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Auraiya News: करोड़ों खर्च होने के बावजूद बंद पड़े नगर निकायों के एमआरएफ सेंटर
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औरैया। जिले भर की नगर निकायों में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए एमआरएफ सेंटर कई साल बीतने के बाद भी अभी तक सुचारू रूप से संचालित नहीं हो सके हैं। विभागीय अधिकारियाें की अनदेखी के चलते कहीं क्षमता के अनुसार बिजली कनेक्शन नहीं है तो कहीं सेंटर तक पहुंचने के लिए सड़क का अभाव बना हुआ है। ऐसे में सड़क किनारे बने अस्थाई कूड़ा डंपिंग स्थलों पर डाला जा रहा कचरा लोगों के लिए सडांध और संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बन रहा है। जिससे लोगों में आक्रोश व्याप्त है। लगभग नौ माह पहले एडीएम ने समस्या दूर कराने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके स्थिति जस की तस है। एमआरएफ सेंटरों की कराई गई पड़ताल में अधिकारियों की अनदेखी साफ तौर पर दिखाई दी।
केवल सूखे कूड़े की हो रही छटाई
फोटो24 एयूआरपी 01- सौंधेमऊ स्थित एमआरएफ सेंटर पर शांत पड़ी मशीनें। संवाद
सीन - 1
स्थान - सौंधेमऊ
नगर पालिका परिषद की ओर से शहर से लगभग 16 किलोमीटर दूर सौंधेमऊ में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से लगभग तीन साल पहले बनाया गया एमआरएफ सेंटर बिजली कनेक्शन के अभाव में आज तक सुचारू रूप से संचालित नहीं हो सका है। एक-दो गाड़ियां ही पहुंचा जाती हैं। केवल सूखे कचरे से छटाई का काम किया जा रह है। इसके चलते पालिका परिक्षेत्र से निकलने वाले कचरे को जालौन रोड पर या तो सड़क किनारे डाला जाता है या फिर सड़क किनारे स्थित एक प्लाट में डंप किया जा रहा है।
फोटो24एयूआरपी 02- दो वर्ष से संचालन के इंतजार में तैयार खड़ा एमआरएफ सेंटर। संवाद
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एमआरएफ सेंटर तक पहुंचने को सड़क नहीं
सीन - 2
स्थान - हरदू गांव
बिधूना नगर पंचायत का एमआरएफ सेंटर बिधूना से लगभग 22 किलोमीटर दूर बेला के समीप हरदू गांव में लगभग दो वर्ष पहले बना है। एमआरएफ सेंटर एक करोड़ 20 लाख रुपए से अधिक लागत से बना था। इसे अधिकारियों की लापरवाही कहें या अनदेखी। एमआरएफ सेंटर तो बना दिया गया, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं है। इससे सेंटर तक कूडे की गाड़ियां न पहुंच पाने से उसका संचालन शुरू नहीं हो सका है। हालांकि इस बीच एक-दो गाड़ियों भेजकर संचालन के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। तहसील के पीछे डंपिंग यार्ड में कूड़ा डाला जा रहा है। अब रास्ते को लेकर नगर पंचायत प्रशासन जिले के आला अधिकारियों से लेकर वन विभाग से वार्ता करने लगा हुआ है।
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केवल सिंगल फेस से चलाई जा रही मशीनें
फोटो24एयूआरपी 03- एमआरएफ सेंटर संचालित न होने से सड़क किनारे डाला गया कूड़ा। संवाद
सीन - 3
स्थान - गौतला गांव
नगर पंचायत अछल्दा की ओर से गौतला गांव के पास 37 लाख रुपये की लागत से बना एमआरएफ सेंटर शोपीस बना हुआ है। लगभग दो साल से अधिक समय पहले बने इस एमआरएफ सेंटर में मशीनें तो लग गईं, लेकिन कनेक्शन के नाम पर आज तक केवल सिंगल फेस का बिजली का कनेक्शन है। जबकि मशीनों की क्षमता के अनुसार तीन फेस के कनेक्शन की जरूरत है। संबंधित अधिकारियों को जानकारी है बावजूद इसके आज तक इसकी अनदेखी जारी है। जिससे सड़क किनारे कूड़ा डाला जा रहा है। इससे उधर से गुजरने वालों को सडांध का सामना करना पड़ता है।
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नहीं हुआ बिजली कनेक्शन
फोटो24एयूआरपी - कनेक्शन के अभाव में एमआरएफ सेंटर संचालित न होने से मैनुअल तरीके से कचरा से सामग्री बीनते कर्मचारी। संवाद
सीन -4
स्थान - तिवारी का पुर्वा
दिबियापुर का एमआरएफ सेंटर गांव तिवारी का पूर्वा में लगभग 33 लाख रुपये के बजट से लगभग डेढ़ साल पहले बना है। अभी तक बिजली कनेक्शन नहीं हुआ है। इसके चलते सूखा कूड़ा मैनुअल तरीके से अलग किया जा रहा है। पिछले काफी समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। दो दिन पहले दोबारा राजस्व कर्मियों ने पैमाईश की है। अब बाउंड्रीवाल का निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है। बिजली कनेक्शन के लिए खंभे गाड़ने का काम शुरू हो गया है। बिजली कनेक्शन होते ही मशीनों से काम शुरू हाेने की उम्मीद है।
