोरी से अधिक उर्वरकों की खरीद कर डाली है। बीते साल की तुलना में यह बिक्री करीब 20 प्रतिशत अधिक है। कृषि विभाग ने इस पर जांच शुरू कर दी है।
इस समय जब खेतों में बुआई का मुख्य सीजन नहीं है, इतनी बड़ी मात्रा में खाद की बिक्री ने कृषि विभाग के कान खड़े कर दिए हैं। विभाग को आशंका है कि कहीं खाद का भंडारण तो नहीं किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार एक अप्रैल से 20 अप्रैल के बीच इस साल करीब 27240 बोरी यूरिया, डीएपी और एनपीके की बिक्री हुई जो बीते वर्ष की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक है।
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इसमें सर्वाधिक खरीद करीब 22 हजार बोरी यूरिया की हुई हुई है। साथ ही डीएपी और एनपीके की बिक्री में भी उछाल आया है। जब खेतों में फसल नहीं है और बिक्री बढ़ रही है तो साफ है कि इसका अवैध भंडारण किया जा रहा है।
ऐसे में विभाग क्रेता और विक्रेताओं के रिकॉर्ड की जांच कर रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इतनी बड़ी मात्रा में खाद किन क्षेत्रों में और क्यों जा रही है। इसमें पांच बोरी तक खाद खरीदने वालों का भी सत्यापन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार ईरान-इजरायल युद्ध के चलते किसानों को उर्वरक न मिलने की आशंका है। इसी आशंका में वह पहले से ही उर्वरक खरीदकर रख रहे हैं ताकि बाद में धान व अन्य फसलों के लिए उन्हें परेशानी न हो।
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बीते वर्ष बिकी थी करीब 23 हजार बोरी खाद
बीते वर्ष एक अप्रैल से 20 अप्रैल के बीच करीब 23 हजार बोरी खाद बिकी थी। इसमें यूरिया का मात्रा 18 हजार बोरी सर्वाधिक है। ऐसे में इस बार खपत बढ़ने से कृषि विभाग भी सक्रिय हो गया है।
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उर्वरक की नहीं हैं कमी, स्टॉक से बचें
किसानों से जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने अपील की है कि जिले में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। किसान उर्वरकों का स्टॉक न करें। अभी किसी फसल में उर्वरकों की आवश्यकता नहीं है। खरीफ सीजन में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने विक्रेताओं से भी नियमानुसार विक्रय करने की अपील की है।
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मुख्य बिंदु
-यूरिया की मांग में सबसे ज्यादा 198 मीट्रिक टन का इजाफा।
-डीएपी की मांग में 20 मीट्रिक टन का इजाफा
-एनपीके की बिक्री भी पिछले साल के मुकाबले कई गुना बढ़ी।
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खाद 2026 2025 ज्यादा बिक्री (एमटी में)
यूरिया 1098 900 198
डीएपी 250 230 20
एनपीके 34 6 28
नोट: सभी आंकड़े मीट्रिक टन में हैं।
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इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते मात्र 20 दिनों में जिले के किसानों ने 27 हजार बोरी से अधिक उर्वरकों की खरीद कर डाली है। बीते साल की तुलना में यह बिक्री करीब 20 प्रतिशत अधिक है। कृषि विभाग ने इस पर जांच शुरू कर दी है।
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इस समय जब खेतों में बुआई का मुख्य सीजन नहीं है, इतनी बड़ी मात्रा में खाद की बिक्री ने कृषि विभाग के कान खड़े कर दिए हैं। विभाग को आशंका है कि कहीं खाद का भंडारण तो नहीं किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार एक अप्रैल से 20 अप्रैल के बीच इस साल करीब 27240 बोरी यूरिया, डीएपी और एनपीके की बिक्री हुई जो बीते वर्ष की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक है।
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इसमें सर्वाधिक खरीद करीब 22 हजार बोरी यूरिया की हुई हुई है। साथ ही डीएपी और एनपीके की बिक्री में भी उछाल आया है। जब खेतों में फसल नहीं है और बिक्री बढ़ रही है तो साफ है कि इसका अवैध भंडारण किया जा रहा है।
ऐसे में विभाग क्रेता और विक्रेताओं के रिकॉर्ड की जांच कर रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इतनी बड़ी मात्रा में खाद किन क्षेत्रों में और क्यों जा रही है। इसमें पांच बोरी तक खाद खरीदने वालों का भी सत्यापन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार ईरान-इजरायल युद्ध के चलते किसानों को उर्वरक न मिलने की आशंका है। इसी आशंका में वह पहले से ही उर्वरक खरीदकर रख रहे हैं ताकि बाद में धान व अन्य फसलों के लिए उन्हें परेशानी न हो।
बीते वर्ष बिकी थी करीब 23 हजार बोरी खाद
बीते वर्ष एक अप्रैल से 20 अप्रैल के बीच करीब 23 हजार बोरी खाद बिकी थी। इसमें यूरिया का मात्रा 18 हजार बोरी सर्वाधिक है। ऐसे में इस बार खपत बढ़ने से कृषि विभाग भी सक्रिय हो गया है।
उर्वरक की नहीं हैं कमी, स्टॉक से बचें
किसानों से जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने अपील की है कि जिले में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। किसान उर्वरकों का स्टॉक न करें। अभी किसी फसल में उर्वरकों की आवश्यकता नहीं है। खरीफ सीजन में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने विक्रेताओं से भी नियमानुसार विक्रय करने की अपील की है।
मुख्य बिंदु
-यूरिया की मांग में सबसे ज्यादा 198 मीट्रिक टन का इजाफा।
-डीएपी की मांग में 20 मीट्रिक टन का इजाफा
-एनपीके की बिक्री भी पिछले साल के मुकाबले कई गुना बढ़ी।
खाद 2026 2025 ज्यादा बिक्री (एमटी में)
यूरिया 1098 900 198
डीएपी 250 230 20
एनपीके 34 6 28
नोट: सभी आंकड़े मीट्रिक टन में हैं।

फोटो-45-अछल्दा स्थित सहकारी समिति पर मौजूद किसान