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धार्मिक अनुष्ठान से मिलती है शक्ति
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Fri, 20 Nov 2015 10:53 PM IST
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धार्मिक अनुष्ठान मानव को शक्ति प्रदान करते हैं। यह शक्ति उनके ज्ञान में वृद्धि करती है। मानव को बुराई, विकार, आपत्ति से बचाए रखती है। कीर्ति यश दिलाती है। यह बात कथावाचक आचार्य सतीश ने भक्तों के बीच कही।
कस्बे के आजाद नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन आचार्य सतीश अवस्थी ने भक्तों को अध्यात्मिक शक्ति और भक्ति के बारे में बताया। कहा कि सामूहिक अनुष्ठानों से रोग, शोक विरोध आपत्ति, आक्रमण, भय आदि का निवारण होकर मानव आध्यात्मिक शक्तियां प्राप्त करता है। साधनाओं से मानव के पुरुषार्थ में वृद्धि होती है। धार्मिक कार्यक्रमों से भगवान की कृपा बरसती है।
वहीं शाम की कथा में सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कृष्ण सुदामा की मित्रता निश्चल और निस्वार्थ भाव की है। सुदामा गरीब भिखारी ब्राह्मण नहीं थे, वह भगवान श्रीकृष्ण का परम मित्र थे। सुदामा ने ब्राहमण की गरिमा को कभी गिरने नहीं दिया। आज कल स्वार्थ में डूबकर लोक अपने हितों को पूरा करते हैं। ऐसे लोग चिरकाल तक नरक के भागी होकर गरीब और भिखारी बनते हैं। इस अवसर पर परीक्षित सीएन दुबे, आलेाक, आशीष, पिंकी, शैलेंद्र, देवू, छोटू मिश्रा मौजूद रहे।
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कस्बे के आजाद नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन आचार्य सतीश अवस्थी ने भक्तों को अध्यात्मिक शक्ति और भक्ति के बारे में बताया। कहा कि सामूहिक अनुष्ठानों से रोग, शोक विरोध आपत्ति, आक्रमण, भय आदि का निवारण होकर मानव आध्यात्मिक शक्तियां प्राप्त करता है। साधनाओं से मानव के पुरुषार्थ में वृद्धि होती है। धार्मिक कार्यक्रमों से भगवान की कृपा बरसती है।
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वहीं शाम की कथा में सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कृष्ण सुदामा की मित्रता निश्चल और निस्वार्थ भाव की है। सुदामा गरीब भिखारी ब्राह्मण नहीं थे, वह भगवान श्रीकृष्ण का परम मित्र थे। सुदामा ने ब्राहमण की गरिमा को कभी गिरने नहीं दिया। आज कल स्वार्थ में डूबकर लोक अपने हितों को पूरा करते हैं। ऐसे लोग चिरकाल तक नरक के भागी होकर गरीब और भिखारी बनते हैं। इस अवसर पर परीक्षित सीएन दुबे, आलेाक, आशीष, पिंकी, शैलेंद्र, देवू, छोटू मिश्रा मौजूद रहे।
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