वर्जन
जिले में समस्याओं के चलते एमआरएफ सेंटरों के संचालन को लेकर चार जून के बाद विशेष ध्यान दिया जाएगा। हालांकि इस संबंध में बिजली विभाग के अलावा वन विभाग के अधिकारियाें से वार्ता चल रही है। जल्द समस्या दूर कराकर नगर निकायों के सभी एमआरएफ सेंटरों का संचालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
- एमपी सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, औरैया।
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केवल सूखे कूड़े की हो रही छटाई
फोटो24 एयूआरपी 01- सौंधेमऊ स्थित एमआरएफ सेंटर पर शांत पड़ी मशीनें। संवाद
सीन - 1
स्थान - सौंधेमऊ
नगर पालिका परिषद की ओर से शहर से लगभग 16 किलोमीटर दूर सौंधेमऊ में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से लगभग तीन साल पहले बनाया गया एमआरएफ सेंटर बिजली कनेक्शन के अभाव में आज तक सुचारू रूप से संचालित नहीं हो सका है। एक-दो गाड़ियां ही पहुंचा जाती हैं। केवल सूखे कचरे से छटाई का काम किया जा रह है। इसके चलते पालिका परिक्षेत्र से निकलने वाले कचरे को जालौन रोड पर या तो सड़क किनारे डाला जाता है या फिर सड़क किनारे स्थित एक प्लाट में डंप किया जा रहा है।
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फोटो24एयूआरपी 02- दो वर्ष से संचालन के इंतजार में तैयार खड़ा एमआरएफ सेंटर। संवाद
एमआरएफ सेंटर तक पहुंचने को सड़क नहीं
सीन - 2
स्थान - हरदू गांव
बिधूना नगर पंचायत का एमआरएफ सेंटर बिधूना से लगभग 22 किलोमीटर दूर बेला के समीप हरदू गांव में लगभग दो वर्ष पहले बना है। एमआरएफ सेंटर एक करोड़ 20 लाख रुपए से अधिक लागत से बना था। इसे अधिकारियों की लापरवाही कहें या अनदेखी। एमआरएफ सेंटर तो बना दिया गया, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं है। इससे सेंटर तक कूडे की गाड़ियां न पहुंच पाने से उसका संचालन शुरू नहीं हो सका है। हालांकि इस बीच एक-दो गाड़ियों भेजकर संचालन के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। तहसील के पीछे डंपिंग यार्ड में कूड़ा डाला जा रहा है। अब रास्ते को लेकर नगर पंचायत प्रशासन जिले के आला अधिकारियों से लेकर वन विभाग से वार्ता करने लगा हुआ है।
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केवल सिंगल फेस से चलाई जा रही मशीनें
फोटो24एयूआरपी 03- एमआरएफ सेंटर संचालित न होने से सड़क किनारे डाला गया कूड़ा। संवाद
सीन - 3
स्थान - गौतला गांव
नगर पंचायत अछल्दा की ओर से गौतला गांव के पास 37 लाख रुपये की लागत से बना एमआरएफ सेंटर शोपीस बना हुआ है। लगभग दो साल से अधिक समय पहले बने इस एमआरएफ सेंटर में मशीनें तो लग गईं, लेकिन कनेक्शन के नाम पर आज तक केवल सिंगल फेस का बिजली का कनेक्शन है। जबकि मशीनों की क्षमता के अनुसार तीन फेस के कनेक्शन की जरूरत है। संबंधित अधिकारियों को जानकारी है बावजूद इसके आज तक इसकी अनदेखी जारी है। जिससे सड़क किनारे कूड़ा डाला जा रहा है। इससे उधर से गुजरने वालों को सडांध का सामना करना पड़ता है।
नहीं हुआ बिजली कनेक्शन
फोटो24एयूआरपी - कनेक्शन के अभाव में एमआरएफ सेंटर संचालित न होने से मैनुअल तरीके से कचरा से सामग्री बीनते कर्मचारी। संवाद
सीन -4
स्थान - तिवारी का पुर्वा
दिबियापुर का एमआरएफ सेंटर गांव तिवारी का पूर्वा में लगभग 33 लाख रुपये के बजट से लगभग डेढ़ साल पहले बना है। अभी तक बिजली कनेक्शन नहीं हुआ है। इसके चलते सूखा कूड़ा मैनुअल तरीके से अलग किया जा रहा है। पिछले काफी समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। दो दिन पहले दोबारा राजस्व कर्मियों ने पैमाईश की है। अब बाउंड्रीवाल का निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है। बिजली कनेक्शन के लिए खंभे गाड़ने का काम शुरू हो गया है। बिजली कनेक्शन होते ही मशीनों से काम शुरू हाेने की उम्मीद है।
वर्जन
जिले में समस्याओं के चलते एमआरएफ सेंटरों के संचालन को लेकर चार जून के बाद विशेष ध्यान दिया जाएगा। हालांकि इस संबंध में बिजली विभाग के अलावा वन विभाग के अधिकारियाें से वार्ता चल रही है। जल्द समस्या दूर कराकर नगर निकायों के सभी एमआरएफ सेंटरों का संचालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
- एमपी सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, औरैया।