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Auraiya News: विकल्प होने के बाद भी रासायनिक खाद की खपत नहीं हुई कम
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संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। किसानों की सुविधा व मिट्टी के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती और नैनो उर्वरक के विकल्प होने के बाद भी रासायनिक उर्वरकों की खपत कम नहीं हो रही है। अभी भी रासायनिक खाद का खूब प्रयोग किया जा रहा है, जो खेत और इंसानों की सेहत के लिए घातक है।
किसानों की मांग के अनुसार इस समय यूरिया 10804 मीट्रिक टन, डीएपी 7974 मीट्रिक टन, एनपीके 379 मीट्रिक टन, एमओपी 688 मीट्रिक टन व एसएसपी 667 मीट्रिक टन का भंडारण उपलब्ध है। वहीं इसके विकल्प के रूप में नैनो उर्वरकों का प्रयोग न के बराबर हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि उत्पादन कम होने के डर से किसान इसका प्रयोग करने में कतरा रहे हैं।
जिले की 94 प्रतिशत भूमि में होती है खेती
कृषि विभाग की ओर से जिले में धान, गेहूं, मक्का, चना, मटर सहित सभी दलहनी और तिलहनी फसलों की खेती होती है। कृषि विभाग की ओर से जिले में नमामि गंगे योजना के तहत 133 कलस्टर में 4981 किसान 2660 हेक्टेयर में जैविक और गो आधारित प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। बावजूद इसके रसायन उर्वरकों के प्रयोग में कोई कमी नहीं आई है।
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जिले के किसानों को लगातार रासायनिक उर्वरक के वैकल्पिक नैनो खाद और जैविक प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है, लेकिन ज्यादातर किसान कम उत्पादन के डर से कम रुचि ले रहे हैं। - शैलेंद्र कुमार वर्मा, उप कृषि निदेशक
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औरैया। किसानों की सुविधा व मिट्टी के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती और नैनो उर्वरक के विकल्प होने के बाद भी रासायनिक उर्वरकों की खपत कम नहीं हो रही है। अभी भी रासायनिक खाद का खूब प्रयोग किया जा रहा है, जो खेत और इंसानों की सेहत के लिए घातक है।
किसानों की मांग के अनुसार इस समय यूरिया 10804 मीट्रिक टन, डीएपी 7974 मीट्रिक टन, एनपीके 379 मीट्रिक टन, एमओपी 688 मीट्रिक टन व एसएसपी 667 मीट्रिक टन का भंडारण उपलब्ध है। वहीं इसके विकल्प के रूप में नैनो उर्वरकों का प्रयोग न के बराबर हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि उत्पादन कम होने के डर से किसान इसका प्रयोग करने में कतरा रहे हैं।
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जिले की 94 प्रतिशत भूमि में होती है खेती
कृषि विभाग की ओर से जिले में धान, गेहूं, मक्का, चना, मटर सहित सभी दलहनी और तिलहनी फसलों की खेती होती है। कृषि विभाग की ओर से जिले में नमामि गंगे योजना के तहत 133 कलस्टर में 4981 किसान 2660 हेक्टेयर में जैविक और गो आधारित प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। बावजूद इसके रसायन उर्वरकों के प्रयोग में कोई कमी नहीं आई है।
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जिले के किसानों को लगातार रासायनिक उर्वरक के वैकल्पिक नैनो खाद और जैविक प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है, लेकिन ज्यादातर किसान कम उत्पादन के डर से कम रुचि ले रहे हैं। - शैलेंद्र कुमार वर्मा, उप कृषि निदेशक