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पूजन के बाद रोशनी से जगमगाए घर
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औरैया। दीयों का त्योहार दिवाली जनपद में उल्लास व धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान घरों व प्रतिष्ठानों में भव्य सवाजट हुई। वहीं शुभ मुर्हुत त में धन लक्ष्मी व गणेश का पूजन किया गया। दियों और रंग बिरंगी झालरों व आतिशबाजी की रोशनी से अमावस्या की रात पूरी तरह से ओझल रही। देररात तक आतिशबाजी चलती रही। आसमान में तारे नजर ही नहीं आए, चारों तरफ रॉकेट की रोशनी ही दिखी।
कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर लोगों ने घर के आंगन या पूजा स्थल पर स्थापित देवी लक्ष्मी और गणपति सहित इंद्र और कुबेर की पूजा करके सुख-समृद्धि का आशीष मांगा। घर और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में दीवार पर सिंदूर से श्री गणेशाय नम:, शुभ-लाभ जैसे मांगलिक मंत्र लिखकर सर्व मंगल की कामना की गई। बहुरंगी फूलों के साथ लक्ष्मी को कमल के फूल भी चढ़ाए गए।
आचार्यों के मुताबिक गुरुवार को शुभ मुर्हुुत सुबह के समय था। वहीं देरशाम को छह बजे से रात आठ बजकर 32 मिनट के बीच श्रद्धालुओं ने प्रदोष काल के सर्वोत्तम मुहूर्त में पूजन किया। आधी रात यानी निशीथकाल में तांत्रिक उपासना की गई। पूजन के बाद आतिशबाजी का सिलसिला शुरू हुआ जो देररात तक जारी रहा। इस दौरान आतिशबाजी चलाकर दिवाली का लुप्त उठाया। घरों में तरह-तरह के पकवान तैयार किए गए। दीप जलने के बाद तरह-तरह के डिजाइनर दीयों की आभा और दमकी। दीयों, मोमबत्तियों और बिजली की रंगबिरंगी झालरों से घर और प्रतिष्ठान सजे तो अंधेरा दूर कहीं जाकर दुबक गया। रोशनी, आतिशबाजी, मिठाइयों ने दिवाली की खुशियों को खास बना दिया।
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देररात तक चला बधाई का दौर
दिवाली पर सुबह से ही शुरू शुभकामनाएं देने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। लोगों ने अपने मित्रों, करीबियों, रिश्तेदारों के साथ तमाम ऐसे परिचितों को भी पर्व पर शुभकामनाएं दीं, जिनसे अरसे से न मुलाकात हुई थी। इस बीच मोबाइल पर मैसेज बॉक्स कई-कई बार फुल होते रहे। गैर हिंदू दोस्तों की ओर से भी पूरी गर्मजोशी के साथ पर्व की शुभकामनाएं दी गईं। मिठाइयां खाने और लोगों को पर्व की शुभकामनाएं देने के लिए एक दूसरे के घर जाने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा।
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कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर लोगों ने घर के आंगन या पूजा स्थल पर स्थापित देवी लक्ष्मी और गणपति सहित इंद्र और कुबेर की पूजा करके सुख-समृद्धि का आशीष मांगा। घर और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में दीवार पर सिंदूर से श्री गणेशाय नम:, शुभ-लाभ जैसे मांगलिक मंत्र लिखकर सर्व मंगल की कामना की गई। बहुरंगी फूलों के साथ लक्ष्मी को कमल के फूल भी चढ़ाए गए।
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आचार्यों के मुताबिक गुरुवार को शुभ मुर्हुुत सुबह के समय था। वहीं देरशाम को छह बजे से रात आठ बजकर 32 मिनट के बीच श्रद्धालुओं ने प्रदोष काल के सर्वोत्तम मुहूर्त में पूजन किया। आधी रात यानी निशीथकाल में तांत्रिक उपासना की गई। पूजन के बाद आतिशबाजी का सिलसिला शुरू हुआ जो देररात तक जारी रहा। इस दौरान आतिशबाजी चलाकर दिवाली का लुप्त उठाया। घरों में तरह-तरह के पकवान तैयार किए गए। दीप जलने के बाद तरह-तरह के डिजाइनर दीयों की आभा और दमकी। दीयों, मोमबत्तियों और बिजली की रंगबिरंगी झालरों से घर और प्रतिष्ठान सजे तो अंधेरा दूर कहीं जाकर दुबक गया। रोशनी, आतिशबाजी, मिठाइयों ने दिवाली की खुशियों को खास बना दिया।
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देररात तक चला बधाई का दौर
दिवाली पर सुबह से ही शुरू शुभकामनाएं देने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। लोगों ने अपने मित्रों, करीबियों, रिश्तेदारों के साथ तमाम ऐसे परिचितों को भी पर्व पर शुभकामनाएं दीं, जिनसे अरसे से न मुलाकात हुई थी। इस बीच मोबाइल पर मैसेज बॉक्स कई-कई बार फुल होते रहे। गैर हिंदू दोस्तों की ओर से भी पूरी गर्मजोशी के साथ पर्व की शुभकामनाएं दी गईं। मिठाइयां खाने और लोगों को पर्व की शुभकामनाएं देने के लिए एक दूसरे के घर जाने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा।